कानपुर केडीए का अवैध प्लाटिंग पर बड़ा एक्शन, नरवल और मवैया में 25 बीघा भूमि से हटाया कब्जा
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग तथा सरकारी भूमि पर कब्जे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को आगे बढ़ाते हुए गुरुवार को नरवल और मवैया क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की।
इस दौरान लगभग 25 बीघा भूमि पर की गई अवैध प्लाटिंग और कब्जों को ध्वस्त किया गया। केडीए के अनुसार, जिस भूमि पर कार्रवाई की गई उसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 10.65 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा करीब 36 बीघा क्षेत्र में चल रही अवैध प्लाटिंग के मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई अवैध कॉलोनियों के विकास पर रोक लगाने और नियमानुसार शहरी विकास सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। केडीए अधिकारियों का कहना है कि बिना स्वीकृत मानचित्र के किसी भी प्रकार की प्लाटिंग या निर्माण गतिविधि नियमों के विरुद्ध है और ऐसे मामलों में आगे भी लगातार अभियान जारी रहेगा।
नरवल में अवैध प्लाटिंग पर चला बुलडोजर
केडीए की टीम ने सबसे पहले ग्राम फुफवार सुईथोक, नरवल में कार्रवाई की। यहां राजू उत्तम एवं अन्य द्वारा लगभग 11 बीघा भूमि पर की गई अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया गया।
जांच के दौरान संबंधित भूमि पर स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत नहीं किया गया था। इसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
अधिकारियों के अनुसार, बिना विकास प्राधिकरण की अनुमति के प्लाटिंग किए जाने से न केवल नियोजित विकास प्रभावित होता है, बल्कि भविष्य में खरीदारों को भी विभिन्न प्रकार की कानूनी और प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ऐसी गतिविधियों पर समय-समय पर कार्रवाई की जा रही है।
मवैया क्षेत्र में अवैध कब्जे हटाए गए
इसके बाद केडीए की टीम ने ग्राम मवैया में स्थित आराजी संख्या-794 एवं अन्य भूमि पर कार्रवाई की। यहां चन्द्रशेखर पाण्डेय एवं अन्य द्वारा लगभग 5 बीघा भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को हटाया गया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण और कब्जे को हटाने की प्रक्रिया पूरी की।
केडीए का कहना है कि सरकारी और सार्वजनिक हित से जुड़ी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में भी ऐसे मामले सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
श्री स्टार लैंड डेवलपर्स की प्लाटिंग पर आंशिक कार्रवाई
अभियान के दौरान श्री स्टार लैंड डेवलपर्स द्वारा नरवल पुल के पास तहसील रोड पर विकसित की जा रही लगभग 9 बीघा भूमि की अवैध प्लाटिंग भी जांच के दायरे में आई। केडीए ने बताया कि जनभावनाओं और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस स्थल पर आंशिक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक स्वीकृतियां और वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो आगे भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
36 बीघा क्षेत्र में चल रही प्लाटिंग को लेकर नोटिस जारी
ध्वस्तीकरण अभियान के साथ-साथ केडीए ने कई अन्य स्थानों पर चल रही प्लाटिंग परियोजनाओं की भी जांच की। जहां स्वीकृत मानचित्र उपलब्ध नहीं मिला, वहां संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं को नोटिस जारी किए गए। इन सभी से निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है।
जिन मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं—
- एन.के. ग्रीन सोसाइटी, नरवल तहसील रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास लगभग 6 बीघा क्षेत्र में प्लाटिंग कार्य के लिए स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत नहीं किया गया।
- पप्पू फुटवियर, बाबा होंडा के पीछे सरसौल-प्रयागराज रोड पर लगभग 3 बीघा क्षेत्र में प्लाटिंग के संबंध में आवश्यक स्वीकृति नहीं दिखाई गई।
- स्टार ग्रीन सिटी, न्यू कानपुर जंक्शन रोड, हाथीपुर अंडरपास के पास लगभग 6 बीघा क्षेत्र में स्वीकृत मानचित्र उपलब्ध नहीं कराया गया।
- संजय शुक्ला एवं अन्य, आराजी संख्या-562, नगवा बंबा (नहर) के निकट लगभग 15 बीघा क्षेत्र में प्लाटिंग के लिए स्वीकृत नक्शा प्रस्तुत नहीं कर सके।
- विनोद यादव, संजीव यादव, जे.पी. मौर्या एवं अन्य, न्यू कानपुर जंक्शन रोड, हाथीपुर अंडरपास के पास लगभग 6 बीघा क्षेत्र में स्वीकृत मानचित्र उपलब्ध नहीं मिला।
केडीए ने सभी संबंधित पक्षों को निर्धारित समय में आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यदि दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अवैध प्लाटिंग पर क्यों हो रही है सख्ती?
विशेषज्ञों के अनुसार, बिना अनुमति विकसित की गई कॉलोनियां भविष्य में नागरिक सुविधाओं, सड़क, जल निकासी, बिजली और अन्य आधारभूत सेवाओं के विकास में बाधा बनती हैं।
इसके अलावा ऐसे क्षेत्रों में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को स्वामित्व और निर्माण अनुमति से जुड़ी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
इसी कारण केडीए समय-समय पर अवैध प्लाटिंग की पहचान कर कार्रवाई करता है, ताकि शहर का विकास नियोजित तरीके से हो और आम नागरिकों के हित सुरक्षित रह सकें।
केडीए ने लोगों से की अपील
केडीए ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्लॉट या भूखंड की खरीदारी से पहले संबंधित परियोजना का स्वीकृत लेआउट, मानचित्र और अन्य वैधानिक अनुमतियां अवश्य जांच लें। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार के कानूनी विवाद या आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है।
साथ ही प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध प्लाटिंग और अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा। यदि कहीं बिना अनुमति निर्माण या प्लाटिंग की सूचना मिलती है तो नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर विकास प्राधिकरण की यह कार्रवाई शहर में अवैध प्लाटिंग और अनधिकृत कब्जों पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
लगभग 25 बीघा भूमि पर ध्वस्तीकरण और 36 बीघा क्षेत्र में नोटिस जारी किए जाने से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि बिना स्वीकृत मानचित्र के विकसित की जा रही कॉलोनियों के विरुद्ध प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है।
वहीं, नागरिकों को भी संपत्ति खरीदने से पहले सभी वैधानिक दस्तावेजों की जांच करने की सलाह दी गई है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

