सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण को मिलेगी रफ्तार, 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों की सिफारिश
रिपोर्ट- अनुग्रह देवी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) की अधिशेष और कम उपयोग में आने वाली संपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) के सचिव की अध्यक्षता में गठित अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) ने 1,100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के परिसंपत्ति मुद्रीकरण प्रस्तावों को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाने की सिफारिश की है। इन प्रस्तावों को कैबिनेट द्वारा प्रत्यायोजित वैकल्पिक तंत्र (एएम) के समक्ष विचार और अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी कंपनियों के पास मौजूद ऐसी संपत्तियों से आर्थिक मूल्य प्राप्त करना है, जिनका वर्तमान में पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा है। इनमें मुख्य रूप से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की अधिशेष भूमि और भवन शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन परिसंपत्तियों का योजनाबद्ध और पारदर्शी तरीके से मुद्रीकरण करके आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
1,100 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मिली सिफारिश
सार्वजनिक उद्यम विभाग के सचिव की अध्यक्षता और दूरसंचार विभाग (डीओटी) के सचिव की सह-अध्यक्षता में अंतर-मंत्रालयी समूह की बैठक आयोजित की गई। इसमें सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों की समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद समूह ने 1,100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के प्रस्तावों को वैकल्पिक तंत्र के विचार और अनुमोदन के लिए सिफारिश की।
ये प्रस्ताव मुख्य रूप से उन केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की भूमि और भवन परिसंपत्तियों से जुड़े हैं, जिन्हें मुद्रीकरण के लिए चिह्नित किया गया है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय वैकल्पिक तंत्र की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। इसके पश्चात निर्धारित सरकारी प्रक्रियाओं के अनुसार आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
अधिशेष संपत्तियों से आर्थिक लाभ प्राप्त करने की तैयारी
दरअसल, केंद्र सरकार लंबे समय से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की ऐसी संपत्तियों की पहचान कर रही है, जिनका इस्तेमाल उनकी मूल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नहीं हो रहा है। कई सरकारी संस्थाओं के पास ऐसी भूमि और भवन उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग सीमित है या जो लंबे समय से खाली पड़े हैं।
ऐसे में सरकार इन संपत्तियों को अनुपयोगी बनाए रखने के बजाय उनके आर्थिक इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहती है। इसके लिए परिसंपत्ति मुद्रीकरण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके तहत संपत्तियों का उचित मूल्यांकन, संभावित उपयोग की पहचान और प्रतिस्पर्धी बाजार प्रक्रिया के माध्यम से उनका अधिकतम मूल्य प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।
इसके अलावा, इस व्यवस्था से निवेश के नए अवसर पैदा होने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने की संभावना भी है। इससे सरकारी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
एनएलएमसी निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका
सरकारी परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण की इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण निगम (एनएलएमसी) की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह संस्था संबंधित मंत्रालयों, विभागों और संपत्ति के स्वामित्व वाले सरकारी उपक्रमों के साथ समन्वय स्थापित करके मुद्रीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहयोग करती है।
एनएलएमसी संपत्तियों के मूल्यांकन, उचित जांच-पड़ताल, लेनदेन की रूपरेखा तैयार करने और बाजार आधारित मुद्रीकरण प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने का कार्य करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी संपत्तियों का मूल्यांकन उचित तरीके से हो और उनके मुद्रीकरण में पारदर्शिता बनी रहे।
वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है एनएलएमसी
राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण निगम भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। यह वित्त मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक उद्यम विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है। इसकी स्थापना केंद्रीय बजट 2021-22 में की गई घोषणा के अनुसार हुई थी।
एनएलएमसी का प्रमुख उद्देश्य केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और अन्य सरकारी संस्थाओं की अधिशेष भूमि तथा गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण में सहायता करना है। इसके लिए निगम पेशेवर लेनदेन सलाह, संपत्तियों की जांच-पड़ताल, मूल्यांकन और पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया को अपनाने पर जोर देता है।
निवेश और आर्थिक विकास को मिलेगा प्रोत्साहन
केंद्र सरकार की यह पहल सार्वजनिक संपत्तियों के कुशल प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अधिशेष भूमि और भवनों का बेहतर इस्तेमाल होने से जहां सरकारी संसाधनों का अधिकतम उपयोग संभव होगा, वहीं दूसरी ओर निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
हालांकि, प्रस्तावित परिसंपत्तियों का वास्तविक मुद्रीकरण वैकल्पिक तंत्र से आवश्यक अनुमोदन मिलने के बाद ही आगे बढ़ेगा। इसके बाद संबंधित संस्थाएं निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार कार्रवाई करेंगी।
कुल मिलाकर, 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के परिसंपत्ति मुद्रीकरण प्रस्तावों की सिफारिश केंद्र सरकार के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की अधिशेष संपत्तियों को आर्थिक रूप से उपयोगी बनाकर देश के विकास में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

