कानपुर देहात में फोन हैक और सिम पोर्ट साइबर ठगी में शिवली पुलिस ने पीड़ित को लौटाए 98.30 हजार, पढ़िए
रिपोर्ट – बलराम चतुर्वेदी
कानपुर देहात: डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि समय पर शिकायत दर्ज कराने और पुलिस की सक्रिय कार्रवाई से कई मामलों में पीड़ितों को राहत भी मिल रही है।
ऐसा ही एक मामला कानपुर देहात के शिवली थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां साइबर ठगी का शिकार हुए एक व्यक्ति के खाते में पुलिस ने लगभग ₹98.30 हजार की धनराशि वापस कराने में सफलता हासिल की है।
पुलिस के अनुसार शेष धनराशि वापस कराने की प्रक्रिया भी जारी है। यह कार्रवाई न केवल पुलिस की तकनीकी दक्षता को दर्शाती है, बल्कि आम नागरिकों के लिए यह संदेश भी देती है कि साइबर अपराध होने पर घबराने के बजाय तुरंत शिकायत दर्ज कराना सबसे प्रभावी कदम होता है।
फोन हैक और सिम पोर्ट कर हुई साइबर ठगी
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना शिवली क्षेत्र के ग्राम मवैया निवासी सतीश चन्द्र, पुत्र मुंशीलाल, साइबर अपराधियों के निशाने पर आ गए।
आरोप है कि साइबर ठगों ने पहले उनका मोबाइल फोन हैक किया और इसके बाद उनकी सिम को अनधिकृत रूप से पोर्ट करा लिया।
सिम पोर्ट होने के बाद साइबर अपराधियों ने बैंकिंग सेवाओं से जुड़े ओटीपी और अन्य डिजिटल सुविधाओं का दुरुपयोग किया।
इसके परिणामस्वरूप 17 जनवरी से 22 जनवरी 2026 के बीच उनके बैंक खाते से धोखाधड़ी कर धनराशि निकाल ली गई।
हालांकि इस प्रकार की घटनाओं में अक्सर पीड़ितों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन इस मामले में समय पर की गई शिकायत पुलिस के लिए मददगार साबित हुई।
समय पर दर्ज कराई शिकायत
घटना की जानकारी होने के बाद सतीश चन्द्र ने 23 जनवरी 2026 को थाना शिवली की साइबर हेल्प डेस्क पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और आवश्यक तकनीकी जांच शुरू कर दी।
इसके बाद साइबर टीम ने संबंधित बैंक, डिजिटल भुगतान माध्यमों और तकनीकी प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय स्थापित किया। लगातार प्रयासों के बाद पुलिस धनराशि को ट्रैक करने और उसे सुरक्षित कराने में सफल रही।
खाते में वापस आए 98,308.46
शिवली पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क की कार्रवाई के परिणामस्वरूप 11 जुलाई 2026 को पीड़ित के बैंक खाते में ₹98,308.46 की धनराशि वापस करा दी गई।
पुलिस ने बताया कि मामले में शेष धनराशि की रिकवरी के लिए भी आवश्यक कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया जारी है। उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य राशि भी वापस कराई जा सकेगी।
धनराशि वापस मिलने के बाद पीड़ित ने शिवली पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क का आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती तो पूरी राशि वापस मिलना संभव नहीं हो पाता।
साइबर हेल्प डेस्क की सक्रिय भूमिका
इस पूरे प्रकरण में थाना शिवली की साइबर हेल्प डेस्क ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलते ही तकनीकी विश्लेषण, बैंकिंग समन्वय और डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से मामले को आगे बढ़ाया गया।
इस कार्रवाई में निरीक्षक अमरेन्द्र बहादुर सिंह, उपनिरीक्षक सोमवीर सिंह, कांस्टेबल अतुल कुमार तथा महिला कांस्टेबल प्रीति सोनकर की विशेष भूमिका रही। टीम के समन्वित प्रयासों के कारण पीड़ित को बड़ी राहत मिल सकी।
साइबर अपराध से बचाव क्यों है जरूरी?
आज लगभग हर व्यक्ति मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल भुगतान का उपयोग करता है। ऐसे में साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाने का प्रयास करते हैं।
फोन हैकिंग, सिम स्वैप या सिम पोर्ट फ्रॉड, फर्जी लिंक, ओटीपी साझा कराने की कोशिश, केवाईसी अपडेट के नाम पर कॉल और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करके अपराधी बैंक खातों तक पहुंच बनाने का प्रयास करते हैं।
इसलिए डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।
सिम पोर्ट फ्रॉड से कैसे बचें?
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ सावधानियां अपनाकर इस प्रकार की घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- अपने मोबाइल पर आने वाले ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड और यूपीआई पिन किसी के साथ साझा न करें।
- किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- मोबाइल में केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करें।
- बैंक खाते में मोबाइल नंबर बदलने या सिम से जुड़ी किसी भी गतिविधि का संदेश मिले तो तुरंत जांच करें।
- यदि अचानक मोबाइल नेटवर्क बंद हो जाए या सिम काम करना बंद कर दे तो तुरंत अपने मोबाइल सेवा प्रदाता से संपर्क करें।
- बैंक खाते में लेनदेन से संबंधित एसएमएस और ईमेल अलर्ट हमेशा सक्रिय रखें।
इन सावधानियों का पालन करने से साइबर ठगी की संभावना काफी कम हो सकती है।
मोबाइल खो जाए या चोरी हो जाए तो क्या करें?
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनका मोबाइल फोन खो जाए या चोरी हो जाए तो बिना देर किए सीईआईआर (CEIR) पोर्टल अथवा संचार साथी ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं।
इससे मोबाइल को ब्लॉक कराने और उसके दुरुपयोग को रोकने में सहायता मिलती है।
इसके अलावा मोबाइल सेवा प्रदाता से तुरंत सिम ब्लॉक कराने का अनुरोध करना भी आवश्यक है, ताकि कोई अन्य व्यक्ति उस नंबर का गलत उपयोग न कर सके।
साइबर ठगी होने पर तुरंत उठाएं ये कदम
यदि किसी व्यक्ति के बैंक खाते से ऑनलाइन धोखाधड़ी के माध्यम से धनराशि निकल जाए तो समय सबसे महत्वपूर्ण होता है।
ऐसी स्थिति में बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
समय रहते शिकायत दर्ज होने पर कई मामलों में धनराशि को फ्रीज कराकर वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती कुछ घंटे साइबर ठगी के मामलों में बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक है।
समय पर शिकायत से मिली राहत
कानपुर देहात के शिवली थाना क्षेत्र का यह मामला इस बात का उदाहरण है कि यदि साइबर अपराध होने के बाद पीड़ित तुरंत पुलिस और संबंधित एजेंसियों से संपर्क करे, तो आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस शेष धनराशि वापस कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर रही है।
साथ ही आम नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे डिजिटल लेनदेन के दौरान सतर्क रहें, किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक पर भरोसा न करें और किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

