कानपुर में नेत्रहीन मेधावियों का सम्मान, साध्वी निरंजन ज्योति बोलीं— प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर: भारतीय जनता पार्टी कानपुर उत्तर के तत्वावधान में जवाहर नगर स्थित अंध मुक्त विद्यालय में आयोजित प्रेरणादायी संगोष्ठी में नेत्रहीन मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और संघर्षशीलता के बल पर समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को पटका पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे उनके चेहरे आत्मविश्वास और उत्साह से खिल उठे।
इस अवसर पर साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि समाज को दिव्यांगजनों को केवल सहानुभूति की दृष्टि से नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा और क्षमता के आधार पर सम्मान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और अवसर मिलने पर दिव्यांग विद्यार्थी हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां कभी भी सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं बनतीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और परिश्रम से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
दिव्यांगजन समाज की प्रेरक शक्ति हैं
अपने संबोधन में साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि दिव्यांगजन समाज की प्रेरक शक्ति हैं। उनके जीवन का संघर्ष, आत्मविश्वास और उपलब्धियां पूरे समाज को सकारात्मक संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें दिव्यांगजनों के कल्याण, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान के लिए लगातार विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रही हैं, ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले। इसलिए सभी को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी शारीरिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो।
राम जन्मभूमि आंदोलन और आस्था का किया उल्लेख
अपने संबोधन के दौरान साध्वी निरंजन ज्योति ने राम जन्मभूमि आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं भारत रत्न बाबू कल्याण सिंह ने कारसेवकों की सुरक्षा के लिए अपनी सरकार तक का त्याग कर दिया था। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों सनातनियों की आस्था का केंद्र है।
इसी क्रम में उन्होंने कहा कि यदि किसी ने मंदिर से जुड़े मामलों में अनुचित कार्य किया है, तो उसके विरुद्ध कानून अपना कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था पर सभी को विश्वास रखना चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिलने का किया उल्लेख
साध्वी निरंजन ज्योति ने अपने संबोधन में सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के गठन से लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग को मजबूत बनाने तक विभिन्न चरणों में जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर पिछड़े वर्गों के अधिकारों को और अधिक मजबूती प्रदान की। उनके अनुसार इससे सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा।
सतीश महाना ने सामाजिक समर्पण पर दिया जोर
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि समाज में धार्मिक और सामाजिक मूल्यों का सम्मान बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मंदिरों में लोग केवल दान नहीं करते, बल्कि अपनी श्रद्धा और समर्पण अर्पित करते हैं। उन्होंने कानून के शासन पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार का अपराध करता है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
सतीश महाना ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो जीवन की कठिन परिस्थितियों को अवसरों में बदल सकती है। उन्होंने नेत्रहीन विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता समाज के लिए प्रेरणादायी है।
अरुण पाठक ने समावेशी विकास की बात कही
विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गरीब, किसान, नवजवान और महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना समाज का समग्र विकास संभव नहीं है।
उनके अनुसार विकास तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर प्राप्त हो।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और सकारात्मक सोच के माध्यम से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
नेत्रहीन विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायी क्षण वह रहा, जब विद्यालय के मेधावी नेत्रहीन विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। साध्वी निरंजन ज्योति ने विद्यार्थियों को पटका पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि ऐसे आयोजन उन्हें आगे बढ़ने के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करते हैं।
विद्यालय के शिक्षकों ने भी कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच देने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होते हैं।
अंत्योदय के संकल्प को बताया प्राथमिकता
कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा कानपुर उत्तर के जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने की। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अंत्योदय के संकल्प के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान, अवसर और विकास पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों का सम्मान केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं और दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान तथा संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता
संगोष्ठी में जिला महामंत्री प्रमोद विश्वकर्मा, अभिनव दीक्षित, अवधेश सोनकर, संजीव पाठक, जिला मीडिया प्रभारी अनुराग शर्मा, जन्मेजय सिंह, शिवांग मिश्रा, सीमा एमबीए, अरुण पाल, धीरज बाल्मीकि, विनोद गुप्ता, मोनेन्द्र राजपूत, सुरेंद्र गुप्ता, किरण तिवारी, रीता पासवान, शालिनी कटियार, राधा सैनी, रामजी गुप्ता, पूनम कंवर, प्रशांत त्रिपाठी, अंशु ठाकुर, अभिमन्यु सक्सेना, कौशलेंद्र सिंह परिहार, सोनू राठौर, सचिवेंद्र सिंह सेंगर, पार्षद पवन गुप्ता, मनोज प्रधान, विनोद सोनकर, पूजा तिवारी, सुरेश गुप्ता, विवेक, जिशान अहमद, स्पर्श कटियार सहित अनेक पार्टी पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, शिक्षक, विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर सभी वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि समाज में समावेशी विकास, समान अवसर और सम्मान की भावना को मजबूत करने के लिए ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होने चाहिए।
नेत्रहीन विद्यार्थियों का सम्मान केवल उनकी उपलब्धियों का अभिनंदन नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि प्रतिभा किसी भी शारीरिक सीमा से कहीं अधिक बड़ी होती है और उचित अवसर मिलने पर हर व्यक्ति समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

