कानपुर पुलिस का बड़ा खुलासा: देशभर में फैले साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 13 गिरफ्तार
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए ऐसे संगठित गिरोह का खुलासा किया है, जो लोगों की घबराहट और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े डर का फायदा उठाकर देशभर में कथित रूप से साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।
पुलिस ने सचेंडी थाना क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क का संबंध विभिन्न राज्यों से सामने आया है और अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी का पता चला है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार और एडीसीपी क्राइम अंजली विश्वकर्मा के निर्देशन में क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और सर्विलांस टीम द्वारा संयुक्त रूप से की गई।
अभियान के दौरान आधुनिक तकनीक, विशेषकर ड्रोन निगरानी, का भी उपयोग किया गया, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी नजर रखी जा सकी।
ड्रोन निगरानी और तकनीकी जांच से मिली सफलता
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद कई दिनों तक तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर जांच की गई। इसके बाद सचेंडी थाना क्षेत्र में संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए 13 लोगों को हिरासत में लिया।
कार्रवाई के दौरान मौके से बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण और अन्य सामग्री भी बरामद की गई। इनमें 29 मोबाइल फोन, 3 कारें, 48 IMEI नंबर, 68 सक्रिय मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड सहित कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि इन साक्ष्यों का फॉरेंसिक और तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
लोगों को डराकर की जाती थी कथित ठगी
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह गिरोह कथित तौर पर लोगों को फर्जी वीडियो कॉल, ब्लैकमेलिंग और पुलिस अधिकारी बनकर धमकी देने जैसे तरीकों से निशाना बनाता था। इसके बाद पीड़ितों पर दबाव बनाकर उनसे बैंक खातों और यूपीआई माध्यमों से पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे।
पुलिस ने बताया कि गिरोह कथित रूप से ऐसे लोगों को चुनता था जिन्हें डर या सामाजिक बदनामी की आशंका के कारण तुरंत निर्णय लेने के लिए मजबूर किया जा सके। हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह की गतिविधियां केवल कानपुर या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं थीं। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का संबंध दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से जुड़ा मिला है।
इसी के साथ जांच में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 189 साइबर शिकायतों का संबंध भी इस गिरोह से मिलने की बात सामने आई है। इसके अलावा 60 पीड़ितों के मोबाइल नंबर भी जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न राज्यों की पुलिस और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य राज्यों में सक्रिय सहयोगियों की पुष्टि होती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लगभग 2 करोड़ रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी का खुलासा
पुलिस की शुरुआती जांच में इस गिरोह से जुड़े लेन-देन का विश्लेषण करने पर करीब 2 करोड़ रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी का पता चला है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ेगी, यह राशि और प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ सकती है।
फिलहाल बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल वॉलेट और अन्य वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है। इसके अतिरिक्त बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डेटा के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
साइबर अपराध से बचाव के लिए पुलिस की अपील
इस कार्रवाई के बाद कानपुर पुलिस ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को किसी अनजान नंबर से वीडियो कॉल, फर्जी पुलिस कॉल या किसी भी प्रकार की ब्लैकमेलिंग से जुड़ा संदेश प्राप्त होता है, तो घबराने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करें और तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
साथ ही पुलिस ने लोगों से आग्रह किया है कि किसी भी दबाव में आकर बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या अन्य गोपनीय वित्तीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी की आशंका हो, तो तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से सूचना दें।
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच अहम कार्रवाई
हाल के वर्षों में देशभर में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बनाने का प्रयास करते हैं। इसलिए जागरूकता और समय पर शिकायत करना ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
इसके अलावा पुलिस द्वारा तकनीकी संसाधनों, सर्विलांस और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग यह भी दर्शाता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां साइबर अपराध से निपटने के लिए लगातार अपनी कार्यप्रणाली को आधुनिक बना रही हैं।
जांच अभी जारी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और बरामद डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही गिरोह की कार्यप्रणाली, आर्थिक लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में अधिक जानकारी सामने आ सकेगी।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि जांच में अन्य व्यक्तियों या नेटवर्क की भूमिका सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा 13 आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा किया गया है। प्रारंभिक जांच में लगभग 2 करोड़ रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क और बड़ी संख्या में डिजिटल साक्ष्यों का पता चलना इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण बनाता है।
वहीं, पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध वीडियो कॉल, फर्जी पुलिस कॉल या ब्लैकमेलिंग की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क करें।

