मेरठ में वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश, खंडहर से 17 चोरी की बाइकें और अवैध असलहे बरामद
रिपोर्ट – मनीष पराशर
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस ने वाहन चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित अंतर्जनपदीय वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पल्लवपुरम थाना पुलिस ने चार युवकों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर एक खंडहरनुमा मकान से 17 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से 315 बोर के दो अवैध तमंचे और दो जिंदा कारतूस भी मिले हैं।
पुलिस की इस कार्रवाई से वाहन चोरी की कई घटनाओं के खुलासे की उम्मीद है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी मेरठ के अलावा आसपास के अन्य जिलों में भी बाइक चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। इनमें मेरठ, मुजफ्फरनगर के खतौली, सहारनपुर के देवबंद और आसपास के क्षेत्रों का नाम सामने आया है।
संदिग्ध वाहन चेकिंग के दौरान पकड़े गए चार आरोपी
पुलिस के मुताबिक क्षेत्राधिकारी दौराला के नेतृत्व में पल्लवपुरम थाना पुलिस की टीम संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस ने चार संदिग्ध युवकों को रोककर पूछताछ की। जांच के दौरान उनके पास से दो संदिग्ध मोटरसाइकिलें, दो अवैध तमंचे और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए।
पुलिस ने जब आरोपियों से बरामद वाहनों और असलहों के संबंध में पूछताछ की तो मामले की परतें खुलने लगीं। पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर एक खंडहरनुमा मकान में छापेमारी की। वहां अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखी गईं 15 और मोटरसाइकिलें बरामद हुईं। इस तरह पुलिस के हाथ कुल 17 बाइक लगीं।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान प्रियांशु, दक्ष, आदित्य सैनी और विराज के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार चारों आरोपी मेरठ के थाना इंचौली क्षेत्र के रहने वाले हैं।
18 से 20 वर्ष की उम्र के हैं आरोपी
पुलिस पूछताछ में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी करीब 18 से 20 वर्ष की आयु के हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने हाल ही में वाहन चोरी के इस धंधे में कदम रखा था। वे खासतौर पर ऐसी पुरानी और लोकप्रिय मोटरसाइकिलों को निशाना बनाते थे, जिनके लॉक खोलना या चाबी के माध्यम से स्टार्ट करना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।
बताया गया कि आरोपी मुख्य रूप से स्प्लेंडर और होंडा डीलक्स जैसी मोटरसाइकिलों को चोरी करते थे। चोरी के बाद वाहनों को तत्काल बेचने के बजाय पहले किसी सुनसान स्थान पर छिपा दिया जाता था। इसके बाद उपयुक्त खरीदार मिलने पर इन्हें बाजार में खपाने की योजना बनाई जाती थी।
खंडहर को बनाया था चोरी की बाइकों का ठिकाना
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने चोरी की मोटरसाइकिलों को छिपाने के लिए एक खंडहरनुमा भवन का इस्तेमाल किया था। सुनसान स्थान होने के कारण वहां लंबे समय तक चोरी के वाहनों को छिपाकर रखा जा रहा था।
हालांकि, पुलिस की सक्रियता और संदिग्ध वाहन चेकिंग के दौरान आरोपियों के पकड़े जाने के बाद यह ठिकाना पुलिस की नजर में आ गया। इसके बाद आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने वहां से 15 मोटरसाइकिलें बरामद कीं।
इस बरामदगी के बाद पुलिस अब सभी वाहनों के इंजन और चेसिस नंबरों की जांच कर रही है। संबंधित थानों में दर्ज वाहन चोरी के मुकदमों से इन नंबरों का मिलान कराया जा रहा है। इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बरामद मोटरसाइकिलें किन-किन स्थानों से चोरी की गई थीं।
एसएसपी ने वाहन मालिकों से की सावधानी बरतने की अपील
मेरठ के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने पत्रकार वार्ता के दौरान पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पल्लवपुरम थाना पुलिस को वाहन चोरी के मामले में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर 15 अन्य वाहन बरामद किए गए हैं।
एसएसपी ने वाहन मालिकों से भी सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पुराने वाहनों में अतिरिक्त डबल लॉक या मजबूत सुरक्षा लॉक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही वाहन को यथासंभव सुरक्षित और निगरानी वाले स्थान पर ही पार्क करना चाहिए।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक वाहन चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए संदिग्ध वाहनों की जांच और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी आगे भी जारी रहेगी।
गिरोह के अन्य सदस्यों और खरीदारों की तलाश जारी
चार आरोपियों की गिरफ्तारी और 17 मोटरसाइकिलों की बरामदगी के बाद पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चोरी की मोटरसाइकिलों को खरीदने या उन्हें आगे बेचने में किन लोगों की भूमिका थी।
इसके अलावा बरामद अवैध तमंचों के संबंध में भी जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास और उनके संपर्क में रहे अन्य संदिग्ध लोगों की जानकारी जुटा रही है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है और उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वहीं, बरामद मोटरसाइकिलों के वास्तविक मालिकों की पहचान के लिए दस्तावेजों और इंजन-चेसिस नंबरों का सत्यापन जारी है।

