कानपुर में ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ अभियान हुआ पूरा, 98% स्कूल वाहन फिट मिले, आगे जानिए कितनों का हुआ चालान
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित “मिशन सेफ फ्यूचर” अभियान का कानपुर मंडल में सफलतापूर्वक समापन हो गया है। 1 जुलाई से 15 जुलाई तक चले इस विशेष अभियान के दौरान परिवहन विभाग और प्रवर्तन अधिकारियों ने विभिन्न स्कूलों का निरीक्षण कर स्कूली वाहनों की फिटनेस, सुरक्षा मानकों और आवश्यक दस्तावेजों की गहन जांच की। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि स्कूल जाने वाले बच्चों की यात्रा सुरक्षित, व्यवस्थित और शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।
अभियान के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार कानपुर नगर में पंजीकृत 1,015 स्कूल वाहनों में से 974 वाहन फिट पाए गए, जबकि 41 वाहन अनफिट मिले। इसके अतिरिक्त नियमों का उल्लंघन करने वाले 118 वाहनों का चालान किया गया और 15 वाहनों को सीज करने की कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों को सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चलाया गया विशेष अभियान
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल के वर्षों में स्कूल वाहनों की सुरक्षा को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन्हीं निर्देशों के तहत परिवहन विभाग ने “मिशन सेफ फ्यूचर” अभियान चलाया, जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि स्कूल बसें, वैन और अन्य वाहन तकनीकी रूप से सुरक्षित हों तथा उनमें यात्रा करने वाले बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा या जोखिम का सामना न करना पड़े।
इसी क्रम में परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमों ने विभिन्न विद्यालयों का दौरा कर वाहनों की फिटनेस, दस्तावेज, सुरक्षा उपकरण, अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, आपातकालीन निकास और अन्य आवश्यक मानकों की जांच की।
कानपुर नगर में 98 प्रतिशत वाहन फिट मिले
कानपुर मंडल के आरटीओ (प्रवर्तन) राहुल श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के दौरान कानपुर नगर में कुल 1,015 स्कूल वाहन पंजीकृत पाए गए। इनमें से 974 वाहन पूरी तरह फिट मिले, जबकि 41 वाहनों में विभिन्न प्रकार की कमियां पाई गईं।
इस प्रकार लगभग 98 प्रतिशत स्कूल वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरे उतरे, जो परिवहन विभाग और स्कूल प्रबंधन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, जिन वाहनों में कमियां पाई गईं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की गई।
नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई
अभियान के दौरान केवल निरीक्षण ही नहीं किया गया, बल्कि नियमों का पालन न करने वाले वाहन संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई भी की गई।
परिवहन विभाग के अनुसार—
- 118 स्कूल वाहनों का चालान किया गया।
- 15 वाहनों को सीज किया गया।
- अनफिट पाए गए वाहनों को कमियां दूर करने तक संचालन न करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
स्कूल प्रबंधन को भी किया गया जागरूक
आरटीओ प्रवर्तन राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि अभियान के दौरान केवल दंडात्मक कार्रवाई पर ही जोर नहीं दिया गया, बल्कि विद्यालय प्रबंधन समितियों के साथ नियमित बैठकें भी आयोजित की गईं।
इन बैठकों में स्कूल संचालकों और प्रबंधकों को निर्देश दिए गए कि वे अपने वाहनों की समय-समय पर तकनीकी जांच कराएं, सुरक्षा उपकरणों को कार्यशील रखें तथा प्रशिक्षित और जिम्मेदार चालक ही बच्चों के परिवहन में लगाए जाएं।
इसके अलावा वाहन चालकों को भी यातायात नियमों का पालन करने और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया गया।
पूरे कानपुर मंडल की रिपोर्ट
आरटीओ प्रवर्तन राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि कानपुर मंडल में कुल 3,700 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं। इनमें विभिन्न जिलों के वाहन शामिल हैं।
जिलेवार आंकड़े इस प्रकार हैं—
- कानपुर नगर – 1,015 वाहन
- कानपुर देहात – 494 वाहन
- फर्रुखाबाद – 473 वाहन
- कन्नौज – 631 वाहन
- इटावा – 658 वाहन
- औरैया – 429 वाहन
इन सभी जिलों में अभियान के दौरान स्कूल वाहनों की व्यापक जांच की गई।
मंडल में 3,397 वाहन फिट पाए गए
पूरे कानपुर मंडल में पंजीकृत 3,700 स्कूल वाहनों में से 3,397 वाहन फिट पाए गए, जबकि 303 वाहन अनफिट मिले।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि अधिकांश स्कूल वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं। हालांकि जिन वाहनों में तकनीकी या दस्तावेज संबंधी कमियां मिलीं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की गई।
343 चालान और 87 वाहन सीज
पूरे मंडल में अभियान के दौरान परिवहन विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई करते हुए—
- 343 वाहनों का चालान किया।
- 87 वाहनों को सीज किया।
इन कार्रवाइयों का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि स्कूल वाहन संचालकों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित करना भी था।
सड़क सुरक्षा के प्रति बढ़ी जागरूकता
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभियान केवल वाहनों की जांच तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों के बीच सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं।
जब वाहन नियमित रूप से फिटनेस मानकों का पालन करते हैं और उनमें आवश्यक सुरक्षा उपकरण मौजूद होते हैं, तो बच्चों की यात्रा अधिक सुरक्षित बनती है।
अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण
परिवहन विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें स्कूल वाहन में किसी प्रकार की तकनीकी कमी, ओवरलोडिंग, तेज गति या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की जानकारी मिले, तो वे संबंधित विद्यालय या परिवहन विभाग को सूचित करें।
अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्कूल, वाहन संचालक और अभिभावकों की साझा जिम्मेदारी भी है।
भविष्य में भी जारी रहेगा निरीक्षण
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि “मिशन सेफ फ्यूचर” अभियान समाप्त होने के बाद भी स्कूल वाहनों की जांच नियमित रूप से जारी रहेगी। अचानक निरीक्षण, फिटनेस जांच और दस्तावेजों का सत्यापन समय-समय पर किया जाएगा, ताकि सुरक्षा मानकों का लगातार पालन सुनिश्चित किया जा सके।
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर चलाए गए “मिशन सेफ फ्यूचर” अभियान ने कानपुर मंडल में स्कूल वाहन सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति का स्पष्ट चित्र प्रस्तुत किया है। अभियान के दौरान अधिकांश वाहन निर्धारित मानकों पर खरे उतरे, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई भी की गई।
परिवहन विभाग का मानना है कि नियमित निरीक्षण, स्कूल प्रबंधन की सक्रिय भागीदारी और अभिभावकों की जागरूकता से स्कूली बच्चों की यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। भविष्य में भी ऐसे अभियान और नियमित जांच बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा

