श्रावस्ती में पुश्तैनी मकान और जमीन पर कब्जे का विवाद, 23 साल बाद गांव लौटे भाइयों को घर में नहीं मिली जगह
रिपोर्ट- सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में पुश्तैनी मकान और जमीन को लेकर परिवार के भीतर विवाद का मामला सामने आया है। यहां 23 साल बाद अपने गांव लौटे दो सगे भाइयों को कथित तौर पर उनके ही चाचा ने घर में प्रवेश नहीं करने दिया। पीड़ित भाइयों का आरोप है कि उनके चाचा ने पुश्तैनी मकान पर ताला लगाकर कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं, उनके हिस्से की करीब चार बीघा कृषि भूमि पर भी चाचा द्वारा खेती किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस विवाद के चलते दोनों भाई पिछले चार दिनों से अपने परिवार के साथ घर से बाहर रहने को मजबूर हैं।
मामला श्रावस्ती जिले के मल्हीपुर थाना क्षेत्र के लक्ष्मणपुर सेमरहनिया गांव का है। घटना सामने आने के बाद गांव में इस पारिवारिक विवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, पीड़ित परिवार के सामने रहने और खाने-पीने की समस्या भी खड़ी हो गई है।
23 साल बाद गांव लौटे तो घर पर लगा मिला ताला
जानकारी के मुताबिक, दोनों सगे भाई करीब 23 साल बाद अपने गांव लौटे थे। उन्हें उम्मीद थी कि वे अपने पुश्तैनी घर में परिवार के साथ रह सकेंगे और अपनी जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों को सुलझा सकेंगे। हालांकि, गांव पहुंचने के बाद उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।
पीड़ित भाइयों का आरोप है कि उनके चाचा ने पुश्तैनी मकान पर ताला लगा दिया है और मकान पर अपना कब्जा होने का दावा कर रहे हैं। जब दोनों भाइयों ने घर में प्रवेश करने की कोशिश की तो उन्हें कथित तौर पर अंदर नहीं जाने दिया गया। इसके बाद परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया।
चार बीघा खेत पर भी खेती करने का आरोप
मकान को लेकर विवाद के साथ ही पुश्तैनी कृषि भूमि को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच विवाद बताया जा रहा है। पीड़ित भाइयों का आरोप है कि उनके चाचा ने करीब चार बीघा खेत पर भी कब्जा कर रखा है और उस जमीन पर खेती कर रहे हैं।
भाइयों का कहना है कि मकान और खेत दोनों ही उनके परिवार की पुश्तैनी संपत्ति हैं। ऐसे में उन्हें अपने अधिकार से वंचित किया जा रहा है। हालांकि, जमीन और मकान के स्वामित्व को लेकर वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल चाचा का पक्ष सामने नहीं आया है।
चार दिनों से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवार
इस विवाद का सबसे अधिक असर दोनों भाइयों के परिवारों पर पड़ रहा है। पीड़ित भाइयों के मुताबिक, वे पिछले चार दिनों से अपने घर में प्रवेश नहीं कर पाए हैं। ऐसे में उनकी पत्नियों और बच्चों के सामने भी रहने की परेशानी पैदा हो गई है।
परिवार की स्थिति को देखते हुए गांव के कुछ लोग मदद के लिए आगे आए हैं। बताया जा रहा है कि ग्रामीण दोनों भाइयों और उनके परिवारों को भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। गांव वालों की मदद से फिलहाल परिवार का भोजन संबंधी इंतजाम हो रहा है, लेकिन रहने की समस्या अब भी बनी हुई है।
प्रशासन से न्याय मिलने की उम्मीद
पीड़ित भाइयों ने अपनी परेशानी बताते हुए न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि 23 साल बाद गांव लौटने पर उन्हें अपने ही पुश्तैनी घर में जगह नहीं मिल रही है। वहीं, खेत पर भी उनका अधिकार प्रभावित होने का आरोप है।
अब इस मामले में प्रशासन और पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। मकान तथा कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेजों की जांच, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन और दोनों पक्षों की बात सुनकर ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल लक्ष्मणपुर सेमरहनिया गांव का यह मामला पारिवारिक संपत्ति विवाद के साथ दो परिवारों के सामने खड़ी आवासीय समस्या को भी उजागर कर रहा है। पीड़ित भाइयों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर उन्हें न्याय दिलाने और विवाद का उचित समाधान कराने की दिशा में कदम उठाएंगे।

