यूपी के कई जिलों में चांद का इंतजार करती रहीं सुहागिनें, दर्शन न होने पर घरों में की पूजा-अर्चना – फिर इस तरह से तोड़ा अपना व्रत,,,

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रिपोर्ट – मुकेश वर्मा 

उत्तर प्रदेश: करवा चौथ का पावन पर्व उत्तर प्रदेश के कई जिलों में श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा। सुबह से ही महिलाओं में त्योहार को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। हालांकि, शाम होते-होते मौसम ने व्रती महिलाओं की प्रतीक्षा बढ़ा दी। आसमान में बादल छाए रहने और चांद के दर्शन नहीं होने के कारण कई जिलों में महिलाओं को चंद्रमा के निकलने का इंतजार करना पड़ा।

करवा चौथ के अवसर पर महिलाओं ने पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखा। इसके बाद शाम को सोलह शृंगार कर पूजा की तैयारियां शुरू कीं। घरों में पूजा की थालियां सजाई गईं और करवा माता की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री एकत्र की गई। वहीं, कई स्थानों पर महिलाओं ने समूह में एकत्र होकर पारंपरिक तरीके से करवा चौथ की कथा सुनी और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।

आसमान में बादल, छतों और बालकनियों में चांद का इंतजार

करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं चांद निकलने के बाद उसकी पूजा करती हैं और फिर पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का पारण करती हैं। इसी परंपरा को निभाने के लिए उत्तर प्रदेश के कई जिलों में महिलाएं शाम से ही घरों की छतों, बालकनियों और खुले स्थानों पर चंद्रमा के निकलने की प्रतीक्षा करती रहीं।

हालांकि, आसमान में बादलों की मौजूदगी के कारण चांद दिखाई नहीं दिया। कई महिलाओं ने काफी देर तक आसमान की ओर नजरें टिकाए रखीं। इसके बावजूद जब चंद्रमा के दर्शन नहीं हो सके तो व्रती महिलाओं के सामने पूजा और व्रत खोलने की परंपरा को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई।

इस दौरान महिलाओं ने अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों से सलाह ली और घरों में प्रचलित धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा की रस्में पूरी कीं।

चांद के दर्शन नहीं होने पर घरों में की करवा माता की पूजा

चंद्रमा दिखाई नहीं देने की स्थिति में कई महिलाओं ने घरों के भीतर ही करवा माता की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा की थाली सजाई और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत कथा सुनी। इसके साथ ही परिवार के बड़े-बुजुर्गों के मार्गदर्शन में पूजा की अन्य रस्में भी पूरी की गईं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत श्रद्धा, विश्वास और संकल्प से जुड़ा पर्व है। इसलिए चंद्रमा के दर्शन नहीं होने पर भी महिलाओं ने अपनी पारिवारिक परंपराओं और मान्यताओं के अनुरूप पूजा-अर्चना जारी रखी।

वहीं, कई परिवारों में महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और घर-परिवार में सुख-शांति की कामना करते हुए भगवान से प्रार्थना की। इस दौरान घरों में भक्तिमय माहौल बना रहा।

बाजारों में सुबह से दिखी रौनक, महिलाओं ने किया सोलह शृंगार

करवा चौथ का उत्साह केवल घरों तक सीमित नहीं रहा। पर्व से पहले बाजारों में भी खास रौनक देखने को मिली। महिलाओं ने मेहंदी, चूड़ियां, साड़ियां, बिंदी, सिंदूर और अन्य शृंगार सामग्री की खरीदारी की। इसके अलावा पूजा के लिए करवा, छलनी, दीपक और अन्य आवश्यक सामान भी खरीदे गए।

शाम होते ही महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सोलह शृंगार किया। किसी ने लाल साड़ी पहनी तो किसी ने अपनी पसंद के रंगों के परिधान पहनकर त्योहार की खुशियां मनाईं। हाथों में रची मेहंदी और पारंपरिक आभूषणों से महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।

इसके बाद महिलाओं ने पूजा की थाली तैयार की और निर्धारित परंपराओं के अनुसार करवा माता की आराधना की। कई स्थानों पर महिलाओं ने एक साथ बैठकर व्रत कथा सुनी और परिवार की खुशहाली की कामना की।

व्रत खोलने के समय को लेकर बना असमंजस

चंद्रमा के दर्शन नहीं होने के कारण कई महिलाओं को व्रत खोलने के समय को लेकर असमंजस का सामना करना पड़ा। आमतौर पर करवा चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद खोला जाता है। ऐसे में बादलों के कारण चांद दिखाई नहीं देने पर महिलाओं ने अपने परिवार की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्णय लिया।

कुछ महिलाओं ने परिवार के बुजुर्गों से मार्गदर्शन प्राप्त किया, जबकि अन्य ने स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

पति-पत्नी के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है करवा चौथ

करवा चौथ केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार भी है। इसे पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास, समर्पण और आपसी संबंधों की मजबूती का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। वहीं, समय के साथ इस पर्व में पारिवारिक सहभागिता भी बढ़ी है। कई स्थानों पर पति भी अपनी पत्नियों के साथ त्योहार की तैयारियों में सहयोग करते नजर आते हैं। इस बार उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बादलों के कारण चंद्रमा के दर्शन नहीं होने से महिलाओं को इंतजार करना पड़ा, लेकिन उनकी श्रद्धा और उत्साह में कमी नहीं दिखाई दी। महिलाओं ने अपनी-अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर करवा चौथ का पर्व मनाया।

इस प्रकार चांद के दर्शन में आई बाधा के बावजूद करवा चौथ का त्योहार आस्था, प्रेम और पारिवारिक एकजुटता के संदेश के साथ संपन्न हुआ।

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