अमरोहा में न्यू हेल्थ केयर सेंटर पर मासूम की मौत के बाद हंगामा, इस डॉक्टर पर लगा डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप

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रिपोर्ट – इकबाल अंसारी 

अमरोहा: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में डिडौली कोतवाली क्षेत्र के हरियाना गांव स्थित न्यू हेल्थ केयर सेंटर में एक मासूम बच्चे की मौत के बाद हंगामे का मामला सामने आया है। बच्चे की मौत से नाराज परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की। वहीं, इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए लोगों ने नाराजगी जताई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चे का इलाज न्यू हेल्थ केयर सेंटर में चल रहा था। इसी दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान अस्पताल में तोड़फोड़ किए जाने की भी सूचना है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

इलाज में लापरवाही का आरोप

मामले में अस्पताल के संचालक बताए जा रहे डॉक्टर अहमद पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। नाराज लोगों का कहना है कि बच्चे की हालत को लेकर उचित कदम नहीं उठाए गए। इसके अलावा, बच्चे को हायर सेंटर रेफर किए जाने के मामले को लेकर भी विवाद बढ़ गया। इसी के बाद अस्पताल में हंगामा होने की बात सामने आई है।

हालांकि, इलाज के दौरान वास्तव में क्या परिस्थितियां बनीं और बच्चे की मौत किन कारणों से हुई, यह जांच का विषय है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित हुआ नहीं माना जा सकता। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं।

हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस

बच्चे की मौत के बाद अस्पताल में बढ़ते हंगामे की सूचना मिलने पर डिडौली कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने नाराज लोगों को समझाकर स्थिति को शांत कराया। घटना के बाद अस्पताल में तनावपूर्ण माहौल बनने की बात सामने आई, लेकिन पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।

वहीं, घटना के बाद डॉक्टर अहमद के मौके से फरार होने का आरोप भी लगाया गया है। इस संबंध में पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि और आगे की कार्रवाई का विवरण सामने आना बाकी है। यह भी स्पष्ट होना शेष है कि मामले में कोई लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं और पुलिस ने अब तक किन तथ्यों के आधार पर जांच शुरू की है।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में पहले भी बच्चों की मौत की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, पूर्व की घटनाओं, उनकी जांच और विभागीय कार्रवाई से संबंधित स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

यदि किसी स्वास्थ्य केंद्र पर बिना आवश्यक योग्यता या वैधानिक अनुमति के इलाज किया जा रहा है, तो यह मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय हो सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के लिए जरूरी है कि वह केंद्र के पंजीकरण, डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यता, उपलब्ध सुविधाओं और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करे। जांच के निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची। हालांकि, विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान सामने आने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। यदि शिकायत की पुष्टि होती है, तो यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित स्वास्थ्य केंद्र के खिलाफ पहले कोई शिकायत मिली थी या नहीं और उस पर क्या कदम उठाए गए थे।

निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग

मासूम की मौत के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि बच्चे की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई और इलाज के दौरान निर्धारित चिकित्सा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। इसके लिए इलाज से संबंधित दस्तावेज, डॉक्टर की योग्यता, अस्पताल की अनुमति और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय के आधार पर जांच की आवश्यकता है।

इसके साथ ही, अस्पताल में हुई तोड़फोड़ की घटना की भी अलग से जांच की जानी चाहिए। किसी भी शिकायत पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होना जरूरी है। वहीं, इलाज में लापरवाही की आशंका होने पर तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

फिलहाल, अमरोहा के डिडौली कोतवाली क्षेत्र के हरियाना गांव स्थित न्यू हेल्थ केयर सेंटर में बच्चे की मौत के बाद हुए हंगामे का मामला चर्चा में है। अब पुलिस की जांच और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद मामले की आगे की स्थिति का पता चलेगा।

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