कानपुर में पेंशनर्स का प्रदर्शन चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल ऑफलाइन जमा कराने की उठी मांग
रिपोर्ट- हनुमंत सिंह
कानपुर। चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल जमा कराने की ऑनलाइन प्रक्रिया से परेशान सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स ने अब ऑफलाइन व्यवस्था लागू करने की मांग तेज कर दी है। इसी मांग को लेकर सोमवार को सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर कानपुर नगर के पेंशनर्स ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल ऑफलाइन स्वीकार करने के लिए शासनादेश जारी करने की मांग की।
जिलाध्यक्ष बीएल गुलाबिया के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पेंशनर्स शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि जिस तरह सांसदों और विधायकों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल ऑफलाइन स्वीकार किए जाते हैं, उसी तरह सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स को भी यह सुविधा प्रदान की जाए। उनका कहना था कि बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था कई परेशानियां पैदा कर रही है।
ऑनलाइन प्रक्रिया से बुजुर्ग पेंशनर्स को हो रही परेशानी
प्रदर्शन के दौरान एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक कुमार मिश्रा ने कहा कि सरकार की ओर से लागू ऑनलाइन प्रक्रिया में कई जटिल नियम और तकनीकी औपचारिकताएं हैं। इनका पालन करना बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए आसान नहीं है। विशेष रूप से 80 से 90 वर्ष की आयु के वरिष्ठ नागरिकों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल जमा कराने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इस उम्र में पेंशनर्स को नियमित रूप से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें इलाज के बाद चिकित्सा प्रतिपूर्ति की राशि प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। तकनीकी जानकारी की कमी और दस्तावेज अपलोड करने जैसी औपचारिकताओं के कारण उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
गरीब पेंशनर्स के अटके हैं चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल
वहीं, एसोसिएशन के कानूनी सलाहकार आरपी श्रीवास्तव एडवोकेट ने कहा कि ऑनलाइन प्रक्रिया की जटिलताओं के चलते आर्थिक रूप से कमजोर पेंशनर्स के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल लंबे समय तक अटके रहते हैं। इससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार इलाज के दौरान खर्च की गई रकम की प्रतिपूर्ति समय पर नहीं मिल पाती, जिससे आगे के उपचार पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
उन्होंने कहा कि पेंशनर्स अपनी पूरी नौकरी के दौरान सरकारी सेवाओं में योगदान देते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद जब उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की आवश्यकता होती है, तब ऐसी जटिल प्रक्रियाओं के कारण उन्हें परेशान होना पड़ता है। सरकार को उनकी उम्र और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरल व्यवस्था बनानी चाहिए।
सांसदों और विधायकों की तरह मिले ऑफलाइन सुविधा
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब सांसदों और विधायकों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल ऑफलाइन स्वीकार किए जा सकते हैं, तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए भी ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं लागू की जा सकती? एसोसिएशन का कहना है कि पेंशनर्स को भी समान रूप से सुविधाजनक प्रक्रिया का लाभ मिलना चाहिए।
इसके साथ ही संगठन ने मांग की कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों को ऑफलाइन जमा कराने की अनुमति देने के लिए सरकार तत्काल शासनादेश जारी करे। इससे उन बुजुर्ग पेंशनर्स को राहत मिल सकेगी, जो तकनीकी जानकारी के अभाव या अन्य कारणों से ऑनलाइन आवेदन करने में असमर्थ हैं।
मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पेंशनर्स की यह मांग केवल सुविधा से जुड़ी नहीं है, बल्कि उनके बेहतर स्वास्थ्य और समय पर इलाज से भी संबंधित है। इसलिए सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए। प्रदर्शन के अंत में पेंशनर्स ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर अपनी एक सूत्रीय मांग पर शीघ्र कार्रवाई की अपील की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा।
अब देखना होगा कि पेंशनर्स की इस मांग पर प्रदेश सरकार क्या कदम उठाती है। फिलहाल, कानपुर में हुए इस प्रदर्शन के माध्यम से सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपनी समस्या को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है।PensionersProtest

