जौनपुर में 25 हजार के इनामी पूर्व थानाध्यक्ष ने कोर्ट में किया सरेंडर, जमानत खारिज होने पर जेल भेजे गए
रिपोर्ट – विवेक कुमार
जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में युवक को कथित तौर पर बंधक बनाकर जबरन वसूली और लूट के मामले में फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी पूर्व थानाध्यक्ष दिब्य प्रकाश सिंह ने आखिरकार पुलिस के सामने पेश होने के बजाय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। सुरेरी थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष दिब्य प्रकाश सिंह ने सोमवार को दीवानी न्यायालय पहुंचकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट तृतीय में सरेंडर किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
यह मामला जलालपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। युवक को कथित तौर पर बंधक बनाकर जबरन वसूली और लूट किए जाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान सुरेरी के तत्कालीन थानाध्यक्ष दिब्य प्रकाश सिंह का नाम भी मामले में सामने आया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक की ओर से उनकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
करीब एक सप्ताह से फरार चल रहे थे पूर्व थानाध्यक्ष
पुलिस की ओर से इनाम घोषित किए जाने के बाद दिब्य प्रकाश सिंह करीब एक सप्ताह से फरार बताए जा रहे थे। उनकी तलाश में पुलिस की अलग-अलग टीमें लगाई गई थीं। इस दौरान पुलिस की ओर से संभावित ठिकानों पर तलाश और निगरानी की जा रही थी।
हालांकि, सोमवार को घटनाक्रम में उस समय बदलाव आया जब पूर्व थानाध्यक्ष अपने अधिवक्ता के माध्यम से दीवानी न्यायालय पहुंच गए। उन्होंने सीजेएम कोर्ट तृतीय में स्वयं को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करते हुए आत्मसमर्पण किया।
इससे पहले पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही थी। ऐसे में अदालत में सरेंडर किए जाने के बाद पुलिस की ओर से चल रही तलाश समाप्त हुई और अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया न्यायालय के आदेश के अनुसार आगे बढ़ेगी।
अदालत ने जमानत याचिका की खारिज
पूर्व थानाध्यक्ष के अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद मामले की सुनवाई हुई। उनकी ओर से अधिवक्ता ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए दिब्य प्रकाश सिंह को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। इस तरह 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी के रूप में तलाशे जा रहे पूर्व थानाध्यक्ष की गिरफ्तारी की प्रक्रिया अदालत में आत्मसमर्पण के जरिए पूरी हुई।
अदालत की ओर से जमानत खारिज किए जाने के बाद अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों और जांच की स्थिति के आधार पर होगी।
अन्य आरोपियों पर भी हो चुकी है कार्रवाई
इस मामले में पूर्व थानाध्यक्ष के अलावा अन्य लोगों के भी शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस की ओर से मामले में शामिल अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। कुछ आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं।
वहीं, पूर्व थानाध्यक्ष के जेल जाने के बाद अब जांच एजेंसी के सामने मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल जारी रखने की चुनौती होगी। पुलिस यह भी देखेगी कि मामले में दर्ज आरोपों और सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे किन लोगों की भूमिका की जांच की जानी है।
अधिवक्ता ने अदालत में रखा पक्ष
पूर्व थानाध्यक्ष की ओर से अदालत में अधिवक्ता शुभम सिंह ने पक्ष रखा। अदालत में आत्मसमर्पण और जमानत से संबंधित प्रक्रिया उनके माध्यम से पूरी की गई। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।
गौरतलब है कि किसी आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना या पुलिस की ओर से इनाम घोषित किया जाना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। इस मामले में भी पूर्व थानाध्यक्ष के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
पुलिस की तलाश के बीच कोर्ट में पहुंचकर किया सरेंडर
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि पुलिस की तलाश के बीच 25 हजार रुपये के इनामी पूर्व थानाध्यक्ष ने पुलिस के समक्ष गिरफ्तारी देने के बजाय अदालत में आत्मसमर्पण का रास्ता चुना। सोमवार को वह अधिवक्ता के साथ न्यायालय पहुंचे और सीजेएम कोर्ट तृतीय के समक्ष प्रस्तुत हुए।
इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया और न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब पुलिस और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।
पुलिस की आगे की कार्रवाई पर रहेगी नजर
पूर्व थानाध्यक्ष के जेल जाने के बाद अब इस मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों, अन्य आरोपियों की भूमिका और मामले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, एक इनामी आरोपी के पुलिस की गिरफ्त में आने के बजाय अदालत में आत्मसमर्पण करने के घटनाक्रम पर पुलिस की तलाश और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
कुल मिलाकर, जौनपुर के जलालपुर क्षेत्र से जुड़े इस मामले में 25 हजार रुपये के इनामी पूर्व थानाध्यक्ष दिब्य प्रकाश सिंह ने अदालत में आत्मसमर्पण किया है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अब मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ आरोपों से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।

