मेरठ में बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में शैंकी वर्मा ने PM मोदी को लिखा रक्त-पत्र, पढ़िए क्या रखी मांग?
रिपोर्ट – मनीष पाराशर
मेरठ: शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की जयंती के अवसर पर मेरठ में चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई को लेकर विरोध का एक अलग तरीका सामने आया। सपा नेता एवं व्यापारी नेता शैंकी वर्मा ने अपने रक्त से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मेरठ के प्रभावित लोगों के लिए राहत और समाधान की मांग की। उन्होंने पत्र के माध्यम से केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने तथा प्रभावित परिवारों और कारोबारियों के लिए संवैधानिक एवं कानूनी दायरे में राहत का रास्ता तलाशने की अपील की।
यह मामला मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण और सेटबैक से जुड़े विवाद से संबंधित है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों के बाद आवास एवं विकास परिषद और संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की गई है। सितंबर 2026 में सेंट्रल मार्केट प्रकरण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में चिह्नित 16,726 अनधिकृत संपत्तियों को सील करने का निर्देश भी दिया।
भगत सिंह की जयंती पर अलग तरीके से जताया विरोध
शैंकी वर्मा ने वीडियो जारी कर कहा कि उन्होंने भगत सिंह की जयंती पर अपने रक्त से प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य मेरठ में चल रही कार्रवाई से प्रभावित लोगों की परेशानी को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि वह मेरठ निवासी होने के नाते प्रधानमंत्री से अपील कर रहे हैं कि शहर के लोगों के सामने पैदा हुई स्थिति पर ध्यान दिया जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे कानून और न्यायालय के आदेशों का सम्मान भी बना रहे तथा प्रभावित लोगों को राहत भी मिल सके।
शैंकी वर्मा ने अपने बयान में भगत सिंह के स्वतंत्रता आंदोलन में दिए गए योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने तरीके से अपनी बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
क्या है मेरठ सेंट्रल मार्केट का मामला?
मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट का विवाद लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। मामला मुख्य रूप से आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग और भवनों में निर्धारित सेटबैक क्षेत्र में किए गए निर्माण से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2026 में शास्त्रीनगर क्षेत्र की 859 संपत्तियों में अनधिकृत सेटबैक निर्माण को हटाने का निर्देश दिया था। अदालत ने संबंधित संपत्ति मालिकों को पहले स्वयं अवैध निर्माण हटाने के लिए समय देने और उसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई करने की बात कही थी।
इसके बाद जुलाई में अदालत ने सेंट्रल मार्केट की 44 सील संपत्तियों में सेटबैक के स्थान पर किए गए अनधिकृत निर्माण को हटाने के आदेश दिए। अधिकारियों को कार्रवाई से पहले संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस देने और निर्धारित समय देने के निर्देश भी दिए गए थे।
छह भवनों पर हुई कार्रवाई
सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन के तहत सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में कार्रवाई भी हुई। रिपोर्टों के अनुसार, 16 सितंबर को 44 विवादित संपत्तियों में से छह भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी रही और व्यापारियों की ओर से विरोध भी सामने आया।
इसके बाद प्रभावित कारोबारियों और स्थानीय लोगों की ओर से अपने भविष्य और कारोबार को लेकर चिंता व्यक्त की गई। इसी पृष्ठभूमि में शैंकी वर्मा ने रक्त से पत्र लिखकर प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
पत्र में पुनर्वास और राहत की मांग
शैंकी वर्मा के अनुसार, प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में मेरठ को केवल एक शहर के रूप में नहीं बल्कि लाखों लोगों के घर, व्यवसाय और जीवन से जुड़े स्थान के तौर पर देखने की अपील की गई है।
उन्होंने मांग रखी कि न्यायालय के आदेशों और कानून का सम्मान करते हुए प्रभावित व्यापारियों और परिवारों के लिए कोई ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे उन्हें उचित राहत या पुनर्वास का अवसर मिल सके। उनका कहना है कि प्रभावित लोगों की समस्याओं को भी समाधान की प्रक्रिया में ध्यान में रखा जाना चाहिए।
यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब सेंट्रल मार्केट मामले में न्यायिक आदेशों के आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ रही है। इसलिए प्रभावित पक्षों की ओर से राहत और पुनर्वास की मांग भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनी हुई है।
शैंकी वर्मा ने क्या कहा?
व्यापारी नेता शैंकी वर्मा ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि मेरठ के लोगों के बीच कार्रवाई को लेकर चिंता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि पूरे मामले में ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे शहर के लोगों को राहत मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा रक्त से पत्र लिखना किसी राजनीतिक प्रदर्शन के बजाय अपनी बात को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने का माध्यम है। उनके अनुसार, मेरठ के आम नागरिकों की समस्याओं को केंद्र तक पहुंचाना उनका उद्देश्य है।
हालांकि, मेरठ सेंट्रल मार्केट से जुड़ी कार्रवाई न्यायालय के आदेशों के संदर्भ में हो रही है। इसलिए किसी भी राहत या वैकल्पिक व्यवस्था पर अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक आदेशों और सक्षम प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप ही तय होगी।
कानून और प्रभावित लोगों के बीच समाधान की मांग
सेंट्रल मार्केट मामले में एक तरफ न्यायालय ने अनधिकृत निर्माण और निर्धारित नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित कारोबारी और परिवार राहत की मांग उठा रहे हैं। ऐसे में पुनर्वास, वैकल्पिक व्यवस्था और प्रभावित लोगों की समस्याओं पर विचार की मांग भी सामने आती रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में मेरठ की अनधिकृत संपत्तियों से जुड़े मामले में कार्रवाई जारी रखने और संबंधित क्षेत्रों की स्थिति पर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
इसी पृष्ठभूमि में शैंकी वर्मा का रक्त से लिखा पत्र मेरठ के स्थानीय मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ले आया है। फिलहाल उनकी ओर से प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप, प्रभावित लोगों के लिए राहत और कानून तथा न्यायालय के आदेशों के अनुरूप समाधान तलाशने की मांग की गई है।

