अमेठी में पेड़ काटने की रसीद को लेकर विवाद, जानिए ठेकेदार ने वन विभाग पर लगाया यह बड़ा आरोप

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रिपोर्ट – अंजनी मिश्रा 

अमेठी: जिले में पेड़ कटान से संबंधित रसीद जारी करने को लेकर ठेकेदार और वन विभाग के बीच विवाद सामने आया है। ठेकेदार ने वन विभाग के अधिकारियों पर रसीद उपलब्ध कराने के नाम पर 8 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया है। ठेकेदार का दावा है कि कथित रूप से रकम देने के बावजूद उसे पेड़ काटने से संबंधित रसीद अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई।

मामला सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और पेड़ कटान की अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, ठेकेदार की ओर से लगाए गए आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

रसीद को लेकर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, पेड़ कटान से जुड़े काम के लिए ठेकेदार की ओर से संबंधित विभागीय प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जा रहा था। इसी दौरान रसीद या अनुमति से संबंधित दस्तावेज को लेकर विवाद की स्थिति बन गई।

ठेकेदार का आरोप है कि उसने पेड़ काटने की रसीद जारी कराने के लिए वन विभाग से जुड़े अधिकारी आलोक और रणवीर सिंह को 8 हजार रुपये दिए थे। इसके बावजूद उसे संबंधित रसीद नहीं दी गई।

ठेकेदार के मुताबिक, उसने अधिकारियों से रसीद उपलब्ध कराने के लिए कई बार संपर्क किया, लेकिन उसे अपेक्षित दस्तावेज नहीं मिला। इसके बाद उसने मामले की जानकारी वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने का फैसला किया।

डीएफओ से शिकायत करने का दावा

ठेकेदार ने दावा किया है कि उसने इस मामले की जानकारी डीएफओ को भी दी है। उसका कहना है कि रसीद जारी करने के नाम पर कथित रूप से रकम लेने के बावजूद दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया, इसलिए उसने शिकायत के माध्यम से पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को दी।

ऐसे में अब यह महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की ओर से मामले में क्या जांच की जाती है। साथ ही, विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर यह भी स्पष्ट किया जा सकता है कि संबंधित पेड़ों के कटान की अनुमति और रसीद जारी करने की प्रक्रिया किस स्तर पर थी।

यदि विभागीय स्तर पर जांच होती है तो उसमें संबंधित दस्तावेज, आवेदन, रसीद रिकॉर्ड और अन्य प्रक्रियात्मक जानकारी को देखा जा सकता है। इससे पूरे विवाद की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।

विवाद की सूचना पर मौके पर पहुंचे अधिकारी

पेड़ काटने की रसीद को लेकर ठेकेदार और वन विभाग के बीच विवाद की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों के बीच मामले को लेकर बातचीत भी हुई।

मौके पर अधिकारियों की मौजूदगी में विवाद को समझने और स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया। हालांकि, इस दौरान क्या निष्कर्ष निकला और दोनों पक्षों के बीच किस स्तर पर सहमति बनी, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

फिलहाल मामला जांच और शिकायत के स्तर पर बताया जा रहा है। इसलिए किसी भी पक्ष पर लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

वन विभाग की प्रक्रिया पर उठे सवाल

यह विवाद सामने आने के बाद पेड़ कटान से संबंधित अनुमति और रसीद जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। आमतौर पर पेड़ कटान से जुड़े मामलों में निर्धारित नियमों और विभागीय प्रक्रिया का पालन किया जाता है। ऐसे में आवेदन से लेकर अनुमति और संबंधित दस्तावेज जारी होने तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ठेकेदार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद अब यह देखना होगा कि विभागीय रिकॉर्ड में 8 हजार रुपये से संबंधित कोई जानकारी उपलब्ध है या नहीं। साथ ही, क्या ठेकेदार की ओर से निर्धारित शुल्क जमा किया गया था और उसके बदले रसीद जारी होनी थी या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।

इसके अलावा, संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि भी दस्तावेज और जांच के आधार पर ही संभव होगी।

आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ठेकेदार द्वारा लगाए गए 8 हजार रुपये लेने के आरोपों की फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए आरोपों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

वन विभाग की ओर से यदि मामले की जांच की जाती है तो उसके निष्कर्ष के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रसीद जारी करने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं। वहीं, यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।

दूसरी ओर, यदि जांच में आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। इसलिए फिलहाल दोनों पक्षों के दावों और विभागीय जांच के परिणाम का इंतजार करना जरूरी है।

जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

अमेठी में सामने आया यह विवाद पेड़ कटान से जुड़े दस्तावेज और विभागीय प्रक्रिया को लेकर है। ठेकेदार ने वन विभाग के अधिकारियों पर 8 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया है, जबकि इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

मामले की निष्पक्ष जांच होने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि रसीद जारी करने की प्रक्रिया में वास्तव में क्या हुआ और कथित रकम के लेनदेन का कोई आधार है या नहीं। साथ ही, जांच से यह भी पता चलेगा कि संबंधित पेड़ कटान के लिए कौन-कौन से दस्तावेज और अनुमति जरूरी थे तथा उन्हें लेकर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई।

फिलहाल पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद मामले को लेकर जांच की स्थिति पर नजर बनी हुई है। संबंधित विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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