फर्रुखाबाद में तालाब से कब्जा हटाने समेत कई मांगों को लेकर किसान यूनियन ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
रिपोर्ट- हर्ष वर्मा
किसान यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की कई समस्याओं के संबंध में पूर्व में भी संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण संगठन को दोबारा प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी भी की और समस्याओं के शीघ्र निस्तारण की मांग की।
तालाब की भूमि पर कब्जे का मामला उठाया
ज्ञापन में तहसील सदर क्षेत्र के एक गांव में स्थित तालाब की भूमि पर कथित कब्जे का मामला प्रमुखता से उठाया गया। किसान यूनियन के नेताओं के अनुसार, तालाब की जमीन से संबंधित शिकायत पहले भी अधिकारियों के सामने रखी जा चुकी है। आरोप है कि मामले में अधिकारियों की ओर से आवश्यक निर्देश दिए जाने के बावजूद अभी तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
किसान यूनियन ने प्रशासन से मांग की कि तालाब की भूमि की मौके पर जांच कराई जाए और यदि सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही तालाब को कब्जामुक्त कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।
किसान नेताओं का कहना है कि तालाब और अन्य जलस्रोत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इनकी भूमि का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का परीक्षण कर मामले का निष्पक्ष समाधान कराने की मांग की।
महिला से मारपीट और अभद्रता का मामला भी ज्ञापन में शामिल
किसान यूनियन ने ग्राम राहतपुर निवासी एक महिला से कथित मारपीट और अभद्रता से जुड़े मामले को भी जिलाधिकारी के समक्ष उठाया। संगठन का आरोप है कि संबंधित मामले में शिकायत किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। किसान यूनियन ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
किसान नेताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए प्रशासन से निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई की उम्मीद रहती है। इसलिए शिकायतों को लंबित रखने के बजाय संबंधित विभागों को मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए।
अधिकारियों को पहले भी दी जा चुकी है जानकारी
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार कठेरिया ने कहा कि किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर संगठन लगातार संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखता रहा है। उनका कहना है कि कई मामलों में शिकायतें पहले भी दी गईं, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया। इसी वजह से किसान यूनियन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामलों में हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभागों को उसकी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए और नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
समयबद्ध समाधान की मांग
किसान यूनियन ने प्रशासन से मांग की कि ज्ञापन में शामिल सभी मामलों की प्राथमिकता के आधार पर जांच कराई जाए। विशेष रूप से तालाब की भूमि से जुड़े मामले में राजस्व विभाग की टीम के माध्यम से मौके की स्थिति की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई।
इसके अलावा महिला से जुड़े मामले में भी निष्पक्ष जांच कर शिकायतकर्ता को उचित न्याय दिलाने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान होने से लोगों का प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत होगा।
किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार कठेरिया ने स्पष्ट किया कि संगठन किसानों और ग्रामीणों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
किसान यूनियन ने यह भी कहा कि यदि संबंधित समस्याओं का निर्धारित समय में समाधान नहीं किया गया तो संगठन आगे आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। हालांकि, संगठन की प्राथमिकता बातचीत और प्रशासनिक स्तर पर समस्याओं का समाधान कराना है।
किसान नेताओं ने कहा कि तालाब की भूमि, ग्रामीणों की सुरक्षा और शिकायतों के निस्तारण जैसे मुद्दे सीधे तौर पर आम लोगों से जुड़े हैं। इसलिए इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

