बुंदेलखंड में खाद संकट पर शालिनी सिंह पटेल ने उठाए सवाल, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री को सौंपा मांग पत्र

335b3b0d-163e-456e-844a-63009912f4e1

Digital UP News

बुंदेलखंड में खाद की किल्लत और कथित कालाबाजारी को लेकर जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बुंदेलखंड संगठन प्रभारी शालिनी सिंह पटेल ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने दिल्ली स्थित कृषि भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर से मुलाकात कर किसानों की समस्याओं को उठाया और खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए विस्तृत मांग पत्र सौंपा। इस दौरान उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार की ओर से खाद की पर्याप्त आपूर्ति किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, तो फिर सहकारी समितियों पर किसानों को खाद क्यों नहीं मिल रही है? वहीं, निजी दुकानों पर खाद उपलब्ध होने के पीछे क्या वजह है?

बुंदेलखंड में खाद संकट को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा

बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों की परेशानियां लगातार सामने आ रही हैं। किसानों को डीएपी, यूरिया और एनपीके जैसी जरूरी खाद प्राप्त करने के लिए सहकारी समितियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद पर्याप्त खाद नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

इसी मुद्दे को लेकर शालिनी सिंह पटेल ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर के सामने किसानों की समस्याएं रखीं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से खाद की आपूर्ति किए जाने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में खाद की आपूर्ति और वितरण के बीच की स्थिति की गंभीरता से जांच होना जरूरी है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकारी स्तर पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है, तो सहकारी समितियों तक पर्याप्त मात्रा में खाद क्यों नहीं पहुंच रही है? दूसरी ओर, निजी दुकानों पर खाद कैसे उपलब्ध हो रही है? क्या वितरण व्यवस्था में कहीं कोई गड़बड़ी है, जिसकी वजह से किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है?

निजी दुकानों पर अधिक कीमत वसूली की शिकायतें

शालिनी सिंह पटेल ने आरोप लगाया कि बुंदेलखंड के किसानों को सरकारी सहकारी समितियों से खाद नहीं मिलने के कारण निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है। यहां निर्धारित सरकारी मूल्य से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि खेती-किसानी में समय पर खाद मिलना बेहद जरूरी है। यदि बुवाई और फसल की आवश्यकताओं के समय किसानों को खाद उपलब्ध नहीं होती है, तो इसका सीधा असर उनकी खेती और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। इसलिए खाद वितरण की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें किसानों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने मांग की कि खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। इसके साथ ही दोषी पाए जाने वाले विक्रेताओं और संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

iFMS और e-Urvarak पोर्टल के रिकॉर्ड की जांच की मांग

खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए शालिनी सिंह पटेल ने तकनीकी रिकॉर्ड की जांच कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने मांग की कि खाद की खरीद, आवंटन, परिवहन और बिक्री की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

इसके लिए उन्होंने iFMS और e-Urvarak पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान कराने की मांग रखी। उनका कहना है कि इन डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि किस जिले, किस सहकारी समिति और किस निजी विक्रेता को कितनी मात्रा में खाद भेजी गई है।

इसके अलावा यह भी जांच की जानी चाहिए कि संबंधित केंद्रों और दुकानों पर वास्तव में कितनी खाद की बिक्री हुई। इस प्रक्रिया से सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि केवल कागजों में खाद की उपलब्धता दिखाना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि सरकारी स्तर पर भेजी गई खाद वास्तविक रूप से किसानों तक पहुंच रही है या नहीं। इसलिए वितरण व्यवस्था की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।

सहकारी समितियों पर डीएपी, यूरिया और एनपीके उपलब्ध कराने की मांग

मांग पत्र में शालिनी सिंह पटेल ने सहकारी समितियों को प्राथमिकता के आधार पर पर्याप्त मात्रा में डीएपी, यूरिया और एनपीके उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके नजदीकी सहकारी केंद्र पर निर्धारित सरकारी मूल्य पर खाद मिलनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने समितियों में कर्मचारियों की अनुपस्थिति से पैदा होने वाली समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना है कि कई बार कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने के कारण खाद वितरण प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि किसानों को खाद लेने के लिए बार-बार केंद्रों के चक्कर न लगाने पड़ें।

उन्होंने यह भी मांग की कि खाद वितरण के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पर्याप्त निगरानी व्यवस्था हो। प्रत्येक किसान को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जाए और किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

किसानों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का ऐलान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर को मांग पत्र सौंपने के बाद शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि किसानों की समस्याओं को केवल सरकारी आंकड़ों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। इसके लिए गांवों और सहकारी समितियों तक पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि खाद की आपूर्ति के नाम पर कागजों में व्यवस्था दुरुस्त दिखाने से किसानों की समस्या का समाधान नहीं होगा। असली सवाल यह है कि किसान को जरूरत के समय खाद मिल रही है या नहीं। यदि किसान को अपनी फसल बचाने के लिए निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है, तो यह व्यवस्था की समीक्षा का विषय है।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बुंदेलखंड के किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही खाद वितरण में गड़बड़ी करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

शालिनी सिंह पटेल ने स्पष्ट किया कि किसानों के अधिकार और उनके आर्थिक हितों से जुड़े इस मुद्दे पर वह चुप नहीं बैठेंगी। बुंदेलखंड के किसानों को उनका हक दिलाने के लिए उनकी आवाज लगातार उठाई जाती रहेगी।

खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता क्यों जरूरी?

बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था में खेती की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में खाद की उपलब्धता किसानों के लिए बेहद अहम विषय है। सहकारी समितियों और निजी दुकानों के बीच खाद की उपलब्धता को लेकर सामने आ रही शिकायतों का निष्पक्ष परीक्षण जरूरी है।

यदि खाद के आवंटन, परिवहन और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की जांच होती है, तो वितरण व्यवस्था में संभावित कमियों की पहचान की जा सकती है। इसके साथ ही किसानों को निर्धारित कीमत पर समय से खाद उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

अब देखना होगा कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय इस मांग पत्र में उठाए गए मुद्दों पर क्या कदम उठाता है और बुंदेलखंड के किसानों को खाद की समस्या से राहत दिलाने के लिए क्या व्यवस्था लागू की जाती है।

You may have missed