कानपुर प्रेस क्लब में छात्रों ने उठाए उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दे, छात्रसंघ चुनाव को लेकर जताई चिंता
रिपोर्ट – हनुमंत सिंह
कानपुर: कानपुर प्रेस क्लब में संयुक्त छात्र संघ की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें उच्च शिक्षा, छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और शैक्षणिक हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए गए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालयों में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने पर चिंता जताई और इसे छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा विषय बताया।
छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा से जुड़े उन मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर रखना था, जिनका असर नियमित छात्रों के शैक्षणिक और लोकतांत्रिक अधिकारों पर पड़ता है। इस दौरान छात्रसंघ चुनाव में लंबे समय से जारी गतिरोध, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) प्रशासन से जुड़े कथित आईजीआरएस ‘घोस्ट फाइल’ प्रकरण और एलएलबी छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई।
छात्रसंघ चुनाव को लेकर उठाई आवाज
संयुक्त छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर लंबे समय से स्थिति स्पष्ट नहीं है। छात्र नेताओं ने दावा किया कि करीब 14 वर्षों से छात्रसंघ चुनाव को लेकर गतिरोध बना हुआ है। उनके अनुसार, छात्रसंघ चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने और अपनी समस्याओं को संस्थागत स्तर पर रखने का अवसर मिलता है।
छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसरों में विद्यार्थियों की अपनी निर्वाचित प्रतिनिधि व्यवस्था होने से शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दों को बेहतर तरीके से सामने रखा जा सकता है। इसलिए उन्होंने छात्रसंघ चुनाव को लेकर स्पष्ट व्यवस्था और संबंधित स्तर पर आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
हालांकि, छात्रसंघ चुनाव से संबंधित 14 वर्ष के गतिरोध का आंकड़ा प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इसे उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
CSJMU के कथित ‘घोस्ट फाइल’ प्रकरण का मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएसजेएमयू प्रशासन से जुड़े कथित आईजीआरएस ‘घोस्ट फाइल’ प्रकरण का भी उल्लेख किया गया। छात्र प्रतिनिधियों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासनिक स्तर पर जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
संयुक्त छात्र संघ का कहना है कि छात्रों से जुड़ी शिकायतों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। संगठन के प्रतिनिधियों के मुताबिक, शिकायतों के निस्तारण से संबंधित प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे छात्रों को अपनी शिकायतों की स्थिति और कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सके।
गौरतलब है कि सीएसजेएमयू की आधिकारिक वेबसाइट पर विश्वविद्यालय अधिनियम, प्रथम परिनियम और अध्यादेश/नियमों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं। साथ ही विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर Student Council की व्यवस्था भी दर्ज है।
एलएलबी छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों का मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एलएलबी छात्रों से जुड़े शैक्षणिक अधिकारों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया। छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि कानून की पढ़ाई कर रहे नियमित छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा जरूरी है।
उन्होंने संबंधित विश्वविद्यालय और प्रशासनिक अधिकारियों से इन मामलों को गंभीरता से देखने की अपील की। छात्र प्रतिनिधियों का कहना था कि विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा, शैक्षणिक अवसरों और अन्य अकादमिक अधिकारों से जुड़े मामलों में स्पष्ट नियम और समयबद्ध प्रक्रिया होनी चाहिए।
संयुक्त छात्र संघ ने कहा कि यदि छात्रों को किसी शैक्षणिक या प्रशासनिक समस्या का सामना करना पड़ता है तो उसके समाधान के लिए संस्थागत स्तर पर प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए। इसी क्रम में संगठन ने संबंधित अधिकारियों से छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
संगठन ने खुद को बताया गैर-राजनीतिक
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संयुक्त छात्र संघ ने अपने अभियान को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उसका आंदोलन गैर-राजनीतिक, गैर-पक्षपाती और स्वतंत्र है। संगठन की ओर से जारी कानूनी घोषणा के अनुसार, अभियान किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं चलाया जा रहा है।
छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य कैंपस में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, छात्रों के शैक्षणिक हितों की सुरक्षा और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की मांग करना है। उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 50(6) का भी उल्लेख किया और इसके तहत नियमों के पालन की मांग रखी।
उपलब्ध कानूनी स्रोतों में उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 के तहत विश्वविद्यालयों के वैधानिक प्रावधानों का उल्लेख मिलता है। हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों द्वारा धारा 50(6) के संदर्भ में की गई व्याख्या और उनकी मांगों की कानूनी स्थिति संबंधित प्राधिकरण या विशेषज्ञ स्तर पर स्पष्ट की जानी होगी।
मीडिया से छात्रों की आवाज उठाने की अपील
संयुक्त छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से भी इन मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाने की अपील की। उनका कहना था कि छात्रों से जुड़े मामलों की जानकारी सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन और नीति-निर्माताओं तक पहुंचना आवश्यक है।
छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य नियमित छात्रों के अधिकारों और शैक्षणिक हितों से जुड़े विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाना है। साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इन मुद्दों को कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से उठाया जाएगा।
संदीप जायसवाल और अनुज त्रिपाठी ने रखी बात
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संदीप जायसवाल और अनुज त्रिपाठी ने प्रमुख वक्ता के रूप में अपनी बात रखी। उन्होंने छात्रसंघ चुनाव, विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े कथित प्रकरण और एलएलबी छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर संगठन का पक्ष सामने रखा।
वहीं, संयुक्त छात्र संघ की टीम में सचिन गुप्ता और पार्थ समेत अन्य छात्र भी शामिल रहे। छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका अभियान छात्रों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से सामने रखने पर केंद्रित रहेगा।
इस प्रकार, कानपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए संयुक्त छात्र संघ ने छात्रसंघ चुनाव और उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों को सार्वजनिक चर्चा में लाने की कोशिश की। अब इन मुद्दों पर विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

