कानपुर के जनता दर्शन में सुनवाई के बाद दिव्यांग गीता को मिला ग्राउंड फ्लोर आवास, वर्षों पुरानी समस्या का समाधान

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी

कानपुर: प्रशासनिक संवेदनशीलता और समयबद्ध कार्रवाई का एक सकारात्मक उदाहरण कानपुर में देखने को मिला, जहां जनता दर्शन में रखी गई एक दिव्यांग महिला की समस्या का समाधान नियमानुसार किया गया।

वर्षों से तीसरी मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ने की मजबूरी झेल रही अजीतगंज निवासी गीता को अब ग्राउंड फ्लोर पर नया आवास आवंटित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच और नियमों के परीक्षण के बाद की गई।

प्रशासन के अनुसार यह निर्णय शासन की उन व्यवस्थाओं के अनुरूप लिया गया है, जिनका उद्देश्य पात्र दिव्यांग लाभार्थियों को सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराना है। वहीं, आवास आवंटित होने के बाद गीता ने राहत जताते हुए कहा कि अब उनके लिए रोजमर्रा का जीवन पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगा।

तीसरी मंजिल तक पहुंचना था रोज की चुनौती

अजीतगंज निवासी गीता के दोनों पैर मुड़े होने के कारण उन्हें चलने-फिरने में काफी कठिनाई होती है। ऐसे में प्रतिदिन तीसरी मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ना और उतरना उनके लिए बेहद कठिन कार्य बन गया था।

घर से बाहर जाना हो, किसी आवश्यक काम से लौटना हो या दैनिक जरूरतों को पूरा करना हो, हर बार उन्हें सीढ़ियों का सामना करना पड़ता था। यह स्थिति केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी उनके लिए चुनौतीपूर्ण थी। इसके बावजूद उन्होंने कई वर्षों तक अपनी समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास जारी रखे।

वर्ष 2019 में मिला था तीसरी मंजिल का आवास

प्राप्त जानकारी के अनुसार गीता को मार्च 2019 में मा. कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना (तृतीय चरण) के अंतर्गत ब्लॉक संख्या-292 में आवास संख्या 292/14 आवंटित किया गया था, जो तीसरी मंजिल पर स्थित था।

उस समय उनके पास दिव्यांगता प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं था। इसी कारण वे आवास आवंटन प्रक्रिया के दौरान अपने दिव्यांग होने का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकीं। परिणामस्वरूप उन्हें दिव्यांग लाभार्थियों के लिए निर्धारित भूतल पर आवास आवंटित नहीं किया जा सका।

हालांकि, बाद में उन्होंने अपना दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवा लिया। इसके पश्चात उन्होंने कई बार संबंधित विभागों के समक्ष ग्राउंड फ्लोर पर आवास उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, लेकिन लंबे समय तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

जनता दर्शन में रखी शिकायत बनी समाधान का आधार

जब विभागीय स्तर पर लगातार प्रयासों के बावजूद समाधान नहीं मिला, तब गीता ने जनता दर्शन में अपनी शिकायत सीधे जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के समक्ष प्रस्तुत की।

उन्होंने जिलाधिकारी को बताया कि दोनों पैरों की दिव्यांगता के कारण तीसरी मंजिल तक पहुंचना उनके लिए अत्यंत कठिन है। साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि उन्हें नियमानुसार भूतल पर आवास उपलब्ध कराया जाए।

जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

नियमों के अनुरूप हुई विस्तृत जांच

जिलाधिकारी के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों ने पूरे प्रकरण की विस्तार से जांच की। जांच के दौरान शासनादेश में उपलब्ध उन प्रावधानों का परीक्षण किया गया, जिनमें दिव्यांग लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर भूतल पर आवास आवंटित करने का प्रावधान है।

इसके अलावा संबंधित आवास परियोजना में उपलब्ध ग्राउंड फ्लोर के आवासों की स्थिति का भी परीक्षण किया गया। सभी तथ्यों और नियमों की समीक्षा के बाद यह पाया गया कि नियमानुसार गीता का आवंटन संशोधित किया जा सकता है।

इसके बाद प्रशासन ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए उनका पूर्व आवंटन संशोधित कर भूतल स्थित आवास संख्या 292/04 आवंटित कर दिया।

15 दिनों में मिलेगा आवास का कब्जा

प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार गीता को नए आवास का आवंटन पत्र प्रदान कर दिया गया है। साथ ही उन्हें 15 दिनों के भीतर आवास का कब्जा प्राप्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस निर्णय के बाद उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो गया है। अब उन्हें रोज तीसरी मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ने की मजबूरी का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनका दैनिक जीवन पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सुगम हो सकेगा।

गीता ने जताया प्रशासन के प्रति आभार

ग्राउंड फ्लोर पर आवास मिलने के बाद गीता ने खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि तीसरी मंजिल तक पहुंचना उनके लिए हर दिन एक बड़ी चुनौती बन गया था। कई बार उन्हें दूसरों की सहायता भी लेनी पड़ती थी।

उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से भूतल पर आवास के लिए प्रयास कर रही थीं। अब प्रशासन द्वारा उनकी समस्या का समाधान किए जाने से उन्हें काफी राहत मिली है। उन्होंने जिलाधिकारी और प्रशासन का आभार भी व्यक्त किया।

जिलाधिकारी बोले—पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्राथमिकता

इस अवसर पर जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जनता दर्शन में प्राप्त होने वाली प्रत्येक शिकायत का संवेदनशीलता के साथ परीक्षण किया जाता है और नियमों के अनुरूप उसका समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि गीता के मामले में उपलब्ध तथ्यों, शासनादेश और नियमों का परीक्षण करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की गई। प्रशासन का उद्देश्य यही है कि पात्र व्यक्तियों को योजनाओं का वास्तविक लाभ समय पर मिल सके।

जनता दर्शन बना आमजन और प्रशासन के बीच प्रभावी माध्यम

पिछले कुछ समय में जनता दर्शन ऐसे अनेक मामलों में प्रभावी मंच के रूप में सामने आया है, जहां नागरिक अपनी समस्याएं सीधे जिला प्रशासन के समक्ष रख सकते हैं। इससे शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनती है।

विशेष रूप से दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक और जरूरतमंद वर्गों से जुड़ी समस्याओं के समाधान में प्रशासन संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास कर रहा है। गीता का मामला भी इसी दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।

सामाजिक समावेशन की दिशा में सकारात्मक पहल

दिव्यांगजनों के लिए सुगम और सुविधाजनक आवास केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। ऐसी पहल से यह सुनिश्चित होता है कि पात्र लाभार्थियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

गीता को ग्राउंड फ्लोर पर आवास आवंटित होने से न केवल उनकी व्यक्तिगत समस्या का समाधान हुआ है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि यदि पात्र व्यक्ति अपनी समस्या उचित मंच पर रखते हैं, तो नियमों के अनुरूप उसका समाधान संभव है।

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