सपा विधायक हसन रूमी के समर्थकों पर मारपीट का आरोप, कांग्रेस ने मांगी निष्पक्ष जांच
रिपोर्टर – हनुमंत सिंह पिंटू
कानपुर। यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अब्दुल माबूद सिद्दीकी के घर 25 सितंबर को कथित मारपीट के मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस पदाधिकारियों का आरोप है कि घटना के बाद शिकायतकर्ता की ओर से पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कराने और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन बाद में शिकायतकर्ता पक्ष के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज किए जाने से जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
कांग्रेस के अनुसार, घटना कानपुर के बाबूपुरवा थाना क्षेत्र से संबंधित है। यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष अब्दुल माबूद सिद्दीकी की ओर से पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में कथित मारपीट की घटना का उल्लेख करते हुए घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की गई थी। कांग्रेस का कहना है कि इस फुटेज से घटना के दौरान मौजूद लोगों और पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
25 सितंबर की घटना को लेकर उठे सवाल
कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, 25 सितंबर को अब्दुल माबूद सिद्दीकी के घर पर कथित तौर पर मारपीट की घटना हुई। इस मामले में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के छावनी विधायक मोहम्मद हसन रूमी के समर्थकों के नाम भी शिकायत में बताए जाने की बात कही है। इनमें मेराज सिद्दीकी उर्फ चांद पहलवान, नफीस अहमद और जीशान उर्फ गठरी समेत अन्य लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, इन लोगों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। इसलिए मामले में किसी भी व्यक्ति को दोषी मानने से पहले पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शिकायत के बाद मामले की जांच सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए थी। पार्टी ने पुलिस प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को निष्पक्ष तरीके से सामने लाया जाए।
शिकायत के बाद उल्टा मुकदमा दर्ज होने का आरोप
कांग्रेस का दावा है कि अब्दुल माबूद सिद्दीकी ने घटना के बाद बाबूपुरवा थाने में प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बावजूद 27 सितंबर को उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया। कांग्रेस ने इसी बिंदु को लेकर पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
पार्टी नेताओं के मुताबिक, यदि किसी घटना में दोनों पक्षों की ओर से शिकायत या आरोप सामने आते हैं तो पुलिस को सभी शिकायतों की स्वतंत्र जांच करनी चाहिए। साथ ही, उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति निर्धारित की जानी चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि 27 सितंबर को दर्ज मुकदमे की परिस्थितियों की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्राथमिकी दर्ज करने के पीछे उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायतों का क्या आधार था।
पुलिस आयुक्त से भी मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल
मामले को लेकर कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने 29 सितंबर को कानपुर नगर के पुलिस आयुक्त से मुलाकात की थी। कांग्रेस के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग रखी।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि पुलिस आयुक्त की ओर से मामले की जांच का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद कांग्रेस की नजर पुलिस जांच की प्रगति पर बनी हुई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि घटना से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखना आवश्यक है, ताकि जांच के दौरान किसी महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी न हो।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन से घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फुटेज के माध्यम से घटना के समय मौके पर मौजूद लोगों, उनकी गतिविधियों और घटनाक्रम के क्रम की जांच की जा सकती है।
इसके अलावा, कांग्रेस ने शिकायत में नामित लोगों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जांच किसी राजनीतिक दबाव या पक्षपात के बजाय उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए।
किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव न हो
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मामले में किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो संबंधित व्यक्ति को भी कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
इसी तरह, 27 सितंबर को दर्ज मुकदमे की परिस्थितियों की भी निष्पक्ष समीक्षा किए जाने की मांग कांग्रेस ने की है। पार्टी का कहना है कि पुलिस की जांच ऐसी होनी चाहिए जिससे दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जा सके।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल इस पूरे मामले में आरोप और प्रत्यारोप सामने आए हैं। घटना की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए किसी भी पक्ष को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन से जल्द और निष्पक्ष जांच पूरी कर मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है। वहीं, मामले में दर्ज मुकदमे और शिकायतों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और किन लोगों की भूमिका रही।
कानपुर में राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के बीच सामने आए इस विवाद को देखते हुए पुलिस की जांच पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है। अब देखना होगा कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है।

