कानपुर सेंट्रल GRP पर उठे सवाल, घायल युवक को लेकर पिता को गलत अस्पताल भेजने का आरोप – पढ़िए पूरा वाक्या
रिपोर्ट – हनुमंत सिंह
कानपुर: त्योहार के मौके पर घर लौट रहे कानपुर देहात के एक युवक के ट्रेन से गिरकर घायल होने के बाद कानपुर सेंट्रल जीआरपी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद पुलिस ने उन्हें युवक के घायल होने की सूचना तो दी, लेकिन इलाज के लिए उसे जिस अस्पताल में भर्ती बताया गया, वहां पहुंचने पर युवक मौजूद नहीं मिला। इसके बाद घायल बेटे की तलाश में पिता को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जाना पड़ा।
परिजनों के मुताबिक, काफी प्रयास के बाद युवक का पता लाला लाजपत राय अस्पताल (हैलट) में चला। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर परिवार ने जीआरपी की सूचना व्यवस्था और समन्वय पर सवाल उठाए हैं। वहीं, मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और घटनाक्रम की पूरी स्थिति सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
अंबाला से घर लौट रहा था युवक
जानकारी के अनुसार कानपुर देहात के पुखरायां क्षेत्र के ग्राम कल्ला निवासी राजकुमार सचान का बेटा राहुल सचान अंबाला की एक निजी फैक्ट्री में काम करता है। त्योहार नजदीक होने के कारण राहुल 4 अक्टूबर 2026 को अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान वह ट्रेन से गिरकर घायल हो गया।
हादसे के बाद कानपुर सेंट्रल जीआरपी की ओर से राहुल के पिता राजकुमार सचान को फोन पर उसके ट्रेन से गिरने और गंभीर रूप से घायल होने की सूचना दी गई। बेटे के साथ हादसे की जानकारी मिलते ही परिवार में चिंता का माहौल बन गया। पिता तत्काल बेटे की स्थिति जानने और उसके पास पहुंचने के लिए निकल पड़े।
मधुराज अस्पताल भेजे जाने का आरोप
परिजनों का कहना है कि जीआरपी की ओर से उन्हें बताया गया कि राहुल को कानपुर के मधुराज अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वहीं उसका उपचार चल रहा है। इसके बाद राजकुमार सचान बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचे।
हालांकि, वहां पहुंचने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि राहुल सचान उस अस्पताल में भर्ती नहीं है। ऐसे में परिवार की चिंता और बढ़ गई। पिता को यह समझ नहीं आ रहा था कि घायल बेटा आखिर किस अस्पताल में है और उसका इलाज कहां चल रहा है।
परिजनों के अनुसार, हादसे के बाद घायल युवक की सही लोकेशन और उपचार स्थल की जानकारी मिलना बेहद जरूरी था। ऐसे में गलत सूचना मिलने से उनका काफी समय अस्पताल तलाशने में चला गया।
बेटे की तलाश में भटकते रहे पिता
राहुल के पिता राजकुमार सचान का कहना है कि बेटे के घायल होने की सूचना मिलने के बाद वह लगातार उसकी तलाश करते रहे। पहले मधुराज अस्पताल पहुंचने के बाद जब वहां राहुल के भर्ती न होने की जानकारी मिली, तो उन्होंने अन्य संभावित स्थानों पर पता लगाना शुरू किया।
आखिरकार काफी प्रयास के बाद उन्हें जानकारी मिली कि राहुल का उपचार लाला लाजपत राय अस्पताल यानी हैलट में चल रहा है। इसके बाद परिवार वहां पहुंचा और घायल युवक को देखा।
इस घटनाक्रम के बाद परिजनों ने जीआरपी की सूचना देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि शुरुआत में ही घायल युवक के सही अस्पताल और स्थिति की जानकारी दे दी जाती, तो उन्हें इस तरह भटकना नहीं पड़ता।
पुलिस की सूचना व्यवस्था पर उठे सवाल
ट्रेन हादसे के बाद किसी घायल यात्री के परिजनों को समय पर सही जानकारी देना महत्वपूर्ण होता है। खासतौर पर जब मामला गंभीर चोट से जुड़ा हो, तब अस्पताल का सही नाम, मरीज की स्थिति और उसकी लोकेशन स्पष्ट रूप से बताना परिवार के लिए बेहद जरूरी होता है।
इसी वजह से इस मामले में जीआरपी की ओर से कथित तौर पर गलत अस्पताल की जानकारी दिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से सूचना किस आधार पर दी गई और राहुल को लेकर उस समय जीआरपी के पास क्या जानकारी उपलब्ध थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
इसके अलावा, यह भी जरूरी है कि हादसे के बाद घायल यात्री को किस माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया और उसकी पहचान की प्रक्रिया कैसे हुई। इन सभी बिंदुओं की जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी।
परिजनों ने कार्रवाई और स्पष्ट जानकारी की मांग की
घटना के बाद राहुल के परिवार ने पूरे मामले में स्पष्ट जानकारी और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की है। परिवार का कहना है कि हादसे जैसी स्थिति में पुलिस और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए, ताकि घायल व्यक्ति के परिजनों को सही जानकारी समय पर मिल सके।
परिजनों के मुताबिक, उनका मुख्य उद्देश्य बेटे का इलाज और उसकी स्थिति की जानकारी हासिल करना था। ऐसे में गलत जानकारी के कारण उन्हें कई स्थानों पर जाना पड़ा। परिवार ने उम्मीद जताई है कि मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाएगा कि अस्पताल से संबंधित गलत सूचना कैसे दी गई।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी स्थिति
फिलहाल इस पूरे मामले में जीआरपी की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना महत्वपूर्ण है। यदि सूचना गलत दी गई थी तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि गलती किस स्तर पर हुई और ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।
वहीं, राहुल सचान के स्वास्थ्य को लेकर भी परिवार की प्राथमिकता उसका उपचार और जल्द स्वस्थ होना है। ट्रेन हादसे से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि दुर्घटना के बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन के बीच सूचना का आदान-प्रदान कितना प्रभावी है।
ऐसे मामलों में घायल व्यक्ति के परिजनों को सही और समयबद्ध सूचना मिलना बेहद आवश्यक है। इसलिए कानपुर सेंट्रल जीआरपी से जुड़े इस प्रकरण में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। इससे न केवल परिवार की शिकायत का समाधान हो सकेगा, बल्कि भविष्य में दुर्घटना के मामलों में सूचना व्यवस्था को और बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है।

