टीएमयू में AI पर हुआ महामंथन, विशेषज्ञ बोले- तकनीक तेज है लेकिन इंसानी संवेदनाओं का विकल्प नहीं

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रिपोर्ट – मोहम्मद अरशद 

मुरादाबाद: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच मुरादाबाद स्थित तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (TMU) में तकनीक के भविष्य और उसके जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। टीएमयू के सीसीएसआईटी और फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ICDTIS-2026 में देश-विदेश के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

कॉन्फ्रेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस और इंटेलिजेंट सिस्टम्स जैसी आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान करीब 90 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जहां AI को डिजिटल बदलाव की महत्वपूर्ण तकनीक बताया, वहीं इसके इस्तेमाल में मानवीय समझ, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को बनाए रखने पर भी जोर दिया।

समस्या समझे बिना तकनीक का इस्तेमाल उचित नहीं

कॉन्फ्रेंस के मुख्य अतिथि बीएलएस इंटरनेशनल सर्विस लिमिटेड, नई दिल्ली के टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन प्रेसिडेंट गोलक कुमार सिमली ने AI के बढ़ते प्रभाव पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए सीधे तकनीक की ओर बढ़ने से पहले समस्या और उसके मूल कारण को समझना जरूरी है।

उन्होंने मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, जनरेटिव AI और एजेंटिक AI जैसी तकनीकों में हो रहे बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये तकनीकें तेजी से काम करने और कई क्षेत्रों में नए समाधान विकसित करने में मदद कर रही हैं। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानों की तरह भावनाओं और संवेदनाओं को महसूस नहीं करता।

इसलिए, AI का इस्तेमाल केवल सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि मानवीय समझ और जिम्मेदार निर्णय प्रक्रिया के साथ किया जाना चाहिए। यही संतुलन तकनीक को उपयोगी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मशीन लर्निंग से स्मार्ट सिस्टम तक चर्चा

दिल्ली विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक साइंस विभाग के डॉ. बिस्वजीत मुखर्जी ने हाई-फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में मशीन लर्निंग और डीप न्यूरल नेटवर्क की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि AI आधारित तकनीक डेटा और पिछले अनुभवों से सीखकर बेहतर पूर्वानुमान लगाने तथा स्मार्ट सिस्टम विकसित करने में सहायता कर सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल तकनीक के विभिन्न क्षेत्रों में मशीन लर्निंग का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में शोध और व्यावहारिक प्रयोगों के माध्यम से इन तकनीकों की संभावनाओं को और बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

जनरेटिव AI और क्वांटम कंप्यूटिंग पर भी मंथन

आईबीएम इंडिया/साउथ एशिया के अकाउंट टेक्निकल लीडर डॉ. प्रभात मनोचा ने क्लाउड टेक्नोलॉजी, जनरेटिव AI, न्यूरल नेटवर्क, एजेंटिक AI और क्वांटम कंप्यूटिंग की संभावनाओं पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित रहने वाली संस्थाएं नहीं हैं। इसके बजाय, उन्हें विद्यार्थियों के लिए अनुभव, संवाद और नवाचार के मंच के रूप में भी विकसित होना चाहिए। विद्यार्थियों को तकनीक की बदलती दुनिया के साथ जोड़ने के लिए व्यावहारिक अनुभव और इंडस्ट्री से जुड़ाव महत्वपूर्ण है।

भारतीय भाषाओं के लिए स्वदेशी AI मॉडल पर जोर

एनआईसी दिल्ली के पूर्व महानिदेशक डॉ. इंदर पाल सिंह सेठी ने डिजिटल सेवाओं, डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा एनालिटिक्स के बढ़ते महत्व पर बात की। उन्होंने भारतीय भाषाओं के लिए स्वदेशी भाषा मॉडल विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

उनके अनुसार, AI के विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए तकनीकी विकास के साथ-साथ डेटा को सुरक्षित रखने और डिजिटल संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी ध्यान देना जरूरी है।

छात्रों को रियल टाइम प्रोजेक्ट से जोड़ने की जरूरत

टीएमयू के कुलपति प्रो. वीके जैन ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, रियल टाइम प्रोजेक्ट, स्टार्टअप और इंडस्ट्री के साथ काम करने का अवसर विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं होना चाहिए। बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक समस्याओं को समझने, समाधान विकसित करने और नई तकनीकों का व्यावहारिक इस्तेमाल करने के लिए तैयार करना आवश्यक है।

AI के अवसरों के साथ चुनौतियों पर भी चर्चा

टीएमयू की डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने तकनीक को विकास और प्रगति की महत्वपूर्ण भाषा बताया। उन्होंने कहा कि AI और चैटजीपीटी जैसी तकनीकों ने नए अवसर पैदा किए हैं, लेकिन इनके साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं।

इसलिए तकनीक के लाभों को समझने के साथ उसके जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी ध्यान देना जरूरी है। खासतौर पर शिक्षा के क्षेत्र में AI का इस्तेमाल विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ

ICDTIS-2026 का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया गया। साथ ही कॉन्फ्रेंस प्रोसीडिंग का विमोचन भी किया गया।

दो दिवसीय आयोजन के दौरान शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने शोध और विचार प्रस्तुत किए। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को AI तथा डिजिटल तकनीक के मौजूदा और संभावित उपयोगों को समझने का अवसर मिला।

तकनीक के साथ मानवीय संवेदना जरूरी

कुल मिलाकर, टीएमयू में आयोजित ICDTIS-2026 ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा का मंच प्रदान किया। कॉन्फ्रेंस में एक ओर AI, मशीन लर्निंग, जनरेटिव AI और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों की संभावनाओं पर विचार हुआ, वहीं दूसरी ओर इनके जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट रहा कि AI काम को तेज और अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन मानवीय संवेदना, विवेक और जिम्मेदार निर्णय लेने की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। ऐसे में तकनीक और मानव समझ के बीच संतुलन बनाकर ही डिजिटल भविष्य को बेहतर दिशा दी जा सकती है।

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