भाजपा प्रत्याशी प्रमोद मिश्रा ने किया नामांकन, शिक्षकों के सम्मान और पुरानी पेंशन की वकालत

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रिपोर्ट- धर्मेंद्र पांडेय

वाराणसी। वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी प्रमोद मिश्रा ने शनिवार को अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए शिक्षकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षकों के मान-सम्मान की रक्षा करना, उनकी समस्याओं को उचित मंच पर उठाना और उनके हितों से जुड़े विषयों को सरकार के सामने रखना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

प्रमोद मिश्रा ने कहा कि शिक्षक समाज शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलता है तो वह शिक्षक हितों से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से संबंधित मंचों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

शिक्षकों के मान-सम्मान की रक्षा का मुद्दा

नामांकन के बाद पत्रकारों से बातचीत में भाजपा प्रत्याशी ने शिक्षकों के मान-सम्मान को लेकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपने कार्य के दौरान सम्मानजनक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं मिलना जरूरी है। उनके अनुसार, शिक्षकों की समस्याओं को केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर संबंधित अधिकारियों और सरकार के सामने उठाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए विद्यार्थियों के भविष्य को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी सेवा शर्तों, अधिकारों और सुविधाओं से जुड़े मामलों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए प्रयास करने की बात कही।

वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों पर जोर

प्रमोद मिश्रा ने वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में काम करने वाले शिक्षकों को बेहतर सुविधाएं और उनके हितों से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए प्रभावी तरीके से आवाज उठाना जरूरी है। इसके लिए वह संबंधित विभागों और सरकार के समक्ष शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं को रखने का प्रयास करेंगे।

उनका कहना है कि शिक्षक हितों से जुड़े मामलों पर संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है। साथ ही, शिक्षकों को उपलब्ध सुविधाओं और उनके अधिकारों से संबंधित विषयों पर भी लगातार चर्चा की जानी चाहिए।

पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की वकालत

नामांकन के बाद प्रमोद मिश्रा ने पुरानी पेंशन व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था शिक्षकों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है और वह इसके लिए अपनी ओर से मजबूती से वकालत करेंगे।

उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था से जुड़े विषय को सरकार के संज्ञान में लाया जाएगा। साथ ही, इस मुद्दे पर शिक्षकों की अपेक्षाओं और उनकी समस्याओं को उचित मंच पर रखने का प्रयास किया जाएगा।

हालांकि, पुरानी पेंशन व्यवस्था को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित सरकार और नीतिगत प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा। ऐसे में प्रमोद मिश्रा ने इस मुद्दे को शिक्षकों के हित से जोड़ते हुए सरकार के समक्ष अपनी बात रखने की बात कही है।

बदले गए प्रावधानों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की बात

भाजपा प्रत्याशी ने शिक्षकों से जुड़े अधिकारों और प्रावधानों में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऐसे मामलों से संबंधित तथ्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

प्रमोद मिश्रा के मुताबिक, संबंधित प्रावधानों के लाभ और संभावित प्रभावों को सामने रखते हुए सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जाएगा। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार संबंधित प्रावधानों पर पुनर्विचार और उनके प्रभावी अमल के लिए प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवस्था में बदलाव के प्रभाव को समझना महत्वपूर्ण होता है। इसलिए शिक्षकों से जुड़े नियमों और प्रावधानों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षकों के हित में आवश्यक विषयों को संबंधित स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा।

शिक्षक समस्याओं को प्राथमिकता से उठाने का दावा

नामांकन दाखिल करने के बाद प्रमोद मिश्रा ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर उठाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को सरकार और संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके समाधान की दिशा में प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने शिक्षकों के मान-सम्मान, वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की सुविधाओं और पुरानी पेंशन व्यवस्था जैसे विषयों को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, शिक्षकों से जुड़े अधिकारों और नियमों में हुए बदलावों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित करने की बात कही।