बांदा पुलिस ने फर्जी RTO, SDM और माइंस अधिकारी बनकर वसूली करने वाले 4 आरोपियों को किया गिरफ्तार – पढ़िए कौन हैं वो

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रिपोर्ट- शैलेन्द्र शानू वर्मा 

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में थाना कोतवाली नगर पुलिस ने खुद को आरटीओ, माइंस अधिकारी और एसडीएम बताकर वाहन चालकों से कथित रूप से अवैध वसूली करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से नकदी, एक चार पहिया वाहन, लैपटॉप, मोबाइल फोन और विभिन्न दस्तावेज बरामद किए गए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह ने अन्य किन क्षेत्रों में भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।

पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई अपराध नियंत्रण और वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई।

सूचना मिलते ही सक्रिय हुई पुलिस

पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के पर्यवेक्षण तथा सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी नगर मेविस टॉक के नेतृत्व में थाना कोतवाली नगर पुलिस क्षेत्र में गश्त और संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की जांच कर रही थी।

इसी दौरान पुलिस टीम को एक ई-रिक्शा चालक ने सूचना दी कि कुछ लोग चार पहिया वाहन में बैठकर स्वयं को सरकारी अधिकारी बताते हुए ई-रिक्शा चालकों से कथित रूप से अवैध धन की मांग कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मवई बाईपास क्षेत्र में संदिग्ध वाहन की घेराबंदी की और उसमें सवार चार लोगों को हिरासत में ले लिया।

पूछताछ में सामने आया कथित तरीका

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे विभिन्न जनपदों में जाकर स्वयं को आरटीओ, माइंस अधिकारी या एसडीएम बताकर वाहन चालकों को रोकते थे। इसके बाद कथित तौर पर चालान, वाहन सीज करने या अन्य कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे पैसे वसूलते थे।

प्रारंभिक जांच में पुलिस का कहना है कि आरोपी अपेक्षाकृत सुनसान या कम भीड़-भाड़ वाले स्थानों को चुनते थे। वहां ई-रिक्शा, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहनों को रोककर वाहन चालकों की तस्वीरें लेते और स्वयं को सरकारी अधिकारी बताते हुए कार्रवाई की चेतावनी देते थे। इसके बाद कथित रूप से धनराशि वसूलकर सभी आरोपी उसे आपस में बराबर-बराबर बांट लेते थे।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन तथ्यों की पुष्टि आगे की विवेचना के दौरान की जाएगी।

बरामद सामग्री

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित सामग्री बरामद करने का दावा किया है—

  • 5,400 रुपये नकद, जिसे पुलिस कथित अवैध वसूली से प्राप्त धनराशि बता रही है।
  • एक चार पहिया वाहन, जिसका कथित तौर पर घटनाओं में उपयोग किया जाता था।
  • एक लैपटॉप
  • एक फाइल, जिसमें विभिन्न दस्तावेज मिले।
  • चार मोबाइल फोन

बरामद सभी सामान को पुलिस ने विधिक प्रक्रिया के तहत कब्जे में ले लिया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपी

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है—

  1. सौरभ निवासी रिसदा, थाना जनेहा, जिला रीवा (मध्य प्रदेश)।
  2. कमल निवासी चितरा गोकुलपुर, थाना कोतवाली नगर कर्वी, जिला चित्रकूट।
  3. राज कुमार निवासी सीतापुर, थाना कोतवाली नगर कर्वी, जिला चित्रकूट।
  4. संतोष कुमार निवासी भैरों पागल द्वारकापुरी, थाना कोतवाली नगर कर्वी, जिला चित्रकूट।

इन सभी आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में विधिक कार्रवाई की जा रही है।

अन्य मामलों की भी हो रही जांच

पुलिस का कहना है कि फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या यह गिरोह अन्य जिलों में भी सक्रिय था और क्या पहले भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया गया था।

इसके अलावा आरोपियों के संभावित आपराधिक इतिहास, अन्य साथियों और नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं, तो उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने वाहन चालकों से की अपील

इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने वाहन चालकों और आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर बिना उचित पहचान पत्र के धन की मांग करे या संदिग्ध व्यवहार करे, तो तत्काल निकटतम पुलिस थाने या आपातकालीन हेल्पलाइन पर सूचना दें।

पुलिस ने यह भी कहा कि किसी भी अधिकारी की पहचान उसके आधिकारिक पहचान पत्र और वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर ही सुनिश्चित की जानी चाहिए। केवल मौखिक दावा या दबाव में आकर किसी को धनराशि न दें।

फर्जी अधिकारी बनकर धोखाधड़ी के मामलों में सतर्कता जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को गुमराह करने और उनसे धन ऐंठने के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर वर्दी, वाहन या दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों का विश्वास जीतने का प्रयास करते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में नागरिकों के लिए यह आवश्यक है कि वे किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित अधिकारी की पहचान की पुष्टि करें और संदेह होने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।

बांदा पुलिस की इस कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर फर्जी आरटीओ, एसडीएम और माइंस अधिकारी बनकर वाहन चालकों से कथित अवैध वसूली करने का आरोप है। पुलिस ने नकदी, वाहन, लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज बरामद करने की जानकारी दी है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या यह गिरोह अन्य जिलों में भी सक्रिय था। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और संभावित अन्य मामलों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

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