श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण को लेकर महेंद्र प्रताप सिंह की पंडित प्रदीप मिश्रा से मुलाकात

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रिपोर्ट: योगेश भारद्वाज

मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एवं हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने गुरुवार को कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा से विशेष मुलाकात की। इस दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े न्यायालयीन मामलों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और मूल गर्भगृह स्थल से संबंधित दावों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने और आंदोलन में हरसंभव सहयोग देने की बात कही।

करीब 30 मिनट चली इस मुलाकात के दौरान महेंद्र प्रताप सिंह ने पंडित प्रदीप मिश्रा का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इसके साथ ही उन्हें भगवान राधा-कृष्ण की छवि और श्रीमद्भगवद्गीता भेंट की गई। बातचीत में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के इतिहास, मूल गर्भगृह स्थल और न्यायालय में विचाराधीन वादों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े दावों की दी जानकारी

महेंद्र प्रताप सिंह ने पंडित प्रदीप मिश्रा को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास की ओर से चलाए जा रहे न्यायालयीन प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने हिंदू पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए जा रहे ऐतिहासिक दावों और दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर का इतिहास विभिन्न कालखंडों से जुड़ा हुआ है।

उनके अनुसार, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को अलग-अलग समय में क्षति पहुंचाए जाने का उल्लेख ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है। उन्होंने विशेष रूप से वर्ष 1670 में औरंगजेब के शासनकाल से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया और दावा किया कि इसी दौरान मंदिर को क्षति पहुंचाई गई तथा मूल गर्भगृह स्थल पर ईदगाह का निर्माण कराया गया।

महेंद्र प्रताप सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण के विग्रहों से जुड़े दावे का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस समय विग्रहों को आगरा ले जाया गया और उन्हें जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगाए जाने की बात ऐतिहासिक संदर्भों में सामने आती है। हालांकि, ये सभी दावे संबंधित पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं और इनसे जुड़े विभिन्न पहलू न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

न्यायालय में विचाराधीन हैं मामले

महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण और आगरा से भगवान के विग्रहों को वापस लाने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में दो वाद दायर किए गए हैं। इन मुकदमों की तैयारी के लिए देश-विदेश की विभिन्न लाइब्रेरियों और स्रोतों से ऐतिहासिक दस्तावेज, पुस्तकें तथा अन्य प्रमाण जुटाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि न्यायालयीन प्रक्रिया के साथ-साथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय को जनसमर्थन के माध्यम से भी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा। उनके मुताबिक, आंदोलन का उद्देश्य संबंधित ऐतिहासिक और कानूनी विषयों को समाज के सामने रखना तथा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने सहयोग का दिया आश्वासन

मुलाकात के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि यदि भगवान श्रीकृष्ण के मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण होना है तो इसके लिए प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री शिव बाबा के आशीर्वाद से मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने की कामना है।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने महेंद्र प्रताप सिंह को आंदोलन में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के बैनर तले जनसमर्थन जुटाने के लिए कोई बड़ा आयोजन किया जाता है और उनके पास समय उपलब्ध हुआ तो वह उसमें शामिल होने का प्रयास करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि सनातन परंपरा और धार्मिक विषयों से जुड़े संदेशों को कथाओं के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय को भी श्रद्धालुओं और भक्तों के सामने रखने की बात उन्होंने कही, ताकि इस विषय की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

ऐतिहासिक साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर जोर

इस मुलाकात का एक महत्वपूर्ण पहलू श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर हुई चर्चा रही। महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुकदमों की तैयारी के दौरान विभिन्न ऐतिहासिक पुस्तकों और दस्तावेजों का अध्ययन किया गया है। वहीं, संबंधित मामलों में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों और दावों का परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होना है।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित विषय को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि न्यायालयीन प्रक्रिया के साथ जनजागरूकता भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मुंबई से आए अतिथि भी रहे मौजूद

इस विशेष मुलाकात के अवसर पर मुंबई से आए फिल्म निर्देशक विजय पाल सिंह के अलावा मनोज राजावत, मनोज चौधरी और भगत सिंह भी मौजूद रहे। सभी ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय पर हुई चर्चा में भाग लिया।

इस मुलाकात के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास की ओर से कहा गया कि न्यायालय में चल रही प्रक्रिया के साथ-साथ ऐतिहासिक दस्तावेजों और जनजागरूकता के माध्यम से विषय को आगे रखा जाएगा। वहीं, पंडित प्रदीप मिश्रा के सहयोग के आश्वासन से न्यास ने भविष्य में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने की संभावना भी जताई है।

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