बांदा के नेहरू पीजी कॉलेज में प्राधिकार नियंत्रक की नियुक्ति पर विवाद, छात्रों ने राज्यपाल को भेजा ज्ञापन
रिपोर्ट – शानू वर्मा
बांदा। पंडित जवाहरलाल नेहरू पीजी कॉलेज, बांदा में प्राधिकार नियंत्रक की नियुक्ति को लेकर छात्रों और छात्र संघ संघर्ष समिति ने आपत्ति जताई है। छात्रों ने कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. नन्दलाल शुक्ला को प्राधिकार नियंत्रक बनाए जाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल एवं कुलाधिपति को ज्ञापन भेजा है। छात्रों ने मांग की है कि कॉलेज में प्राधिकार नियंत्रक की जिम्मेदारी किसी निष्पक्ष एवं विवादों से दूर व्यक्ति को दी जाए।
छात्र संघ संघर्ष समिति की ओर से दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि डॉ. नन्दलाल शुक्ला शासन स्तर पर पैरवी कर स्वयं को प्राधिकार नियंत्रक बनवाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। छात्रों ने अपने ज्ञापन में कॉलेज प्रशासन से जुड़े कई गंभीर मुद्दों का उल्लेख करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग की है।
O-Level कंप्यूटर कोर्स को लेकर छात्रों ने उठाए सवाल
छात्रों का आरोप है कि कॉलेज में O-Level कंप्यूटर कोर्स के नाम पर विद्यार्थियों से प्रति छात्र 1,440 रुपये लिए गए थे। छात्रों के मुताबिक फीस लेने के बावजूद न तो निर्धारित कक्षाएं संचालित की गईं और न ही विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया गया।
छात्रों ने इस मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि विद्यार्थियों से शुल्क लिया गया था तो उसके बदले निर्धारित शैक्षणिक सुविधा और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाना चाहिए था। इस संबंध में कॉलेज प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
कॉलेज की जमीन और प्राचार्य आवास को लेकर भी आरोप
ज्ञापन में छात्र संघ संघर्ष समिति ने कॉलेज की संपत्ति से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि प्राचार्य आवास और कॉलेज की जमीन को नियमों के विपरीत लीज पर दिए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई।
छात्रों ने संबंधित अभिलेखों की जांच और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि शैक्षणिक संस्थान की संपत्ति से जुड़े किसी भी निर्णय में निर्धारित नियमों और पारदर्शिता का पालन होना जरूरी है।
सेवानिवृत्ति के बाद आवास में रहने का आरोप
छात्रों ने अपने ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया है कि सेवानिवृत्ति के कई वर्ष बीत जाने के बावजूद पूर्व प्राचार्य डॉ. नन्दलाल शुक्ला कॉलेज के प्राचार्य आवास में रह रहे हैं। छात्रों का दावा है कि आवास का किराया भी जमा नहीं किया गया है।
इस आरोप को लेकर भी छात्र समिति ने संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। यदि आवास आवंटन, किराया और उपयोग से संबंधित कोई विवाद है तो उसके दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
निष्पक्ष व्यक्ति को नियंत्रक बनाने की मांग
छात्र संघ संघर्ष समिति ने कहा कि जिन व्यक्ति के खिलाफ छात्र गंभीर आरोप लगा रहे हैं, उन्हें ही प्राधिकार नियंत्रक की जिम्मेदारी सौंपे जाने से छात्रों के बीच निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। समिति ने मांग की है कि कॉलेज के प्रशासनिक संचालन के लिए किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या निष्पक्ष शिक्षाविद को प्राधिकार नियंत्रक नियुक्त किया जाए।
छात्रों ने कहा कि कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है। उनका कहना है कि नियंत्रक की नियुक्ति ऐसी होनी चाहिए जिस पर सभी पक्षों का भरोसा कायम रह सके।
मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री को भी भेजी ज्ञापन की प्रति
छात्रों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति और बांदा के जिलाधिकारी को भी भेजी गई हैं। छात्रों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराकर उचित निर्णय लेने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने वालों में अमित यादव, शमशेर यादव, अभय राज और मृत्युंजय समेत बड़ी संख्या में छात्र शामिल रहे। छात्रों ने उम्मीद जताई कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज से जुड़े आरोपों और प्राधिकार नियंत्रक की नियुक्ति के मुद्दे पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
फिलहाल, डॉ. नन्दलाल शुक्ला की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

