सोनभद्र में वज्रपात से बचाव के लिए बनेगा सुरक्षा कवच, संवेदनशील गांवों में लगेंगे ताड़-खजूर के 100 पौधे

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रिपोर्टर- ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी

सोनभद्र। जिले में आकाशीय बिजली यानी वज्रपात के जोखिम को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत वज्रपात की दृष्टि से संवेदनशील ग्राम पंचायतों में ताड़ और खजूर प्रजाति के पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण कराया जाएगा। प्रशासन ने प्रत्येक चयनित ग्राम पंचायत में कम से कम 100 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने संबंधित अधिकारियों को अभियान को प्राथमिकता के साथ पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन के मुताबिक यह पहल शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में शुरू की गई है। इसका उद्देश्य उन ग्रामीण क्षेत्रों में वज्रपात के जोखिम को कम करना है, जहां आकाशीय बिजली की घटनाओं की आशंका अधिक रहती है। इसके लिए सेंसिंग सेंटर (NRSC) के विश्लेषण के आधार पर चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों को आधार बनाया गया है। सोनभद्र की चिन्हित ग्राम पंचायतों में भी इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी की जा रही है।

संवेदनशील गांवों में होगा पौधरोपण

वज्रपात से प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से ऐसे स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां पौधरोपण के माध्यम से निर्धारित अभियान को आगे बढ़ाया जा सके। चयनित ग्राम पंचायतों में न्यूनतम 100 पौधों का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर आवश्यक तैयारियां पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेष रूप से खेतों की मेड़ों, फार्म की मेड़ों और अन्य उपयुक्त स्थानों को पौधरोपण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य इस अभियान को केवल पौधे लगाने तक सीमित रखने के बजाय उनकी सुरक्षा और देखभाल की भी समुचित व्यवस्था करना है।

खेतों की मेड़ों पर विकसित होगा हरित सुरक्षा क्षेत्र

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि वीबी जी राम जी योजना के अनुमन्य प्रावधानों के तहत उपयुक्त स्थानों पर पाम यानी ताड़ और खजूर की प्रजातियों का रोपण कराया जाए। इससे एक ओर अभियान के निर्धारित लक्ष्य को पूरा किया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में हरित आवरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

पौधों की उपलब्धता को लेकर जिला उद्यान अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने ‘बरही’ और ‘सोना-100’ प्रजाति के पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है। संबंधित अधिकारियों को पौधरोपण के लिए स्थानों का चयन करते समय स्थानीय परिस्थितियों का भी ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पौधरोपण के साथ संरक्षण पर भी रहेगा जोर

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभियान की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं मानी जाएगी। इसके बाद पौधों के संरक्षण, सिंचाई और देखभाल की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। ग्राम पंचायत स्तर पर स्थल चयन से लेकर गड्ढों की खुदाई, पौधरोपण और सुरक्षा तक की जिम्मेदारी व्यवस्थित तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा रोपण के बाद पौधों को नियमित पानी उपलब्ध कराने और उनकी देखभाल की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि लगाए गए पौधों की निगरानी लगातार होती रहे और उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएं।

बीडीओ और कार्यक्रम अधिकारी करेंगे निगरानी

अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारियों और कार्यक्रम अधिकारियों को दी गई है। दोनों स्तर के अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान की प्रगति पर नजर रखेंगे। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित समयसीमा के भीतर पौधरोपण का लक्ष्य पूरा हो।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने को कहा गया है। प्रशासन की कोशिश है कि संवेदनशील ग्राम पंचायतों में अभियान को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए और पौधरोपण के बाद उनकी देखभाल भी सुनिश्चित हो।

वज्रपात के जोखिम को कम करने की दिशा में पहल

सोनभद्र जैसे ग्रामीण और कृषि आधारित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग खेतों और खुले स्थानों में काम करते हैं। ऐसे में वज्रपात के जोखिम को कम करने के लिए प्रशासन की ओर से जागरूकता और सुरक्षा उपायों के साथ-साथ यह पौधरोपण अभियान भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य केवल वज्रपात के जोखिम वाले क्षेत्रों में निर्धारित पौधों का रोपण करना ही नहीं है, बल्कि इसके साथ ग्रामीण क्षेत्रों में हरित आवरण को बढ़ाना भी है। खेतों की मेड़ों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर पौधे लगाए जाने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इस प्रकार सोनभद्र में वज्रपात संवेदनशील ग्राम पंचायतों के लिए शुरू किया जा रहा यह अभियान सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण, दोनों उद्देश्यों को साथ लेकर आगे बढ़ाया जा रहा है। अब अभियान की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्धारित संख्या में पौधों के रोपण के साथ उनके संरक्षण और नियमित देखभाल की व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू की जाती है।

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