प्रेमानंद जी महाराज पर 5 करोड़ रुपये के आरोप को धर्म रक्षा संघ ने बताया झूठा और निराधार – बाकी जानकारी के लिए पढ़ें पूरी खबर

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

वृंदावन: वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में सामने आए कथित पांच करोड़ रुपये के लेन-देन के आरोप पर धर्म रक्षा संघ ने आपत्ति जताई है। धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने आधिकारिक वक्तव्य जारी करते हुए इन आरोपों को अप्रमाणित, झूठा और निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के किसी संत की प्रतिष्ठा को इस तरह के आरोपों से जोड़ना उचित नहीं है।

धर्म रक्षा संघ का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास कथित पांच करोड़ रुपये के लेन-देन से संबंधित कोई ठोस प्रमाण, बैंक रिकॉर्ड, अनुबंध या अन्य विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए और सक्षम जांच एजेंसी के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। संगठन ने कहा कि गंभीर आरोपों पर चर्चा तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही होनी चाहिए।

विराट कोहली को लेकर लगाए गए दावे पर आपत्ति

धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ के अनुसार, यह दावा किया गया कि भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को पांच करोड़ रुपये देकर प्रेमानंद जी महाराज के प्रचार के लिए बुलाया गया था। उन्होंने इस दावे पर स्पष्ट आपत्ति जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर विषय बताया।

सौरभ गौड़ ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति या संत के संबंध में इस प्रकार की बात सामने आने पर उसकी पुष्टि विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। उनके मुताबिक, यदि पांच करोड़ रुपये के भुगतान का दावा किया जा रहा है तो उसके समर्थन में संबंधित दस्तावेज और प्रमाण भी सामने आने चाहिए।

धर्म रक्षा संघ का कहना है कि केवल किसी आरोप या चर्चा के आधार पर किसी संत की प्रतिष्ठा को प्रभावित करना उचित नहीं है। संगठन ने इस मामले में प्रमाण आधारित चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया है।

विराट कोहली के प्रतिनिधि के खंडन का किया उल्लेख

धर्म रक्षा संघ के वक्तव्य में यह भी कहा गया है कि विराट कोहली के प्रतिनिधि की ओर से पांच करोड़ रुपये दिए जाने के दावे को झूठा और निराधार बताया गया है। संगठन के अनुसार, विराट कोहली प्रेमानंद जी महाराज के प्रति व्यक्तिगत श्रद्धा और आस्था के कारण उनके दर्शन के लिए जाते हैं।

यानी, धर्म रक्षा संघ ने इस पूरे मामले में कथित भुगतान के दावे और विराट कोहली की वृंदावन यात्रा के बीच किसी तरह के व्यावसायिक संबंध के दावे को खारिज किया है। हालांकि, इस तरह के सार्वजनिक बयानों के बीच अंतिम तथ्य वही माने जाएंगे जो संबंधित पक्षों के प्रमाण और आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्ट हों।

साधना और भक्ति को बताया पहचान का आधार

धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा कि प्रेमानंद जी महाराज की पहचान किसी क्रिकेटर, अभिनेता या अन्य प्रसिद्ध व्यक्ति के आगमन से नहीं बनी है। उनके अनुसार, महाराज की पहचान साधना, सरलता, भक्ति और श्रीराधा नाम के प्रति समर्पण से जुड़ी है।

उन्होंने कहा कि देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन पहुंचकर प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग और दर्शन करते हैं। ऐसे में किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के उनके दर्शन के लिए पहुंचने को उनकी पहचान का आधार मानना उचित नहीं होगा।

वक्तव्य में ब्रज और वृंदावन की संत परंपरा का भी उल्लेख किया गया। धर्म रक्षा संघ ने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े संतों के बारे में किसी भी प्रकार की चर्चा करते समय भाषा और तथ्यों दोनों में मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

अप्रमाणित आरोपों से बचने की अपील

धर्म रक्षा संघ ने सनसनी पैदा करने वाले अप्रमाणित आरोपों से बचने की अपील की है। संगठन का कहना है कि किसी भी गंभीर आरोप को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाने से पहले उसके तथ्य और प्रमाण सामने होना जरूरी है।

सौरभ गौड़ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास कथित लेन-देन से संबंधित कोई ठोस जानकारी है तो वह उसे संबंधित जांच एजेंसी के सामने रख सकता है। इससे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।

वहीं, बिना प्रमाण के लगाए गए आरोपों से संबंधित व्यक्ति की सार्वजनिक छवि प्रभावित हो सकती है। इसलिए धार्मिक संतों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के संबंध में किसी भी दावे को साझा करते समय उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है।

ब्रज की संत परंपरा की गरिमा का मुद्दा

धर्म रक्षा संघ ने कहा कि प्रेमानंद जी महाराज सहित ब्रज के संतों की गरिमा और सम्मान के पक्ष में संगठन मजबूती से खड़ा है। संगठन के अनुसार, वृंदावन की पहचान धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है और यहां आने वाले संतों तथा श्रद्धालुओं के प्रति सम्मान की भावना बनाए रखना आवश्यक है।

वक्तव्य में कहा गया कि संतों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार के आरोप या दावे को तथ्य, प्रमाण और मर्यादा के साथ ही सामने रखा जाना चाहिए। इससे न केवल संबंधित व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा होती है, बल्कि सार्वजनिक चर्चा भी अधिक जिम्मेदार बनती है।

तथ्य और प्रमाण के आधार पर हो चर्चा

इस पूरे मामले में धर्म रक्षा संघ की ओर से मुख्य जोर प्रमाण आधारित चर्चा पर दिया गया है। संगठन ने कहा है कि किसी भी गंभीर आरोप की जांच तथ्यों और विश्वसनीय दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए।

साथ ही, संगठन ने प्रेमानंद जी महाराज के संबंध में लगाए गए पांच करोड़ रुपये के कथित भुगतान के आरोप को खारिज किया है और विराट कोहली के प्रतिनिधि की ओर से किए गए कथित खंडन का भी उल्लेख किया है।

फिलहाल, उपलब्ध बयान के आधार पर इस मामले में दो बातें प्रमुख रूप से सामने आती हैं—पहली, पांच करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़े दावे का धर्म रक्षा संघ ने विरोध किया है और इसे झूठा व निराधार बताया है; दूसरी, संगठन ने किसी भी गंभीर आरोप के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए जाने की मांग की है।

ऐसे में इस प्रकरण पर आगे होने वाली किसी भी चर्चा में आधिकारिक बयान, दस्तावेज और विश्वसनीय प्रमाण महत्वपूर्ण होंगे। धार्मिक संतों और सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े मामलों में तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर ही निष्कर्ष तक पहुंचना उचित होगा।

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