कानपुर में ‘वृक्ष वन्दनम्’ कार्यक्रम आयोजित, पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण का लिया सामूहिक संकल्प

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी

कानपुर: पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने और भारतीय संस्कृति में वृक्षों के महत्व को समाज के बीच पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन के तत्वावधान में किदवई नगर के के-ब्लॉक में ‘वृक्ष वन्दनम्’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और समाजसेवियों ने सहभागिता कर वृक्षों के संरक्षण तथा अधिक से अधिक पौधारोपण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा, सामाजिक सहभागिता और पर्यावरण जागरूकता के साथ किया गया। आयोजकों ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटते हरित क्षेत्र को देखते हुए वृक्षारोपण केवल एक सामाजिक गतिविधि नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।

वैदिक मंत्रोच्चार और वृक्ष पूजन से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ वृक्ष पूजन से हुई। भारतीय परंपरा के अनुरूप वृक्षों का पूजन कर उन्हें जीवन, प्रकृति और पर्यावरण का आधार बताया गया। उपस्थित लोगों ने वृक्षों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके संरक्षण का संकल्प दोहराया।

इस अवसर पर हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन के महानगर संयोजक नवेन्दु शुक्ला ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और पर्यावरण को सदैव पूजनीय माना गया है।

वृक्ष केवल ऑक्सीजन प्रदान करने वाले पौधे नहीं हैं, बल्कि वे पृथ्वी पर जीवन के संतुलन को बनाए रखने वाले सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक हैं।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस अभियान से जुड़े और वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों की नियमित देखभाल भी सुनिश्चित करे।

भारतीय संस्कृति में वृक्षों का विशेष महत्व

अपने संबोधन में नवेन्दु शुक्ला ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में पीपल, बरगद, नीम, तुलसी सहित अनेक वृक्षों को विशेष स्थान प्राप्त है। इन वृक्षों का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी मानव जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने बताया कि पीपल और बरगद जैसे वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि नीम औषधीय गुणों से भरपूर है। इसी प्रकार तुलसी का पौधा स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी आवश्यक है।

प्रत्येक नागरिक से पौधारोपण की अपील

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों से अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया गया।

नवेन्दु शुक्ला ने कहा कि पौधा लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक आवश्यक उसकी देखभाल करना है। यदि प्रत्येक परिवार एक पौधा लगाकर उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखे, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे अपने परिवार, विद्यालय, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदाय के माध्यम से वृक्षारोपण अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दें।

पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता

वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, वायु प्रदूषण और जल संकट जैसी चुनौतियां पूरी दुनिया के सामने हैं। इन समस्याओं के समाधान में वृक्षों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार वृक्ष वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, भूजल संरक्षण में सहायक होते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं तथा जैव विविधता को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

इसी कारण पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार अधिक से अधिक वृक्षारोपण और हरित क्षेत्रों के संरक्षण पर बल देते रहे हैं।

सामाजिक सहभागिता से सफल हुआ आयोजन

कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। स्थानीय नागरिकों के साथ महिलाओं और युवाओं ने भी उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से सुनील शुक्ला, रेखा शुक्ला, मंजू जोशी, माधुरी उत्तम, पल्लवी तिवारी, हेमा गुंजन तिवारी, रेखा गुप्ता, अनीता अवस्थी, मनु द्विवेदी, बबीता साहू तथा अर्चना सिंह सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित रहे।

सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक दायित्व बताते हुए हरित और स्वच्छ भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लिया।

स्वच्छ और हरित भारत का लिया संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण, वृक्षों की सुरक्षा और अधिक से अधिक पौधारोपण करने की शपथ ली।

आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल एक दिन पौधारोपण करना नहीं, बल्कि समाज में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। यदि प्रत्येक नागरिक पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाए, तो भविष्य में बेहतर और स्वच्छ वातावरण तैयार किया जा सकता है।

जनजागरूकता अभियान आगे भी रहेगा जारी

हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन ने बताया कि भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। संस्था का उद्देश्य लोगों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाना और हरित भारत के निर्माण में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना है।

संस्था के प्रचार-प्रसार प्रमुख डॉ. राहुल मिश्रा ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है और संस्था इस दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी।

किदवई नगर में आयोजित ‘वृक्ष वन्दनम्’ कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के महत्व का प्रभावी संदेश दिया। कार्यक्रम में वैदिक परंपरा के अनुसार वृक्ष पूजन के साथ नागरिकों ने अधिक से अधिक पौधारोपण, पौधों की देखभाल और आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।

हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन की यह पहल समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

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