लखनऊ में राजभवन घेराव जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका, हिरासत में लेकर भेजा इको गार्डन
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को जातिगत जनगणना की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष मनोज यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता राजभवन का घेराव करने के लिए आगे बढ़ रहे थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। पुलिस की कार्रवाई के बाद कार्यकर्ताओं ने मौके पर जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि देश और प्रदेश में पिछड़े वर्ग की वास्तविक सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का आकलन करने के लिए जातिगत जनगणना आवश्यक है। पार्टी नेताओं ने कहा कि जब तक विभिन्न सामाजिक वर्गों की आबादी का वास्तविक आंकड़ा सामने नहीं आएगा, तब तक उनके लिए योजनाएं और प्रतिनिधित्व तय करने में पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं हो सकेगी। इसी मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता राजभवन की ओर बढ़ रहे थे।
राजभवन घेराव के लिए निकले थे कार्यकर्ता
कांग्रेस ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष मनोज यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ता प्रदर्शन के लिए जुटे। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य राजभवन पहुंचकर अपनी मांगों से संबंधित आवाज सरकार तक पहुंचाना था। कार्यकर्ताओं ने जातिगत जनगणना कराने और ओबीसी की वास्तविक संख्या सामने लाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
हालांकि, प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस पहले से सतर्क रही। जैसे ही कांग्रेस कार्यकर्ता राजभवन की ओर आगे बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। इसके बाद मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
हिरासत में लेकर इको गार्डन भेजे गए कार्यकर्ता
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को इको गार्डन भेजा गया। कार्रवाई के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी जारी रखी और सरकार से जातिगत जनगणना कराने की मांग दोहराई।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी राजनीतिक और सामाजिक मांगों को सामने रखने के लिए किया जा रहा था। पार्टी की ओर से ओबीसी समुदाय की वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा सार्वजनिक किए जाने पर जोर दिया गया। साथ ही आबादी के अनुपात में आरक्षण और सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।
आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग
प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न वर्गों की जनसंख्या से संबंधित स्पष्ट आंकड़े सामने आना जरूरी है। कांग्रेस का तर्क है कि जातिगत जनगणना से अलग-अलग सामाजिक वर्गों की वास्तविक संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की बेहतर जानकारी मिल सकेगी।
इसके आधार पर कांग्रेस ओबीसी वर्ग के लिए आबादी के अनुपात में आरक्षण और सरकारी नौकरियों में उचित हिस्सेदारी की मांग कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछड़े वर्ग को उसकी जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
नारेबाजी कर जताया विरोध
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौके पर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने जातिगत जनगणना कराने और ओबीसी वर्ग के अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग उठाई। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को आगे भी प्रमुखता से उठाती रहेगी।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जातिगत जनगणना से संबंधित मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। पार्टी का कहना है कि वास्तविक आंकड़े सामने आने के बाद ही आरक्षण, सरकारी नौकरियों और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में सामाजिक प्रतिनिधित्व की स्थिति का सही आकलन किया जा सकता है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद बढ़ा राजनीतिक मुद्दा
लखनऊ में हुए इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोके जाने और हिरासत में लिए जाने के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया। कांग्रेस ने इसे अपने आंदोलन का हिस्सा बताते हुए जातिगत जनगणना की मांग को दोहराया है। वहीं, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को राजभवन की ओर आगे बढ़ने से रोकते हुए हिरासत में लिया और उन्हें इको गार्डन भेज दिया।
फिलहाल, कांग्रेस की ओर से जातिगत जनगणना को लेकर अपनी मांग को आगे भी उठाने की बात कही जा रही है। पार्टी का कहना है कि ओबीसी वर्ग की वास्तविक आबादी सामने आने के बाद ही उसे आबादी के अनुपात में अधिकार और प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

