औरैया में पुलिस अधिकारी बनकर साइबर ठगी की कोशिश, FIR के नाम पर मांगे 15 हजार
रिपोर्ट – अंजुमं तिवारी
औरैया। साइबर ठगी के मामलों में जालसाज लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। औरैया जनपद में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां बिजली चोरी के मुकदमे में आरोपी व्यक्ति को फोन कर खुद को पुलिस अधिकारी बताया गया और मुकदमे की कार्रवाई से बचाने के नाम पर 15 हजार रुपये की मांग की गई। इतना ही नहीं, कथित पुलिस अधिकारी ने रकम लेने के लिए व्हाट्सऐप पर QR कोड भी भेज दिया। हालांकि, पीड़ित की सतर्कता और साइबर थाना पुलिस की जांच के चलते ठगी की कोशिश नाकाम हो गई।
पुलिस ने तकनीकी और मैनुअल साक्ष्यों के आधार पर मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे मुकदमों से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाकर उन्हें फोन करते थे और खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पैसे की मांग करते थे।
बिजली चोरी के मुकदमे के बाद आया संदिग्ध फोन
जानकारी के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 को प्रवर्तन दल और विद्युत विभाग की संयुक्त टीम ने थाना कोतवाली औरैया क्षेत्र के ग्राम निगड़ा में बिजली चोरी की जांच की थी। जांच के दौरान ओमकांत पुत्र श्यामबाबू चतुर्वेदी को बिजली चोरी करते हुए पाया गया। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए 21 अगस्त को थाना विद्युत चोरी निरोधक, औरैया में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
मुकदमा दर्ज होने के अगले दिन यानी 22 अगस्त को ओमकांत के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को पुलिस अधिकारी बताते हुए मुकदमे का हवाला दिया। आरोप है कि उसने कार्रवाई से बचाने और मामले को ‘सेट’ कराने के नाम पर 15 हजार रुपये की मांग की।
इस दौरान ठग ने भरोसा कायम करने के लिए एक और तरीका अपनाया। कॉलर की पहचान में ट्रूकॉलर पर दरोगा कृष्णकांत प्रजापति का नाम दिखाई दे रहा था। इससे पीड़ित को कुछ समय के लिए यह भरोसा हुआ कि फोन वास्तव में किसी पुलिस अधिकारी की ओर से किया गया है।
व्हाट्सऐप पर भेजा QR कोड
आरोपी ने सिर्फ फोन पर रुपये मांगने तक ही मामला सीमित नहीं रखा। रकम भेजने के लिए व्हाट्सऐप के माध्यम से QR कोड भी भेजा गया। इससे मामला और अधिक संदिग्ध हो गया। पीड़ित ने बिना भुगतान किए पूरे मामले की जानकारी विद्युत विभाग के अवर अभियंता होरीलाल को दी।
इसके बाद मामले की सूचना साइबर थाना पुलिस को दी गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कॉल करने वाले व्यक्ति और उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर तथा डिजिटल माध्यमों की जांच शुरू की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ मैनुअल स्तर पर भी जानकारी जुटाई।
दो आरोपी गिरफ्तार, तीन मोबाइल फोन बरामद
जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले। इसके बाद मुखबिर की सूचना के आधार पर साइबर थाना पुलिस ने ककोर बंबा से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर थाना क्षेत्र निवासी कृष्णकांत यादव और मोहित यादव के रूप में हुई है। दोनों की उम्र करीब 24 वर्ष बताई गई है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों से साइबर ठगी के इस तरीके से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिली हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। इन मोबाइल फोन की जांच के जरिए पुलिस डिजिटल लेनदेन और संपर्कों से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
मुकदमों से जुड़े लोगों को बनाते थे निशाना
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनका एक अन्य साथी ऑनलाइन माध्यमों से मुकदमों से जुड़े लोगों के नाम, पते और मोबाइल नंबर जुटाकर उन्हें उपलब्ध कराता था। इसके बाद कृष्णकांत और मोहित संबंधित लोगों से संपर्क करते थे।
आरोप है कि दोनों खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों से बातचीत करते और मुकदमे में कार्रवाई रोकने या मामले को निपटाने के नाम पर रुपये की मांग करते थे। इसके बाद रकम QR कोड के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में मंगाने की कोशिश की जाती थी।
इस तरह साइबर ठगों का पूरा नेटवर्क डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए लोगों की व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंचने और उसका इस्तेमाल आर्थिक लाभ के लिए करने की कोशिश करता था। हालांकि, इस मामले में पीड़ित ने समय रहते सतर्कता दिखाई, जिससे ठगी की कोशिश आगे नहीं बढ़ सकी।
साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता जरूरी
यह मामला एक बार फिर बताता है कि साइबर अपराधी सरकारी अधिकारी या पुलिसकर्मी की पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए किसी भी अज्ञात कॉल पर तुरंत विश्वास करने के बजाय संबंधित विभाग या पुलिस कार्यालय से आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।
विशेष रूप से यदि कोई व्यक्ति फोन पर मुकदमा खत्म कराने, कार्रवाई रोकने या किसी कानूनी मामले में राहत देने के बदले पैसे मांगता है, तो बिना सत्यापन के किसी भी खाते में रकम नहीं भेजनी चाहिए। इसी तरह व्हाट्सऐप पर भेजे गए संदिग्ध QR कोड को स्कैन करने से भी बचना चाहिए।
फिलहाल साइबर थाना पुलिस ने मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुकदमे में धारा 3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित लेनदेन की जानकारी जुटाने में लगी है। जांच पूरी होने के बाद मामले में सामने आने वाले अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

