बांदा में अवैध पेड़ कटान के विरोध में नागरिकों ने किया प्रदर्शन, वनाधिकारी को सौंपा 6 सूत्रीय ज्ञापन

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रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा 

बांदा: जनपद बांदा में बढ़ती गर्मी, पर्यावरणीय असंतुलन और कथित अवैध पेड़ कटान को लेकर स्थानीय नागरिकों ने अपनी चिंता व्यक्त की है। “जल, जंगल, पहाड़ बचाओ अभियान (सेव द बांदा कैंपेन)” के बैनर तले बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र नेताओं, पत्रकारों और जागरूक नागरिकों ने जिला वनाधिकारी (DFO) को छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर जिले में हरित क्षेत्र के संरक्षण, वृक्षारोपण की पारदर्शिता और अवैध कटान पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन में हरे पेड़ों की कटाई पर सख्ती से रोक लगाने, विकास कार्यों में काटे गए पेड़ों की भरपाई सुनिश्चित करने, वृक्षारोपण अभियान की जानकारी सार्वजनिक करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव शामिल किए गए। साथ ही प्रतिभागियों ने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ी चिंता

ज्ञापन सौंपने वाले नागरिकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जिले में हरित क्षेत्र में कमी आने की आशंका जताई जा रही है। उनका मानना है कि बढ़ती गर्मी, जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच पेड़ों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी समान भागीदारी जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी मांग की कि संबंधित विभाग अवैध कटान की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे।

छह सूत्रीय ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें

जिला वनाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में छह प्रमुख बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की गई। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • जिले में हरे पेड़ों के अवैध कटान पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
  • विकास कार्यों के दौरान काटे गए पेड़ों के बदले नियमानुसार नए पौधे लगाए जाएं और उनकी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
  • पंडित जे.एन. डिग्री कॉलेज परिसर में काटे गए वृक्षों के मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
  • 5 जून और 12 जुलाई को आयोजित वृक्षारोपण अभियानों के अंतर्गत लगाए गए पौधों का ग्राम पंचायतवार विवरण सार्वजनिक किया जाए।
  • लगाए गए पौधों की वर्तमान स्थिति, जीवित पौधों की संख्या तथा रखरखाव संबंधी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
  • पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और निगरानी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इन कदमों से वृक्षारोपण अभियानों की पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा।

अवैध कटान रोकने की उठी मांग

कार्यक्रम के दौरान पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुरेंद्र मिश्रा ने कहा कि जिले में यदि कहीं भी अवैध पेड़ कटान हो रहा है, तो उस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए लगाए जा रहे पौधों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब पहले से मौजूद पेड़ों को भी सुरक्षित रखा जाएगा।

जनभागीदारी पर दिया गया जोर

कार्यक्रम में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पत्रकार अभिषेक शुक्ला ने कहा कि यदि संबंधित विभाग समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाता, तो नागरिक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक जन आंदोलन शुरू करने पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न करना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को प्राथमिकता दिलाना है।

विशेष समिति बनाने की मांग

छात्र लव सिन्हा ने सुझाव दिया कि अवैध कटान की निगरानी के लिए एक विशेष समिति गठित की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी, तो अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। साथ ही स्थानीय नागरिक भी पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभा सकेंगे।

वृक्षारोपण के बाद रखरखाव भी जरूरी

कार्यक्रम में साजिद अली और अमित यादव ने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने सुझाव दिया कि—

  • पौधों की नियमित सिंचाई हो,
  • सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएं,
  • समय-समय पर निरीक्षण किया जाए,
  • तथा जीवित पौधों की संख्या का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।

उनका कहना था कि यदि रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वृक्षारोपण अभियान का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।

पर्यावरण और कृषि पर चिंता

छात्र नेता शमशेर यादव और कार्तिक आनंद ने कहा कि यदि हरित क्षेत्र लगातार घटता है, तो इसका प्रभाव केवल पर्यावरण पर ही नहीं बल्कि कृषि, जल संसाधनों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

इसी क्रम में पत्रकार अरविंद श्रीवास्तव ने बढ़ती गर्मी और मौसम में बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों की फसलों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है।

हालांकि, मौसम और कृषि उत्पादन पर प्रभाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।

विशेष पर्यावरण योजना की अपील

यश त्रिवेदी ने उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध किया कि बांदा सहित बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देने हेतु विशेष योजना तैयार की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि दीर्घकालिक रणनीति के साथ वृक्षारोपण, जल संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर कार्य किया जाए, तो भविष्य में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

बड़ी संख्या में नागरिक रहे मौजूद

कार्यक्रम का संचालन लव सिन्हा ने किया।

इस अवसर पर सुरेंद्र मिश्रा, सुनील सक्सेना, अभिषेक शुक्ला, राहुल द्विवेदी, अरविंद श्रीवास्तव, यश त्रिवेदी, अमित यादव, ओम राजपूत, साजिद अली, शिवा शुक्ला, कार्तिक आनंद, विक्की यादव, लियाकत अली, अमित वर्मा, सूरज वर्मा, सूरज सिंह, आशाराम, संजय बाबू पाल, अरविंद सिंह, हर्षित श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

बांदा में पर्यावरण संरक्षण और कथित अवैध पेड़ कटान के मुद्दे पर नागरिकों द्वारा जिला वनाधिकारी को सौंपा गया छह सूत्रीय ज्ञापन पर्यावरणीय जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। ज्ञापन में वृक्ष संरक्षण, वृक्षारोपण की पारदर्शिता, पौधों के रखरखाव और अवैध कटान पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इन मांगों पर क्या कदम उठाता है। यदि समयबद्ध कार्रवाई होती है, तो इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा मिल सकती है और स्थानीय नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा।

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