मथुरा में शिवानी मिश्रा की ‘कलर्स ऑफ यूपी’ प्रस्तुति ने बिखेरे सांस्कृतिक विरासत के विविध रंग

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

मथुरा। उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक चेतना, धार्मिक आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के विविध रंगों को मथुरा में आयोजित ‘कलर्स ऑफ यूपी’ नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया। धौली प्याऊ रेलवे ग्राउंड में ब्रजरज उत्सव के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में कथक नृत्यांगना एवं कोरियोग्राफर शिवानी मिश्रा के निर्देशन में प्रदेश की पौराणिक गाथाओं, देवी-देवताओं की महिमा और राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम को नृत्य और संगीत के जरिए मंच पर साकार किया गया।

प्रस्तुति के दौरान महादेव और माता सती की अमर गाथा, प्रभु श्रीराम की मर्यादा, मां विंध्यवासिनी की महिमा तथा राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम से जुड़े प्रसंगों ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया। इसके माध्यम से दर्शकों को प्रदेश की धार्मिक परंपराओं, आध्यात्मिक मान्यताओं और भावनात्मक विरासत से रूबरू होने का अवसर मिला।

ब्रजरज उत्सव में दिखी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान

‘कलर्स ऑफ यूपी’ कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित ब्रजरज उत्सव के अंतर्गत किया गया। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और ऐतिहासिक-पौराणिक प्रसंगों को कला के माध्यम से सामने लाना रहा।

कथक की भावपूर्ण मुद्राओं, लयबद्ध पदसंचालन और संगीत के समन्वय ने विभिन्न प्रसंगों को जीवंत रूप दिया। वहीं, प्रस्तुति में शामिल कथाओं ने दर्शकों को उत्तर प्रदेश की उस सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ा, जिसमें धर्म, दर्शन, प्रेम, त्याग और समर्पण का विशेष महत्व है।

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें प्रदेश की अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार ‘कलर्स ऑफ यूपी’ केवल नृत्य कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को अभिव्यक्त करने का माध्यम भी बना।

महादेव-सती की गाथा से हुआ प्रस्तुति का शुभारंभ

नृत्य प्रस्तुति की शुरुआत देवाधिदेव महादेव और माता सती की अमर गाथा से हुई। इस प्रसंग में प्रेम, त्याग, निष्ठा और समर्पण जैसे भावों को कथक की मुद्राओं और भावाभिनय के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। कलाकारों की प्रस्तुति ने पौराणिक कथा के भावनात्मक पक्ष को मंच पर उकेरते हुए दर्शकों को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की गहराई से परिचित कराया।

इसके बाद प्रभु श्रीराम की महिमा और अयोध्या की धार्मिक विरासत पर आधारित प्रसंग प्रस्तुत किए गए। इन दृश्यों के माध्यम से मर्यादा, धर्म, कर्तव्य और आदर्श जीवन के संदेश को सामने रखा गया। श्रीराम से जुड़ी सांस्कृतिक मान्यताओं को नृत्य के माध्यम से व्यक्त करते हुए भारतीय समाज में उनके आदर्शों के महत्व को रेखांकित किया गया।

इस क्रम में प्रस्तुति ने पौराणिक कथाओं को केवल धार्मिक आख्यान के रूप में नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं के वाहक के तौर पर भी सामने रखा।

मां विंध्यवासिनी की आराधना में दिखे शक्ति और भक्ति के भाव

कार्यक्रम की अगली कड़ी में मां विंध्यवासिनी की आराधना पर आधारित प्रस्तुति ने शक्ति, श्रद्धा और भक्ति के भावों को अभिव्यक्त किया। नृत्य के माध्यम से देवी उपासना की परंपरा और भक्तों की आस्था को दर्शाया गया। इस प्रसंग ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक विविधता और देवी आराधना से जुड़ी मान्यताओं को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति प्रदान की।

मां विंध्यवासिनी की महिमा के चित्रण के बाद प्रस्तुति का भावनात्मक केंद्र राधा के विरह की ओर बढ़ा। इस प्रसंग में राधा के मन की व्याकुलता, श्रीकृष्ण की प्रतीक्षा और उनसे जुड़ी स्मृतियों को कथक के भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

राधा के अंतर्मन में उठने वाले भावों को नृत्य की मुद्राओं और अभिव्यक्ति के जरिए उकेरा गया। इस दौरान प्रेम, प्रतीक्षा और संवेदना के विभिन्न रंग दिखाई दिए। प्रस्तुति ने यह भाव भी सामने रखा कि राधा-कृष्ण का प्रेम केवल सांसारिक अनुभूति तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भक्ति, आत्मिक जुड़ाव और आध्यात्मिक समर्पण का भी प्रतीक है।

राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम के साथ हुआ समापन

‘कलर्स ऑफ यूपी’ की अंतिम कड़ी में मथुरा-वृंदावन की भक्ति परंपरा और राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम का चित्रण किया गया। ब्रजभूमि की पहचान माने जाने वाले राधा-कृष्ण के प्रेम को कथक के माध्यम से प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भावपूर्ण समापन दिया गया।

मथुरा और वृंदावन की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान में राधा-कृष्ण की लीलाओं, भक्ति संगीत और प्रेम परंपरा का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में इस प्रस्तुति ने ब्रज की आध्यात्मिक विरासत को नृत्य और संगीत के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया।

शिवानी मिश्रा के निर्देशन में प्रस्तुत इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों को उत्तर प्रदेश की विविध परंपराओं से परिचित कराने के साथ भारतीय शास्त्रीय नृत्य की भावाभिव्यक्ति को भी प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश उभरा कि कला और संस्कृति किसी क्षेत्र की पहचान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यक्रम में मौजूद रहे अधिकारी

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लक्ष्मी नागप्पन, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) डॉ. पूजा गुप्ता, विप्रा सचिव आशीष कुमार सिंह, परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) राजीव पाण्डेय, डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र, सहायक अभियंता जेके जैन और अनूप शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

ब्रजरज उत्सव के अंतर्गत आयोजित ‘कलर्स ऑफ यूपी’ ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक आस्था, पौराणिक विरासत और शास्त्रीय नृत्य परंपरा को एक मंच पर प्रस्तुत किया। इस आयोजन के जरिए ब्रजभूमि की सांस्कृतिक पहचान और प्रदेश की आध्यात्मिक धरोहर को कलात्मक अभिव्यक्ति मिली।

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