UPI MDR के नए नियमों से उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों को राहत, जानिए क्या बदलेगा

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रिपोर्ट – विवेक कृष्णा दीक्षित

नई दिल्ली। UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस आज देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में UPI पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के चीफ ऑफ प्रोडक्ट एंड मार्केटिंग कुणाल कलावतिया ने प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

कलावतिया के मुताबिक, प्रस्तावित UPI MDR व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल भुगतान के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करना है। साथ ही इसका ध्यान इस बात पर भी है कि आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा।

₹2,000 से अधिक के पात्र व्यापारिक भुगतान पर MDR

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, MDR केवल ₹2,000 से अधिक के पात्र व्यापारिक लेनदेन पर लागू होगा। ऐसे लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा ₹300 निर्धारित की जाएगी।

इसका मतलब यह है कि UPI से भुगतान करने वाले सामान्य ग्राहक को अपनी जेब से अलग से MDR का भुगतान नहीं करना होगा। MDR की व्यवस्था व्यापारिक लेनदेन से संबंधित होगी। इसलिए ग्राहकों के लिए रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान की सुविधा पहले की तरह बनी रहने की बात कही गई है।

₹2,000 की सीमा को लेकर क्या है नियम?

UPI MDR को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल ₹2,000 की सीमा से जुड़ा है। इस संबंध में कुणाल कलावतिया ने स्पष्ट किया कि ₹2,000 की सीमा किसी व्यापारी को एक दिन में मिलने वाले कुल UPI भुगतान पर लागू नहीं होगी।

बल्कि यह सीमा प्रत्येक पात्र व्यापारी लेनदेन के आधार पर निर्धारित होगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी ग्राहक ने किसी दुकान पर ₹1,500 का भुगतान किया और दूसरे ग्राहक ने अलग से ₹1,800 का भुगतान किया, तो इन दोनों लेनदेन पर प्रस्तावित MDR लागू नहीं होगा। यानी ₹2,000 से कम के अलग-अलग पात्र लेनदेन पर MDR नहीं लगेगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतान को सुगम बनाए रखना है, ताकि रोजमर्रा की खरीदारी में UPI का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों और छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त लागत का दबाव न आए।

छोटे कारोबारियों के लिए भी राहत

छोटे कारोबारियों को लेकर भी NPCI की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया गया है। कलावतिया के अनुसार, जो व्यापारी अपने बैंक खाते में हर महीने UPI के जरिए ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, उन्हें MDR नहीं देना होगा।

इस प्रावधान से स्थानीय बाजारों में कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और अन्य छोटे व्यापारियों को राहत मिलने की बात कही गई है। ऐसे कारोबारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करना जारी रख सकेंगे और इसके लिए उन्हें अतिरिक्त MDR लागत नहीं उठानी होगी।

दरअसल, छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान केवल सुविधा का माध्यम नहीं बल्कि ग्राहकों को भुगतान के अधिक विकल्प देने का जरिया भी बन चुका है। इसलिए MDR से जुड़े नियमों में छोटे कारोबारियों को अलग राहत देना डिजिटल भुगतान के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिक्षा, रेलवे और अन्य क्षेत्रों के लिए तय शुल्क

प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग MDR प्रावधान बताया गया है। शिक्षा, रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर प्रति लेनदेन ₹5 का तय MDR लागू होने की बात कही गई है।

इससे संबंधित कारोबारियों और संस्थानों को प्रत्येक लेनदेन पर संभावित लागत का अनुमान लगाने में आसानी हो सकती है। प्रतिशत आधारित शुल्क के बजाय तय शुल्क होने से भुगतान प्रक्रिया से जुड़े खर्च को अधिक स्पष्ट तरीके से समझा जा सकेगा।

हालांकि, इन प्रावधानों का वास्तविक प्रभाव संबंधित नियमों और उनके अंतिम कार्यान्वयन पर निर्भर करेगा। इसलिए कारोबारियों और ग्राहकों के लिए अंतिम दिशा-निर्देशों पर नजर रखना जरूरी होगा।

MDR से बनेगा डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर फंड

NPCI के अनुसार, MDR से प्राप्त राशि के इस्तेमाल को लेकर भी एक विशेष व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके तहत MDR से मिलने वाली राशि से एक अलग फंड बनाया जाएगा। इस फंड का उपयोग विशेष रूप से छोटे शहरों और कस्बों में डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

इसके अलावा छोटे कारोबारियों के बीच UPI की सुविधा को बढ़ावा देने और डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे उन क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान का विस्तार किया जा सकता है, जहां अभी भी नकद भुगतान का इस्तेमाल अधिक होता है।

UPI उपयोगकर्ताओं पर क्या होगा असर?

प्रस्तावित व्यवस्था को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहने की बात कही गई है। यानी ग्राहक किसी दुकान, सेवा प्रदाता या अन्य पात्र व्यापारी को UPI के माध्यम से भुगतान करते समय अलग से MDR नहीं देगा।

वहीं, छोटे कारोबारियों के लिए ₹1 लाख मासिक UPI प्राप्ति तक MDR से छूट का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा ₹2,000 से कम के अलग-अलग पात्र लेनदेन पर MDR नहीं लगाए जाने की बात कही गई है।

इस प्रकार प्रस्तावित व्यवस्था का फोकस एक ओर UPI के इस्तेमाल को जारी रखने और दूसरी ओर डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर दिखाई देता है।

डिजिटल भुगतान के विस्तार पर जोर

पिछले कुछ वर्षों में UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक, अलग-अलग स्तर पर UPI का इस्तेमाल बढ़ा है। ऐसे में भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश भी जरूरी है।

NPCI की ओर से बताई गई प्रस्तावित MDR व्यवस्था इसी दिशा में एक कदम के तौर पर सामने आई है। हालांकि, ग्राहकों और कारोबारियों पर वास्तविक प्रभाव अंतिम नियमों, पात्र लेनदेन की श्रेणी और कार्यान्वयन की शर्तों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल NPCI की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित व्यवस्था में आम UPI उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाने पर जोर दिया गया है। साथ ही MDR से प्राप्त राशि का इस्तेमाल डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किए जाने की बात कही गई है।

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