अमेठी में 2.20 करोड़ के नाले की गुणवत्ता पर सवाल, दरार मिलने पर पैरों से गिराया गया निर्माण

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रिपोर्ट – अंजली मिश्रा

अमेठी। नगर पंचायत अमेठी में करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से कराए जा रहे नाला निर्माण की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बीती रात बनाए गए नाले के एक हिस्से में दरार मिलने के बाद शुक्रवार सुबह नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि और अधिशासी अधिकारी की मौजूदगी में निर्माण को मौके पर ही गिरा दिया गया। नगर पंचायत की ओर से ठेकेदार को संबंधित हिस्से का दोबारा निर्माण कराने का निर्देश दिया गया है। साथ ही निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे जाने की बात कही गई है।

यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय व्यापारियों और लोगों में नाराजगी देखने को मिली। व्यापारियों ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायत किए जाने की बात कही है। वहीं, अब नगर पंचायत प्रशासन द्वारा निर्माण सामग्री की जांच कराने की बात कहे जाने से मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर उम्मीद बढ़ी है।

जलभराव की समस्या दूर करने के लिए कराया जा रहा है नाला निर्माण

अमेठी कस्बे में जलभराव की समस्या लंबे समय से स्थानीय लोगों और व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। इसी समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से दुर्गापुर रोड और सुल्तानपुर रोड पर करीब 2.20 करोड़ रुपये की लागत से नाला निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बारिश और अन्य समय में जल निकासी व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

हालांकि, निर्माण कार्य के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेष रूप से सुल्तानपुर रोड पर जलभराव के बीच निर्माण कार्य कराए जाने को लेकर व्यापारियों ने आपत्ति जताई थी। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष महेश सोनी ने इस संबंध में एसडीएम और जिलाधिकारी से शिकायत किए जाने की बात कही। व्यापारियों का कहना है कि जिस क्षेत्र में पहले से घुटनों तक पानी भरा था, वहां निर्माण कार्य की प्रक्रिया और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था।

रात में बना नाला, सुबह मिली दरार

शुक्रवार सुबह नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि फूलचंद्र कसौधन और नगर पंचायत की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान नवनिर्मित नाले के उस हिस्से का निरीक्षण किया गया, जिसे बीती रात ही तैयार किया गया था। निरीक्षण के दौरान निर्माण में दरार दिखाई दी।

नगर पंचायत टीम की मौजूदगी में दरार वाले हिस्से को पैरों से गिरा दिया गया। इसके बाद संबंधित ठेकेदार को दोबारा निर्माण कराने का निर्देश दिया गया। इस कार्रवाई के बाद मौके पर मौजूद लोगों और व्यापारियों के बीच चर्चा तेज हो गई।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठने लगा कि यदि निर्माण कार्य पूरा होने के तुरंत बाद ही उसमें दरार आ गई तो निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण प्रक्रिया की गुणवत्ता कैसी थी। हालांकि, इन सवालों का अंतिम जवाब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

नाला गिराए जाने की जानकारी पर व्यापारियों में नाराजगी

सुबह करीब 11 बजे नाले के निर्माणाधीन हिस्से को गिराए जाने की जानकारी मिलने के बाद व्यापारी मौके पर पहुंचे। व्यापारियों ने नाराजगी जताते हुए नगर पंचायत में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की मांग की।

व्यापारियों का कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि नाले का निर्माण जलभराव की समस्या के समाधान के लिए किया जा रहा है, इसलिए इसकी मजबूती और निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण बेहद जरूरी है।

हालांकि, नगर पंचायत प्रशासन की ओर से अभी भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है। प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल निर्माण में दरार मिलने और सामग्री की जांच कराने की बात कही गई है।

निर्माण सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे

नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी शिवमूर्ति ने बताया कि मामले की जानकारी अवर अभियंता को दे दी गई है। सुबह निरीक्षण के दौरान नाले में दरार मिली थी, जिसके बाद संबंधित हिस्से को गिराया गया।

उन्होंने बताया कि निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच में निर्धारित मानकों के विपरीत निर्माण सामग्री या तकनीकी खामी सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

2.20 करोड़ की परियोजना पर निगरानी जरूरी

अमेठी में करीब 2.20 करोड़ रुपये की लागत वाली नाला परियोजना को स्थानीय जल निकासी व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं। नाला निर्माण का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब वह लंबे समय तक टिकाऊ रहे और बारिश के दौरान पानी की निकासी सुचारु रूप से हो सके।

फिलहाल नगर पंचायत प्रशासन ने निर्माण सामग्री के नमूने जांच कराने की बात कही है। इसलिए इस मामले में जांच रिपोर्ट अहम होगी। जांच से यह पता चल सकेगा कि नाले में दरार निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया, तकनीकी मानकों या किसी अन्य कारण से आई।

वहीं, स्थानीय व्यापारी और नागरिक इस मामले में पारदर्शी जांच और गुणवत्तापूर्ण निर्माण की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें जांच रिपोर्ट और नगर पंचायत प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

 

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