बांदा में कांग्रेस का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंका, 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने का आरोप
रिपोर्ट – पंकज त्रिपाठी
बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर के अशोक लाट चौराहे पर पहुंचकर नारेबाजी की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक भी हुई।
कांग्रेस का यह प्रदर्शन प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर आयोजित किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने किया। पार्टी की ओर से SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि देशभर में 13 करोड़ से अधिक नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
भगत सिंह की जयंती से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
प्रदर्शन से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कार्यालय में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती मनाई। इसके बाद कार्यकर्ता प्रदर्शन के लिए अशोक लाट की ओर रवाना हुए। वहां बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता जुटे।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए इसमें किसी भी प्रकार का संशोधन पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
गौरतलब है कि SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, इन नामों को हटाने का अर्थ यह नहीं है कि सभी हटाए गए लोग पात्र मतदाता थे। चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया में सत्यापन, दावे-आपत्तियां और अपील के प्रावधान बताए गए हैं।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में हो रहे बदलावों की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है और इसका राजनीतिक लाभ भाजपा को पहुंच सकता है।
हालांकि, ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया को अपने संवैधानिक और कानूनी दायित्वों के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने की कवायद बताया है। सरकार की ओर से भी कहा गया है कि पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटने से रोकने के लिए कई स्तरों पर जांच और दावे-आपत्तियों की व्यवस्था मौजूद है।
अशोक लाट पर पुलिस से हुई नोकझोंक
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता अशोक लाट पर मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला लेकर पहुंचे। पुतला दहन को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक हुई। इसके बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध जारी रखा और पुतला दहन किया।
कार्यकर्ताओं ने इस दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े किसी भी मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पार्टी ने मतदाता सूची में नामों की जांच और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
जिलाध्यक्ष ने की जांच और इस्तीफे की मांग
पुतला दहन के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा लेने की मांग भी उठाई।
इसके साथ ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस मामले में जांच एजेंसी के माध्यम से जांच कराए जाने और दोषियों को दंडित किए जाने की मांग रखी।
वहीं, निर्वाचन आयोग की आधिकारिक व्यवस्था के मुताबिक मतदाता अपने नाम की स्थिति की जांच कर सकते हैं और SIR से संबंधित प्रक्रियाओं के लिए ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। आयोग के नागरिक पोर्टल पर नाम खोजने, दस्तावेज जमा करने और मतदाता सूची में नाम जोड़ने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
कांग्रेस के इस प्रदर्शन में एआईसीसी सदस्य रमेश कोरी, महिला जिलाध्यक्ष सीमा खान, शहर अध्यक्ष अफसाना शाह, युवा जिलाध्यक्ष आदित्य सिंह और पूर्व चेयरमैन संजय गुप्ता समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटना गंभीर विषय है। इसलिए नामों के सत्यापन और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। पार्टी ने आगे भी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाने की बात कही।
SIR को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक बहस तेज है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल जहां बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग प्रक्रिया को मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की कवायद बता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट भी SIR से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर चुका है। मई 2026 में अदालत ने SIR की कानूनी वैधता पर विचार करते हुए चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट किया था। साथ ही मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और नागरिकता निर्धारण के बीच अंतर को भी रेखांकित किया गया था।
ऐसे में बांदा में कांग्रेस का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में SIR और मतदाता सूची को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का स्थानीय स्वरूप माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वे अपनी मतदाता सूची में नाम की स्थिति की जांच करें और आवश्यकता होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज कराएं।

