बाराबंकी में नितेश मौर्य हत्याकांड का खुलासा, 14 लाख के लेनदेन और 5 लाख की सुपारी का मामला आया सामने

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रिपोर्ट- महेंद्र सिंह

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में नितेश मौर्य हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में हत्या के पीछे पैसों का लेनदेन और धान खरीद से जुड़ा विवाद सामने आया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, करीब 14 लाख रुपये के लेनदेन और धान खरीद में हुए 10 लाख रुपये के विवाद ने इस घटना की पृष्ठभूमि तैयार की। वहीं, हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए पांच लाख रुपये की सुपारी दिए जाने की बात भी पुलिस ने सामने रखी है।

बाराबंकी पुलिस की स्वाट, सर्विलांस और बड्डूपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही वारदात में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट डिजायर कार भी बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली।

14 लाख रुपये के लेनदेन से शुरू हुआ विवाद

पुलिस के मुताबिक, नितेश मौर्य की हत्या के पीछे आर्थिक लेनदेन से जुड़ा विवाद मुख्य वजह बताया जा रहा है। जांच में सामने आया कि नितेश मौर्य और आरोपियों के बीच करीब 14 लाख रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। इसके अलावा धान खरीद के कारोबार में भी लगभग 10 लाख रुपये को लेकर विवाद बताया गया है।

इसी आर्थिक विवाद के चलते मनोज मौर्य ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर नितेश मौर्य को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। पुलिस की जांच के अनुसार, इस साजिश को अंजाम देने के लिए पांच लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी। हालांकि, पूरे लेनदेन और साजिश में प्रत्येक आरोपी की भूमिका को लेकर पुलिस की आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी।

कार में बैठाकर किया गया था अपहरण

पुलिस के अनुसार, 29 अक्टूबर को बाराबंकी जिले के बड्डूपुर थाना क्षेत्र में नितेश मौर्य को एक कार में बैठाकर अगवा किया गया था। इसके बाद आरोपी उसे बाराबंकी से सीतापुर जिले के पिसावां क्षेत्र में ले गए।

पुलिस की जांच में सामने आया कि सीतापुर के पिसावां इलाके में नितेश मौर्य की हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। चूंकि वारदात में एक जिले से दूसरे जिले तक ले जाने की बात सामने आई थी, इसलिए पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की।

स्वाट और सर्विलांस टीम ने ऐसे किया खुलासा

हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए बाराबंकी पुलिस ने स्वाट और सर्विलांस टीम को जांच में लगाया। इसके साथ ही बड्डूपुर थाना पुलिस भी लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी रही।

जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया। इसी क्रम में 31 अक्टूबर को भोगली पुलिया के पास से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान हत्या की साजिश, आर्थिक विवाद और सुपारी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। इसके अलावा पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट डिजायर कार भी बरामद की है। इस वाहन का इस्तेमाल नितेश मौर्य को अगवा करने में किए जाने की बात सामने आई है।

पांच लाख रुपये की सुपारी का भी हुआ खुलासा

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू हत्या के लिए पांच लाख रुपये की सुपारी दिए जाने की बात है। पुलिस के अनुसार, आर्थिक विवाद को लेकर बनाई गई योजना में पांच लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी।

जांच में मनोज मौर्य की भूमिका भी सामने आई है, जिस पर अन्य साथियों के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सुपारी की रकम किस तरह तय हुई, इसमें कौन-कौन शामिल था और आरोपियों के बीच पैसों का लेनदेन किस माध्यम से हुआ।

हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस की जांच और न्यायालय में प्रस्तुत होने वाले साक्ष्य आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

एसपी ने दी हत्याकांड के खुलासे की जानकारी

बाराबंकी की पुलिस अधीक्षक रवीना त्यागी ने हत्याकांड के खुलासे की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस की स्वाट, सर्विलांस और बड्डूपुर थाना टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही वारदात में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट डिजायर कार भी बरामद की गई है।

पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, मामले में आर्थिक लेनदेन और धान खरीद से जुड़े विवाद की बात सामने आई है। इसी विवाद के चलते हत्या की साजिश रचे जाने का खुलासा हुआ है।

पुलिस की आगे की कार्रवाई जारी

फिलहाल बाराबंकी पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई में जुटी है। पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हत्याकांड की साजिश में किसकी क्या भूमिका रही और आर्थिक विवाद का पूरा घटनाक्रम क्या था।

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