प्रशिक्षण के बाद भी 540 सफाईकर्मियों को काम पर नहीं लिया, नगर निगम के खिलाफ हड़ताल
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा। नगर निगम द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त 540 महिला एवं पुरुष सफाईकर्मियों को काम पर वापस नहीं लिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। काम पर वापसी की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर एकता मंच ने हड़ताल शुरू कर दी है। संगठन का आरोप है कि पिछले करीब तीन महीनों से लगातार पत्राचार और मौखिक वार्ता के बावजूद प्रशिक्षित सफाईकर्मियों की समस्या का समाधान नहीं किया गया। अब संगठन ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर प्रभावित कर्मियों को न्याय दिलाने की मांग की है।
सफाई मजदूर एकता मंच के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने जिलाधिकारी को सौंपे पत्र में पूरे मामले की जानकारी देते हुए कहा कि नगर निगम से जुड़े 540 महिला एवं पुरुष सफाईकर्मियों ने प्रशिक्षण पूरा किया है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें काम पर वापस नहीं लिया गया। संगठन के मुताबिक, इन कर्मियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। इसी समस्या के समाधान के लिए पिछले कई महीनों से नगर निगम प्रशासन के साथ लगातार बातचीत की जा रही थी।
तीन महीने से चल रही थी काम पर वापसी की मांग
संगठन का कहना है कि प्रशिक्षित सफाईकर्मियों को काम पर लिए जाने की मांग को लेकर पिछले तीन महीने से लगातार पत्राचार किया जा रहा था। इसके अलावा नगर निगम अधिकारियों के साथ मौखिक वार्ताएं भी हुईं। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद जब कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ तो कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से अपनी बात रखने का फैसला किया।
बताया गया कि 22 सितंबर 2026 को 540 सफाईकर्मी नगर निगम कार्यालय पहुंचे और काम पर वापस लिए जाने की मांग उठाई। इस दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी नगर निगम प्रशासन से मुलाकात कर कर्मचारियों की समस्या का समाधान कराने का अनुरोध किया।
25 सितंबर तक काम पर लेने का दिया गया था आश्वासन
संगठन के अनुसार, कर्मचारियों की समस्या पर नगर निगम की अपर नगर आयुक्त श्रीमती प्रियंका सिंह ने नगर आयुक्त के निर्देश पर आश्वासन दिया था कि जिन कर्मियों ने 10 से 15 दिनों तक प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उन्हें 25 सितंबर 2026 तक काम पर लिए जाने की कार्यवाही की जाएगी।
कर्मचारियों को उम्मीद थी कि निर्धारित समय सीमा के भीतर नगर निगम प्रशासन की ओर से सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, संगठन का आरोप है कि 25 सितंबर तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया और अपनी मांग को दोबारा प्रशासन के सामने रखा।
समस्या के समाधान के लिए गठित हुई कमेटी
विरोध प्रदर्शन के बाद नगर निगम की ओर से मामले के समाधान के लिए अपर नगर आयुक्त श्री अनिल कुमार को कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। कमेटी ने कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की और भरोसा दिलाया कि पूरे मामले का परीक्षण करने के बाद 30 सितंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जाएगी।
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कमेटी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 1 अक्टूबर तक का समय दिया। संगठन के मुताबिक, कमेटी की रिपोर्ट 30 सितंबर को ही नगर आयुक्त को भेज दी गई थी। इसके बावजूद संगठन का आरोप है कि रिपोर्ट पर अपेक्षित स्तर पर संज्ञान नहीं लिया गया और कर्मचारियों की काम पर वापसी को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
सात सूत्रीय मांगों को लेकर तेज हुआ आंदोलन
मामले में अपेक्षित कार्रवाई न होने से नाराज संयुक्त कार्यकारिणी ने 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद अपनी सात सूत्रीय मांगें प्रशासन के सामने रखीं।
संगठन का कहना है कि कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद भी जब समाधान की दिशा में स्पष्ट कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
इसी बीच संगठन को शाम करीब 4:30 बजे वार्ता के लिए पत्र प्राप्त हुआ। इसके बाद 3 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे वार्ता का समय निर्धारित किया गया। हालांकि, संगठन के अनुसार इससे पहले ही 1 अक्टूबर को नगर निगम प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया जा चुका था।
अल्टीमेटम के बाद हड़ताल का फैसला
संगठन का आरोप है कि 24 घंटे का समय दिए जाने के बावजूद उनकी मांगों पर प्रभावी सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में सफाईकर्मियों ने हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया। संगठन का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों की मजबूरी के कारण उठाया गया है और इसका उद्देश्य अपनी मांगों को प्रशासन तक मजबूती से पहुंचाना है।
उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर एकता मंच ने जिलाधिकारी से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। मंच का कहना है कि प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 540 महिला एवं पुरुष सफाईकर्मियों के रोजगार और काम पर वापसी से जुड़े मामले में प्रशासन को गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।
संगठन ने विशेष रूप से दलित वाल्मीकि समाज के गरीब सफाईकर्मियों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन से न्याय दिलाने की मांग की है। संगठन के मुताबिक, लंबे समय से काम पर वापसी की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों के परिवारों पर भी इसका असर पड़ रहा है।
फिलहाल, सफाईकर्मियों की हड़ताल के चलते नगर निगम प्रशासन और संगठन के बीच विवाद का समाधान बातचीत के जरिए होने की उम्मीद है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जिलाधिकारी स्तर से मामले में क्या हस्तक्षेप किया जाता है और नगर निगम प्रशासन 540 प्रशिक्षित सफाईकर्मियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है। वहीं, संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

