डीजीपी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध और ट्रैफिक प्रबंधन की समीक्षा, दिए निर्देश

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी

कानपुर: उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने प्रदेश के सभी जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विस्तृत समीक्षा बैठक की।

इस दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों, विशेष अपराधों, साइबर अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा, यातायात प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीक के उपयोग सहित कई प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए ताकि पुलिसिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

बैठक का उद्देश्य प्रदेशभर में चल रही पुलिस कार्यवाहियों की प्रगति का मूल्यांकन करना, विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति जानना तथा लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए आवश्यक रणनीति तैयार करना था। इसके अलावा नागरिकों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया।

कानून-व्यवस्था और विशेष अपराधों की हुई विस्तृत समीक्षा

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों में घटित विशेष कानून-व्यवस्था की घटनाओं तथा गंभीर अपराधों की समीक्षा की गई। अधिकारियों से प्रत्येक महत्वपूर्ण प्रकरण की वर्तमान स्थिति, की गई कार्रवाई तथा भविष्य की रणनीति के संबंध में जानकारी ली गई।

इस अवसर पर निर्देश दिए गए कि संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचा जाए। साथ ही अपराध नियंत्रण के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी निगरानी और नियमित समीक्षा जारी रखने पर बल दिया गया।

विभिन्न संगठनों की गतिविधियों पर भी रही नजर

बैठक में वामपंथी संगठनों, किसान संगठनों तथा विभिन्न जातीय संगठनों से संबंधित गतिविधियों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि ऐसे विषयों पर निरंतर निगरानी रखी जाए तथा किसी भी परिस्थिति में शांति एवं सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न होने पाए।

इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया, ताकि किसी भी संभावित स्थिति का समय रहते समाधान किया जा सके।

यक्ष ऐप और जनसुनवाई की प्रगति का मूल्यांकन

पुलिस विभाग द्वारा संचालित यक्ष ऐप पर की जा रही कार्यवाहियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों से ऐप के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं पर की गई कार्रवाई की जानकारी ली गई तथा समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इसी क्रम में जनसुनवाई प्रणाली की समीक्षा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि नागरिकों की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित समय सीमा के भीतर निस्तारण पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अधिकारियों से कहा गया कि शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखें, जिससे आमजन का विश्वास पुलिस व्यवस्था पर और मजबूत हो।

मीडिया से समन्वित संवाद पर दिया गया जोर

बैठक के दौरान Response to Media Regarding Events विषय पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसी भी महत्वपूर्ण घटना के संबंध में मीडिया को समय पर तथ्यात्मक और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

इसके अलावा यह भी कहा गया कि अपुष्ट सूचनाओं से बचते हुए आधिकारिक जानकारी साझा की जाए, जिससे आमजन तक सही और विश्वसनीय सूचना पहुंचे तथा भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

विवेचनाओं के समयबद्ध निस्तारण पर विशेष फोकस

सीसीटीएनएस (CCTNS) में दर्ज 60 और 90 दिनों से लंबित विवेचनाओं की समीक्षा भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी लंबित मामलों का शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए।

इसके अतिरिक्त ई-साक्ष्य और ई-सम्मन प्रणाली के प्रभावी उपयोग पर भी विशेष बल दिया गया। अधिकारियों से कहा गया कि डिजिटल माध्यमों का अधिकतम उपयोग कर विवेचना प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को भी गति मिल सके।

लापता एवं बरामद बच्चों की समीक्षा

बैठक में मिसिंग और रिकवर्ड चाइल्ड मामलों की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लापता बच्चों की तलाश को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और बरामद बच्चों के मामलों में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए।

इसके साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने पर भी बल दिया गया।

ऑपरेशन दहन और एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों की समीक्षा

बैठक में ऑपरेशन दहन के अंतर्गत की जा रही कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68-ई एवं 68-एफ के तहत चल रही कार्यवाहियों की प्रगति का मूल्यांकन किया गया।

अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि मादक पदार्थों से संबंधित मामलों में प्रभावी कार्रवाई जारी रखी जाए तथा कानूनी प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

साइबर अपराध नियंत्रण के लिए दिए गए निर्देश

डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी लगातार नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। इसे देखते हुए बैठक में साइबर अपराध नियंत्रण की समीक्षा की गई।

अधिकारियों से कहा गया कि साइबर शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जाए, पीड़ितों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए नियमित अभियान चलाए जाएं।

साथ ही साइबर विशेषज्ञता बढ़ाने और तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग करने पर भी जोर दिया गया।

जीरो फेटेलिटी और ट्रैफिक प्रबंधन पर विशेष चर्चा

बैठक में Zero Fatality District की अवधारणा तथा Reducing Traffic Congestion (RTC) कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

इसके अलावा प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर यातायात प्रबंधन को मजबूत बनाने, नियमों का पालन सुनिश्चित कराने तथा जनजागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया गया। अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार अपनाकर ट्रैफिक व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए।

कानपुर जोन की समीक्षा भी रही महत्वपूर्ण

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कानपुर जोन की अपर पुलिस महानिदेशक अनुपमा  कुलश्रेष्ठ ने भी अपने जोन के अंतर्गत आने वाले जनपदों की स्थिति से विस्तारपूर्वक अवगत कराया।

उन्होंने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जनसुनवाई, साइबर अपराध, विवेचनाओं की प्रगति, ट्रैफिक प्रबंधन तथा अन्य प्रमुख विषयों पर जनपदों द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी साझा की।

इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और सुधारात्मक प्रयासों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर आगे की रणनीति पर भी चर्चा की गई।

प्रभावी पुलिसिंग और जवाबदेही पर दिया गया जोर

समीक्षा बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, आधुनिक तकनीक के उपयोग, समयबद्ध विवेचना, पारदर्शी जनसुनवाई और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

साथ ही नियमित समीक्षा, बेहतर समन्वय और जवाबदेही के माध्यम से पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया। अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि सभी निर्देशों का गंभीरता से पालन करते हुए जनहित से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि प्रदेश में सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमंद कानून-व्यवस्था का वातावरण लगातार मजबूत होता रहे।

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