कानपुर आरटीओ में वाहन ट्रांसफर के नाम पर विवाद, बिचौलिए पर मारपीट का आरोप
रिपोर्ट – हरि शंकर शर्मा
कानपुर। आरटीओ परिसर में सोमवार को वाहन ट्रांसफर कराने पहुंची एक महिला और उसके भाई के साथ एक बिचौलिए द्वारा कथित तौर पर मारपीट किए जाने का मामला सामने आया। वाहन ट्रांसफर में देरी के बाद महिला ने बिचौलिए से अपने दस्तावेज और दिए गए रुपये वापस मांगे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। घटना के बाद आरटीओ परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
मामले की जानकारी मिलते ही आरटीओ प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। अधिकारियों ने महिला और उसके भाई की बात सुनी तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई। जांच के दौरान वाहन पर चालान बकाया होने और प्रदूषण प्रमाणपत्र यानी पीयूसी लंबित होने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों ने महिला को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने की जानकारी दी और इसके बाद वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराने के निर्देश दिए।
दो महीने से अटका था वाहन ट्रांसफर का काम
कानपुर देहात के बनी गांव की रहने वाली अंकिता तिवारी के मुताबिक, उन्होंने करीब दो महीने पहले अपने वाहन के ट्रांसफर का काम कराने के लिए राजेश नाम के एक बिचौलिए को जरूरी कागजात और पैसे दिए थे। उनका कहना है कि काफी समय बीतने के बावजूद वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
काम में लगातार देरी होने पर अंकिता अपने भाई अमित तिवारी के साथ आरटीओ कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने बिचौलिए से वाहन से संबंधित दस्तावेज और दिए गए रुपये वापस मांगे। आरोप है कि इस दौरान बिचौलिए ने स्पष्ट जवाब देने के बजाय टालमटोल शुरू कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी बढ़ गई और मामला विवाद में बदल गया।
इसी बीच कथित तौर पर मारपीट शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ती देखकर कार्यालय की एक महिला कर्मचारी बीच-बचाव करने पहुंचीं। बताया गया कि इस दौरान बिचौलिए की महिला कर्मचारी से भी तीखी बहस हुई। मामले की सूचना अधिकारियों तक पहुंचते ही उन्होंने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
अधिकारियों ने तत्काल संभाला मामला
हंगामे की सूचना मिलने के बाद आरटीओ प्रशासन राकेन्द्र कुमार सिंह और एआरटीओ प्रशासन कहकशां खातून मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने महिला और उसके भाई को शांत कराया तथा पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और फाइल की जांच कराई गई।
दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि संबंधित वाहन पर चालान बकाया था। इसके अलावा वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र भी लंबित था। इन औपचारिकताओं के पूरा नहीं होने के कारण वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।
अधिकारियों ने महिला को बताया कि पहले बकाया चालान का भुगतान करना होगा और इसके बाद नया प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाना होगा। आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश संबंधित कर्मचारी को दिए गए।
इस तरह अधिकारियों की तत्काल कार्रवाई के बाद महिला को वाहन ट्रांसफर में आ रही तकनीकी और दस्तावेजी समस्या की जानकारी भी मिल गई। साथ ही, विवाद की स्थिति को भी मौके पर नियंत्रित कर लिया गया।
आरटीओ परिसर में दलालों पर बढ़ी निगरानी
आरटीओ परिसर में बिचौलियों की गतिविधियों को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क है। जानकारी के अनुसार, 24 अगस्त को आरटीओ प्रशासन की ओर से परिसर में छापेमारी की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद दलालों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही अधिकारी समय-समय पर अचानक निरीक्षण भी कर रहे हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि वाहन संबंधी कार्य कराने के लिए आने वाले लोगों को अनावश्यक रूप से बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े और वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना काम स्वयं करा सकें।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आरटीओ परिसर में आम लोगों के साथ धोखाधड़ी, अभद्रता या किसी तरह का विवाद करने वाले बिचौलियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे वाहन ट्रांसफर, पंजीकरण, लाइसेंस या अन्य कार्यों के लिए निर्धारित सरकारी प्रक्रिया का पालन करें।
लोगों को दस्तावेज और प्रक्रिया की जानकारी रखना जरूरी
वाहन ट्रांसफर जैसे कार्यों में कई जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। इसलिए वाहन मालिकों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने वाहन से संबंधित चालान, प्रदूषण प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की स्थिति पहले से जांच लें। इससे प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से बचा जा सकता है।
साथ ही, किसी व्यक्ति या बिचौलिए को दस्तावेज और पैसे सौंपने से पहले उसकी भूमिका और प्रक्रिया की जानकारी लेना भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी काम में देरी हो रही है या दस्तावेज वापस नहीं किए जा रहे हैं, तो संबंधित कार्यालय के अधिकारियों से सीधे संपर्क किया जा सकता है।
कानपुर आरटीओ में सामने आया यह मामला एक बार फिर बताता है कि वाहन संबंधी कार्यों में दस्तावेजों की स्थिति और सरकारी प्रक्रिया की जानकारी होना जरूरी है। वहीं, आरटीओ प्रशासन की ओर से परिसर में निगरानी बढ़ाए जाने से आम लोगों के लिए सीधे कार्यालयी प्रक्रिया के माध्यम से काम कराने पर जोर दिया जा रहा है।

