कानपुर में भूजल सप्ताह के तहत जनजागरूकता रैली, शपथ और वृक्षारोपण से जल संरक्षण का संदेश
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर: जल संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने और भूजल स्तर में सुधार के उद्देश्य से कानपुर नगर प्रशासन द्वारा “भूजल सप्ताह” के अंतर्गत व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के निर्देशन में जिले के विभिन्न विकास खंडों और ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा भूजल संवर्धन को लेकर शपथ ग्रहण, जनजागरूकता रैली, गोष्ठियों और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों का उद्देश्य लोगों को जल के महत्व से अवगत कराना और जल संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देना है।
प्रशासन का मानना है कि यदि प्रत्येक नागरिक जल बचाने की जिम्मेदारी को समझे और दैनिक जीवन में छोटे-छोटे प्रयास करे, तो भविष्य में जल संकट जैसी चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी सोच के साथ जनपद में विभिन्न विभागों के सहयोग से लगातार जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी के निर्देशन में चल रहा विशेष अभियान
भूजल सप्ताह के सफल आयोजन के लिए जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में 8 जुलाई 2026 को एक तैयारी बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए थे कि वे विकास खंड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर जल संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करें।
इन निर्देशों के अनुपालन में भूमि संरक्षण, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, कृषि तथा अन्य विभागों ने संयुक्त रूप से गांव-गांव में जागरूकता गतिविधियां शुरू कीं। अधिकारियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के सहयोग से जल संरक्षण के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया।
शपथ ग्रहण के माध्यम से जल बचाने का संकल्प
19 जुलाई 2026 को आयोजित कार्यक्रमों के दौरान विभिन्न विकास खंडों में अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जल संरक्षण शपथ ली।
शपथ के माध्यम से सभी ने यह संकल्प लिया कि वे जल का विवेकपूर्ण उपयोग करेंगे, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देंगे तथा भूजल पुनर्भरण के लिए समाज में जागरूकता फैलाएंगे। साथ ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों के संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी मानते हुए सक्रिय भूमिका निभाने का भी संकल्प लिया गया।
जनजागरूकता रैलियों से दिया जल बचाने का संदेश
भूजल सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों और विकास खंडों में जनजागरूकता रैलियां भी निकाली गईं। इन रैलियों में शामिल लोगों ने जल संरक्षण से जुड़े संदेशों वाले बैनर और स्लोगन के माध्यम से आम नागरिकों को जल बचाने के लिए प्रेरित किया।
रैली के दौरान लोगों को बताया गया कि बढ़ती आबादी, अनियंत्रित भूजल दोहन और बदलते जलवायु परिदृश्य के कारण भूजल स्तर लगातार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में वर्षा जल संचयन, जल का संतुलित उपयोग और प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।
तालाबों और चेकडैमों के आसपास हुआ वृक्षारोपण
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में स्थित तालाबों और चेकडैमों के आसपास वृक्षारोपण भी किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि वृक्ष भूजल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेड़ों की जड़ें वर्षा जल को भूमि के भीतर पहुंचाने में सहायक होती हैं, जिससे भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है।
वृक्षारोपण अभियान के दौरान स्थानीय लोगों से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने और उन्हें संरक्षित रखने की अपील भी की गई। अधिकारियों ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।
भूजल संरक्षण क्यों है आवश्यक
विशेषज्ञों के अनुसार भूजल भारत में पेयजल और सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। शहरीकरण, बढ़ती आबादी और जल के अत्यधिक दोहन के कारण कई क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में जल संकट और गंभीर हो सकता है।
इसी कारण सरकार और प्रशासन वर्षा जल संचयन, जल पुनर्भरण, तालाबों के संरक्षण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष बल दे रहे हैं। भूजल सप्ताह जैसे कार्यक्रम इसी दिशा में लोगों को जागरूक करने का माध्यम बन रहे हैं।
जनभागीदारी से ही सफल होगा अभियान
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने घर, खेत, विद्यालय और कार्यस्थल पर जल संरक्षण के उपाय अपनाए, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा।
लोगों से वर्षा जल संचयन प्रणाली अपनाने, अनावश्यक जल व्यय रोकने, तालाबों और जलाशयों को स्वच्छ रखने तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की अपील की गई।
विभागों का समन्वित प्रयास
भूजल सप्ताह के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा गोष्ठियां, श्रमदान, जागरूकता अभियान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं।
अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में भी जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रम जारी रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक जल संरक्षण का संदेश पहुंच सके।
पर्यावरण संरक्षण के साथ जल संरक्षण पर भी जोर
कार्यक्रमों में यह संदेश भी दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। वृक्षारोपण, जल स्रोतों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि समाज आज से ही जल संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रयास करेगा, तो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
कानपुर नगर में भूजल सप्ताह के अंतर्गत आयोजित शपथ ग्रहण, जनजागरूकता रैली और वृक्षारोपण कार्यक्रमों ने जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के निर्देशन में विभिन्न विभागों द्वारा विकास खंड और ग्राम पंचायत स्तर पर चलाए जा रहे अभियान से लोगों में जल के महत्व और भूजल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
यदि प्रशासनिक प्रयासों के साथ आम नागरिक भी वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, तो भविष्य में जल संकट की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।

