सोनभद्र में 2.37 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी में तीन और गिरफ्तार, अब तक आठ आरोपी पकड़े गए
रिपोर्ट – ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी
सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में करोड़ों रुपये की साइबर धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। SATYA SANATAN TRUST के नाम से पंजीकृत बैंक खाते के जरिए कथित तौर पर की गई साइबर धोखाधड़ी की जांच के दौरान पुलिस ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से तीन और वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से एक हुंडई अमेज कार भी बरामद की गई है। इस कार्रवाई के बाद मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या बढ़कर आठ हो गई है।
पुलिस के मुताबिक, इस प्रकरण की जांच में अब तक 35 शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों में करीब 11.63 करोड़ रुपये की कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े लेन-देन की जानकारी मिली है। वहीं, एक बैंक खाते में लगभग 2.37 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित रकम प्राप्त होने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों और संस्थाओं के लेन-देन की भी जांच कर रही है।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में हुई कार्रवाई
सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में दुद्धी थाना पुलिस और सर्विलांस टीम ने आरोपियों की तलाश में कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच टीम मध्य प्रदेश के भोपाल पहुंची।
इसके बाद 25 अक्टूबर की रात करीब 8:05 बजे भोपाल के अयोध्या नगर थाना क्षेत्र में सी-सेक्टर तिराहे के पास यादव टी-स्टाल के निकट दबिश दी गई। इस दौरान पुलिस ने जय कुमार पाण्डेय, राजेश पोद्दार और बब्बू प्रसाद प्रजापति को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर सोनभद्र लाया गया। पुलिस की ओर से उन्हें 28 अक्टूबर को न्यायालय में पेश करने के लिए रवाना किए जाने की जानकारी दी गई है। इस कार्रवाई में एक हुंडई अमेज कार भी बरामद हुई है, जिसे पुलिस ने मामले की जांच से जुड़ी बरामदगी के रूप में दर्ज किया है।
पुलिस का कहना है कि मामले में मुख्य आरोपी सहित अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, जांच अभी जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
35 शिकायतों में 11.63 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा
इस मामले की जांच में बैंक खातों से जुड़े लेन-देन की पड़ताल महत्वपूर्ण साबित हुई है। पुलिस के अनुसार, समन्वय (JMIS) पोर्टल के माध्यम से ट्रस्ट के बैंक खातों की जांच की गई। इस दौरान साइबर धोखाधड़ी से संबंधित 35 शिकायतों की जानकारी सामने आई, जिनमें करीब 11.63 करोड़ रुपये की कथित ठगी का उल्लेख है।
जांच में एक बैंक खाते में लगभग 2.37 करोड़ रुपये प्राप्त होने की जानकारी भी सामने आई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों में रकम कहां से आई, किन माध्यमों से स्थानांतरित की गई और इससे जुड़े लोगों की क्या भूमिका रही।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम ट्रस्ट के बैंक खाते में मंगाई जाती थी। इसके बदले ट्रस्ट के अध्यक्ष को 20 प्रतिशत कमीशन दिए जाने का आरोप है। वहीं, शेष रकम को अन्य संबंधित लोगों के बीच बांटे जाने की आशंका जताई गई है।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी। फिलहाल पुलिस बैंक खातों, लेन-देन के रिकॉर्ड और आरोपियों के बीच संभावित संपर्कों की जांच कर रही है, ताकि कथित वित्तीय नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाई जा सके।
अन्य संस्थाओं के खातों की भी जांच
साइबर धोखाधड़ी के इस मामले में पुलिस का ध्यान केवल SATYA SANATAN TRUST के बैंक खाते तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान अन्य संस्थाओं से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।
पुलिस ने धर्मोदय फाउंडेशन, बलसा कन्स्ट्रक्शन एंड ट्रेडिंग एलएलपी और भूमित्रम इंडिया माइक्रो फाउंडेशन ट्रस्ट सहित अन्य संस्थाओं के खातों की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन संस्थाओं के बैंक खातों से कथित धोखाधड़ी की रकम का कोई संबंध है या नहीं।
इसके साथ ही, संबंधित बैंक खातों में रकम जमा होने, निकासी और दूसरे खातों में स्थानांतरण से जुड़े विवरणों की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों या संस्थाओं की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
दुद्धी थाने में दर्ज है मुकदमा
पुलिस के अनुसार, इस मामले में दुद्धी थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी कंप्यूटर संसाधनों या संचार उपकरणों के माध्यम से व्यक्ति का रूप धारण करके धोखाधड़ी करने से संबंधित है।
फिलहाल पुलिस मामले के वित्तीय और तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, बैंक खातों के रिकॉर्ड और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कथित धोखाधड़ी के तरीके तथा रकम के प्रवाह का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्कता जरूरी
सोनभद्र का यह मामला एक बार फिर बताता है कि साइबर अपराध में बैंक खातों और विभिन्न संस्थाओं के वित्तीय लेन-देन का दुरुपयोग किया जा सकता है। इसलिए आम नागरिकों को अपने बैंक खातों, पहचान संबंधी दस्तावेजों और डिजिटल लेन-देन को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते का इस्तेमाल दूसरे लोगों की रकम प्राप्त करने या स्थानांतरित करने के लिए नहीं करना चाहिए। इसी तरह, कमीशन के लालच में बैंक खाते, एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग या अन्य वित्तीय सुविधाओं का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति को करने देना जोखिम भरा हो सकता है।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी होती है, तो उसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी सूचना देनी चाहिए।

