अयोध्या में रामपथ पर सफाईकर्मी पूनम का निधन, चार बच्चों के सिर से उठा मां का साया – जानिए क्या रहा पूरा प्रकरण,,,
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अयोध्या: राम नगरी अयोध्या के राम पथ को स्वच्छ और सुंदर बनाने में जुटी संविदा सफाई कर्मी पूनम का इलाज के दौरान निधन हो गया। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद वह पिछले 13 दिनों से अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थीं। आखिरकार सोमवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। पूनम के निधन की खबर से परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
इस घटना ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। पूनम के पति का पहले ही निधन हो चुका था। ऐसे में वह अपने चार बच्चों के पालन-पोषण और परिवार की जिम्मेदारी अकेले संभाल रही थीं। अब उनके जाने से चारों बच्चों के सिर से मां का साया भी उठ गया है।
19 अक्टूबर की रात ड्यूटी के दौरान हुआ था हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, पूनम 19 अक्टूबर की रात राम पथ पर सफाई कार्य के दौरान ड्यूटी कर रही थीं। इसी दौरान वह एक सड़क हादसे का शिकार हो गईं। दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत को देखते हुए आईसीयू में रखा गया था।
परिजनों और शुभचिंतकों को उम्मीद थी कि पूनम इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटेंगी। हालांकि, चिकित्सकों की निगरानी में 13 दिनों तक चले उपचार के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। सोमवार को उनके निधन की सूचना मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
पति के निधन के बाद चार बच्चों की अकेले संभाल रही थीं जिम्मेदारी
पूनम के जीवन की सबसे बड़ी चुनौती अपने परिवार का पालन-पोषण करना था। उनके पति का पहले ही निधन हो चुका था। इसके बाद चार बच्चों की परवरिश और घर की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधों पर आ गई थी।
परिवार का सहारा बनने के लिए वह संविदा सफाई कर्मी के रूप में काम करती थीं। रामपथ पर सफाई का कार्य करके वह अपने बच्चों की जरूरतें पूरी करने का प्रयास कर रही थीं। रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच उनकी मेहनत ही परिवार की आजीविका का आधार थी।
लेकिन 19 अक्टूबर की रात हुए सड़क हादसे ने उनके परिवार की जिंदगी बदल दी। पहले गंभीर चोटों के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और अब उनके निधन से चारों बच्चों के सामने भविष्य को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
राम पथ की सफाई में जुटी थीं पूनम
अयोध्या में राम पथ शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल है। यहां साफ-सफाई बनाए रखने के लिए सफाई कर्मी नियमित रूप से अपनी सेवाएं देते हैं। पूनम भी इसी व्यवस्था का हिस्सा थीं और अपनी ड्यूटी के दौरान शहर को स्वच्छ रखने में योगदान दे रही थीं।
सफाईकर्मियों का काम अक्सर सुबह या रात के समय भी जारी रहता है। ऐसे में सड़क पर काम करते हुए उनकी सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। पूनम के साथ हुई दुर्घटना ने एक बार फिर सड़क पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत को सामने रखा है।
परिवार और क्षेत्र में शोक का माहौल
पूनम के निधन की खबर से उनके परिचितों और क्षेत्र के लोगों में शोक है। एक ऐसी महिला, जो पति के निधन के बाद भी अपने चार बच्चों के लिए लगातार मेहनत कर रही थी, उसका इस तरह दुनिया से चले जाना बेहद दुखद है।
परिवार के लिए यह केवल एक सदस्य को खोने की घटना नहीं है, बल्कि उस सहारे का खत्म हो जाना है, जिसके भरोसे चारों बच्चे अपना जीवन आगे बढ़ा रहे थे। अब बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सफाई कर्मियों की सुरक्षा और परिवार की मदद पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सफाई कर्मियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर चर्चा जरूरी हो गई है। सड़क पर सफाई करने वाले कर्मचारियों को यातायात के बीच काम करना पड़ता है। इसलिए ड्यूटी के दौरान सुरक्षा उपकरण, चेतावनी संकेत, पर्याप्त रोशनी और यातायात नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हैं।
इसके साथ ही पूनम के चार बच्चों के भविष्य को देखते हुए परिवार को सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत भी सामने आती है। प्रशासन और संबंधित विभाग को परिवार की परिस्थितियों का संज्ञान लेकर नियमानुसार उपलब्ध सहायता और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर विचार करना चाहिए।
फिलहाल पूनम के निधन से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। चार बच्चों की मां का इस तरह चले जाना पूरे क्षेत्र के लिए दुखद घटना है। रामपथ को साफ रखने में योगदान देने वाली पूनम अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके संघर्ष और अपने बच्चों के लिए किए गए परिश्रम की याद परिवार के साथ हमेशा रहेगी।

