बिजनौर में गुलदार से बचाव का अनोखा देसी जुगाड़, ग्रामीणों ने पालतू कुत्तों को पहनाई खास बेल्ट

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रिपोर्ट – ताबिश मिर्जा 

बिजनौर: जिले के चांदपुर थाना क्षेत्र के सेला गांव में इन दिनों गुलदार की लगातार आवाजाही को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। ग्रामीण अपने स्तर पर पालतू जानवरों और विशेष रूप से कुत्तों को संभावित हमले से बचाने के लिए अलग-अलग उपाय कर रहे हैं। इसी क्रम में कुछ ग्रामीणों ने अपने पालतू कुत्तों को विशेष प्रकार की बेल्ट पहनानी शुरू की है। स्थानीय स्तर पर अपनाए जा रहे इस देसी जुगाड़ की चर्चा क्षेत्र में हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव और आसपास के इलाकों में गुलदार की गतिविधियों को देखते हुए पालतू जानवरों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी हो गई है। ऐसे में कुछ लोगों ने कुत्तों के गले में ऐसी बेल्ट लगाई है, जिसे सामान्य बेल्ट की तुलना में अधिक मजबूत और सुरक्षा के लिहाज से उपयोगी माना जा रहा है। हालांकि, यह तरीका स्थानीय स्तर पर अपनाया गया उपाय है और इसे किसी आधिकारिक वन्यजीव सुरक्षा उपकरण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

गुलदार की आवाजाही से ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

सेला गांव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदार की आवाजाही की चर्चा के बाद लोग अपने घरों और पालतू जानवरों को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, रात और सुबह के समय विशेष सावधानी बरती जा रही है। इसके अलावा पालतू कुत्तों को खुले में छोड़ने से भी लोग बच रहे हैं।

दरअसल, ग्रामीण इलाकों में कुत्ते अक्सर घरों और खेतों के आसपास घूमते रहते हैं। ऐसे में गुलदार की मौजूदगी की आशंका के बीच उनके लिए अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी माना जा रहा है। इसी वजह से कुछ ग्रामीणों ने कुत्तों को खास बेल्ट पहनाने का तरीका अपनाया है।

क्या है कुत्तों को पहनाई जा रही खास बेल्ट?

स्थानीय स्तर पर तैयार या इस्तेमाल की जा रही इस बेल्ट को कुत्तों की गर्दन के आसपास लगाया जा रहा है। इसका उद्देश्य संभावित रूप से कुत्ते को किसी जंगली जानवर के हमले से बचाने में मदद करना बताया जा रहा है। ग्रामीण इसे अपने अनुभव और स्थानीय जरूरत के आधार पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

हालांकि, किसी भी प्रकार की बेल्ट या सुरक्षा उपकरण को पूरी तरह सुरक्षित मान लेना उचित नहीं होगा। वन्यजीव विशेषज्ञों की सलाह और वन विभाग के दिशा-निर्देश ऐसे मामलों में अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए ग्रामीणों को केवल स्थानीय जुगाड़ पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित विभाग की सलाह का पालन करना चाहिए।

देसी जुगाड़ की क्षेत्र में हो रही चर्चा

गुलदार से बचाव के लिए ग्रामीणों द्वारा अपनाया गया यह तरीका अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक गुलदार की आवाजाही बनी हुई है, तब तक पालतू जानवरों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी है।

वहीं, कुछ ग्रामीण इस उपाय को अपने स्तर पर सुरक्षा की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। उनका मानना है कि पालतू कुत्तों को घर के आसपास सुरक्षित रखने के लिए हर संभव सावधानी अपनाई जानी चाहिए। हालांकि, इस तरह के उपायों की प्रभावशीलता को लेकर विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी है।

ग्रामीणों को सावधानी बरतने की जरूरत

गुलदार जैसे वन्यजीव सामान्य तौर पर मानव गतिविधियों से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं। फिर भी, जब उनकी आवाजाही आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास दिखाई दे, तो ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर रात के समय अकेले खेतों या सुनसान स्थानों की ओर जाने से बचना बेहतर माना जाता है।

इसके साथ ही ग्रामीणों को पालतू पशुओं को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रखने की कोशिश करनी चाहिए। घर के आसपास पर्याप्त रोशनी रखना और बच्चों को अकेले बाहर न भेजना भी उपयोगी सावधानी हो सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि किसी ग्रामीण को गुलदार दिखाई देता है तो उसके करीब जाने, उसे घेरने या उसका पीछा करने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में संबंधित वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना देना अधिक सुरक्षित तरीका है।

वन विभाग की सलाह को दें प्राथमिकता

ग्रामीणों की ओर से अपनाए जा रहे स्थानीय उपायों के बीच वन विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। गुलदार की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर विभाग की टीम क्षेत्र का निरीक्षण कर सकती है और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वन्यजीवों से जुड़े मामलों में अफवाहों के बजाय प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या सूचना को बिना पुष्टि के आगे साझा करने से बचना भी जरूरी है। इससे अनावश्यक डर या भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

पालतू जानवरों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी सतर्कता

सेला गांव में कुत्तों को विशेष बेल्ट पहनाने का मामला यह दिखाता है कि ग्रामीण अपने पालतू जानवरों की सुरक्षा को लेकर कितने सतर्क हैं। गुलदार की लगातार आवाजाही की चर्चा के बीच ग्रामीण अपने स्तर पर सुरक्षा के उपाय तलाश रहे हैं।

फिलहाल, कुत्तों को खास बेल्ट पहनाने का यह देसी जुगाड़ स्थानीय चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इसकी वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन विशेषज्ञ ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं। ऐसे में ग्रामीणों के लिए जरूरी है कि वे सावधानी बरतने के साथ-साथ वन विभाग और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।