ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते: कानपुर सेंट्रल पर मिली नाबालिग बालिका को आरपीएफ ने सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाया
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर: भारतीय रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा संचालित “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत एक बार फिर सतर्कता और संवेदनशीलता का उदाहरण देखने को मिला।
कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिली एक 15 वर्षीय नाबालिग बालिका को आरपीएफ ने सुरक्षित रेस्क्यू कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शाहजहांपुर पुलिस को विधिवत सुपुर्द कर दिया। इस कार्रवाई से न केवल बालिका की सुरक्षित घर वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ, बल्कि रेलवे स्टेशनों पर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के प्रति आरपीएफ की सक्रिय भूमिका भी सामने आई।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई रेल मदद (RailMadad) हेल्पलाइन से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिलते ही आरपीएफ टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बालिका को सुरक्षित संरक्षण में लिया और उसके परिजनों तथा संबंधित पुलिस थाने से संपर्क स्थापित किया।
प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर मिली थी नाबालिग बालिका
आरपीएफ को प्राप्त जानकारी के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर नियमित गश्त के दौरान उप निरीक्षक हेमराज मीणा और महिला प्रधान आरक्षक वंदना कटियार प्लेटफॉर्म संख्या-1 पर ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक नाबालिग बालिका संदिग्ध परिस्थितियों में अकेली दिखाई दी।
आरपीएफ टीम ने संवेदनशीलता के साथ बालिका से बातचीत की और उसकी पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास किया। पूछताछ में बालिका ने अपना नाम शालनी (परिवर्तित ), उम्र लगभग 15 वर्ष तथा निवास थाना कांट, जनपद शाहजहांपुर बताया। उसने यह भी जानकारी दी कि वह 4 जुलाई 2026 को अपने घर से निकल गई थी।
परिजनों और स्थानीय पुलिस से तुरंत किया गया संपर्क
बालिका से प्राप्त जानकारी के आधार पर आरपीएफ ने बिना देरी किए उसके परिजनों तथा थाना कांट, शाहजहांपुर पुलिस से संपर्क किया। जब तक संबंधित पुलिस टीम कानपुर नहीं पहुंची, तब तक बालिका को महिला आरपीएफ कर्मियों की देखरेख में सुरक्षित रखा गया।
आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में सुरक्षा और संवेदनशीलता सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसलिए पूरी प्रक्रिया बाल संरक्षण से संबंधित निर्धारित दिशानिर्देशों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप अपनाई गई।
एफआईआर के आधार पर हुई सुपुर्दगी की कार्रवाई
18 जुलाई 2026 को थाना कांट, शाहजहांपुर से उप निरीक्षक जितेंद्र सिंह तथा महिला कांस्टेबल इर्तिशा कानपुर सेंट्रल पहुंचे। उनके साथ बालिका का भाई भी मौजूद था।
संबंधित पुलिस टीम ने थाना कांट में दर्ज एफआईआर संख्या 0320/2026 की प्रति और नाबालिग को सुपुर्द किए जाने संबंधी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए। दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद आरपीएफ ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार बालिका को शाहजहांपुर पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
नियमानुसार पूरी की गई कानूनी प्रक्रिया
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, सुपुर्दगी की पूरी प्रक्रिया महिला स्टाफ की उपस्थिति में पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई। बालिका को उसी स्थिति में संबंधित पुलिस अधिकारी को सौंपा गया, जिस स्थिति में उसे संरक्षण में लिया गया था।
कार्रवाई के दौरान उसके पास मौजूद व्यक्तिगत सामान भी नियमानुसार संबंधित पुलिस अधिकारी को सौंपा गया। पूरी प्रक्रिया का आवश्यक अभिलेखीकरण भी किया गया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी आवश्यकता होने पर उसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते क्या है?
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते भारतीय रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य रेलवे परिसरों में अकेले, लापता, भटके हुए या संकट की स्थिति में मिले बच्चों और किशोरों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराना है।
इस अभियान के तहत आरपीएफ कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे ऐसे बच्चों की पहचान कर सकें और संबंधित पुलिस, बाल कल्याण समिति (CWC) तथा परिजनों के साथ समन्वय स्थापित कर उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर सकें।
रेलवे स्टेशन पर सतर्कता की अहम भूमिका
देश के बड़े रेलवे स्टेशन प्रतिदिन लाखों यात्रियों की आवाजाही का केंद्र होते हैं। ऐसे में कई बार नाबालिग बच्चे विभिन्न कारणों से अकेले या असहाय स्थिति में मिल जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में आरपीएफ की त्वरित कार्रवाई संभावित जोखिमों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि नियमित गश्त, सीसीटीवी निगरानी और हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई के कारण ऐसे मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
रेल मदद हेल्पलाइन बनी प्रभावी माध्यम
इस मामले में रेल मदद (RailMadad) हेल्पलाइन की सूचना भी महत्वपूर्ण साबित हुई। रेलवे द्वारा संचालित यह व्यवस्था यात्रियों और नागरिकों को किसी भी प्रकार की समस्या, शिकायत या आपात स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का माध्यम उपलब्ध कराती है।
अधिकारियों का कहना है कि समय पर प्राप्त सूचना के कारण आरपीएफ टीम तेजी से सक्रिय हुई और बालिका को सुरक्षित संरक्षण में लिया जा सका।
बाल सुरक्षा के प्रति आरपीएफ की प्रतिबद्धता
आरपीएफ ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि रेलवे परिसरों में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता, कानूनी प्रक्रिया और मानवीय दृष्टिकोण—तीनों का समान रूप से पालन किया जाता है।
उन्होंने यात्रियों से भी अपील की कि यदि रेलवे स्टेशन या ट्रेन में कोई बच्चा संदिग्ध या असहाय स्थिति में दिखाई दे, तो इसकी सूचना तुरंत आरपीएफ हेल्पलाइन 139, रेल मदद (RailMadad) या निकटतम रेलवे सुरक्षा कर्मियों को दें। समय पर दी गई सूचना किसी बच्चे को उसके परिवार से मिलाने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कानपुर सेंट्रल पर की गई यह कार्रवाई केवल एक सफल रेस्क्यू अभियान नहीं, बल्कि यह भी दर्शाती है कि रेलवे सुरक्षा बल सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है।
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के माध्यम से लगातार ऐसे बच्चों को सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जो किसी कारणवश अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं या संकट की स्थिति में रेलवे परिसरों में पहुंच जाते हैं।
इस मामले में भी आरपीएफ की त्वरित कार्रवाई, संबंधित पुलिस के साथ बेहतर समन्वय और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के पालन से नाबालिग बालिका को सुरक्षित रूप से उसके गृह जनपद की पुलिस को सौंप दिया गया, जिससे उसकी सुरक्षित घर वापसी का रास्ता सुनिश्चित हो सका।

