मथुरा में मनाई गई संत चरण दास जी की 323वीं जयंती, समारोह में दिखा श्रद्धा और भक्ति भाव का रूप
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: भार्गव सभा की ओर से संत चरण दास जी की 323वीं जयंती श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन गोविंद नगर स्थित सर्वेश्वरी सदन में किया गया। इस अवसर पर भार्गव समाज के लोगों ने संत चरण दास जी के जीवन, साधना, तपस्या और आध्यात्मिक योगदान को स्मरण किया। साथ ही उनके बताए आदर्शों को जीवन में अपनाने और नई पीढ़ी तक उनके विचारों को पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शुरुआत संत चरण दास जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करने और माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद महिलाओं ने भजन प्रस्तुत किए। भजनों के माध्यम से संत चरण दास जी के जन्मोत्सव पर श्रद्धा व्यक्त की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
संत चरण दास जी के जीवन को किया याद
जयंती समारोह के दौरान वक्ताओं ने संत चरण दास जी के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संत चरण दास जी का जीवन साधना, त्याग और मानव कल्याण की भावना से जुड़ा रहा। उनके विचारों ने समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देने का काम किया।
वक्ताओं के अनुसार, संत चरण दास जी का जन्म वर्ष 1703 में भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया के दिन राजस्थान के अलवर जिले के डेहरा गांव में भार्गव ब्राह्मण परिवार में हुआ था। कार्यक्रम में बताया गया कि उन्होंने बाल अवस्था में ही संन्यास ग्रहण कर लिया था। इसके बाद उन्होंने जीवनभर बाल ब्रह्मचारी रहकर आध्यात्मिक साधना की और समाज को मार्गदर्शन देने का कार्य किया।
समारोह में वक्ताओं ने संत चरण दास जी के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन केवल धार्मिक साधना तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें समाज और मानव कल्याण की भावना भी दिखाई देती है।
त्याग और साधना से प्रेरणा लेने का संदेश
जयंती समारोह में वक्ताओं ने कहा कि संत चरण दास जी की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। उनके जीवन में त्याग, तपस्या, अनुशासन और साधना को विशेष महत्व दिया गया। इसलिए उनके आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की परंपरा और आध्यात्मिक विरासत तभी आगे बढ़ती है, जब नई पीढ़ी अपने महापुरुषों और संतों के जीवन के बारे में जाने। इसी उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इससे बच्चों और युवाओं को अपने समाज की परंपराओं तथा आध्यात्मिक इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलता है।
महिलाओं ने प्रस्तुत किए भजन
कार्यक्रम में महिलाओं ने भक्ति गीत और भजन प्रस्तुत किए। भजनों के माध्यम से संत चरण दास जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई। इसके साथ ही उपस्थित लोगों ने उनके चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर नमन किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भार्गव समाज के लोग शामिल हुए। सभी ने संत चरण दास जी के जीवन और उनके आध्यात्मिक योगदान को याद किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने उनके बताए मार्ग पर चलने और समाज में सेवा, सद्भाव तथा मानव कल्याण की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
समाज की नई पीढ़ी तक पहुंचे विचार
जयंती समारोह में यह बात भी सामने आई कि संतों और महापुरुषों की शिक्षाओं को केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि संत चरण दास जी के जीवन से त्याग, साधना और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे मूल्यों की प्रेरणा ली जा सकती है।
इसके अलावा, समाज के लोगों ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को अपनी परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत की जानकारी देने के लिए नियमित रूप से ऐसे आयोजन किए जाने चाहिए। इससे सामाजिक एकजुटता भी मजबूत होती है और लोगों को अपने सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलता है।
बड़ी संख्या में समाज के लोग रहे मौजूद
संत चरण दास जी की 323वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भार्गव समाज के अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में निरुपम भार्गव, श्याम बिहारी, विजय, पंडित कुंज बिहारी, ऋषि, रवि, मुकेश, सुधीर, राकेश एडवोकेट, योगेश, अमित, विवेक, कार्तिक और राजकुमार भार्गव सहित अन्य लोगों ने सहभागिता की।
महिलाओं में श्रीमती मालती भार्गव, उषा, शक्ति, सरिता, अनुभा, पूनम, दीपिका, नीतू, ज्योति, राधिका, सीमा, पायल, स्नेह, लता, नेहा और प्रिया सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने संत चरण दास जी के चित्र के समक्ष श्रद्धापूर्वक नमन किया। साथ ही उनके जीवन और आध्यात्मिक संदेश को याद करते हुए समाज में सद्भाव, सेवा और मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
मथुरा में आयोजित यह जयंती समारोह भार्गव समाज के लिए आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर रहा। कार्यक्रम के माध्यम से संत चरण दास जी के जीवन, साधना और उनके आदर्शों को स्मरण किया गया तथा समाज के लोगों ने उनकी शिक्षाओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

