फतेहपुर में सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने मंदिर और मकानों पर कार्रवाई का जताया विरोध

3cfc1867-1d9f-408f-8cfc-a60eedfe4023

रिपोर्ट – अशोक सिंह 

फतेहपुर: जिले के चांदपुर थाना क्षेत्र के ग्राम गौरा में डिघरुवा-गौरा बाजार-हरिजनपुर मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर विवाद सामने आया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए चल रहे कार्य के बीच कुछ ग्रामीणों ने विभागीय कार्रवाई में भेदभाव का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सीमा में आने वाले कुछ निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि प्रभावशाली लोगों के मकानों और निर्माणों को लेकर समान कार्रवाई नहीं हो रही है। इसी के साथ ग्रामीणों ने गांव में स्थित पुराने महादेव मंदिर को संभावित रूप से प्रभावित होने की आशंका जताते हुए उसे सुरक्षित रखने की मांग की है।

इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर सड़क की दोबारा निष्पक्ष पैमाइश कराने और निर्धारित मानकों के अनुसार चौड़ीकरण कार्य कराने की मांग की है। वहीं, सड़क परियोजना के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार डिघरुवा से गौरा बाजार होते हुए हरिजनपुर तक करीब आठ किलोमीटर मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का काम प्रस्तावित है। मार्च 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट में इस परियोजना की लागत करीब 15.09 करोड़ रुपये बताई गई थी।

सड़क चौड़ीकरण को लेकर ग्रामीणों की शिकायत

गौरा गांव में सड़क चौड़ीकरण का कार्य शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर विवाद सामने आया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सड़क के लिए निर्धारित सीमा में आने वाले मकानों और दुकानों को चिह्नित किया गया था। इसके बाद कुछ निर्माणों पर कार्रवाई भी की गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान सभी प्रभावित निर्माणों को समान रूप से नहीं देखा जा रहा है। कुलदीप समेत अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे क्षेत्र की दोबारा पैमाइश कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सड़क की निर्धारित सीमा में कौन-कौन से निर्माण वास्तव में आ रहे हैं।

हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी गौरा बाजार में सड़क सीमा में आने वाले मकानों को लेकर विवाद का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण ने जिलाधिकारी को शिकायत देकर सड़क सीमा में आने वाले हिस्सों की निष्पक्ष पैमाइश और समान कार्रवाई की मांग की है।

पुराने मंदिर को लेकर भी ग्रामीणों में चिंता

सड़क चौड़ीकरण को लेकर सामने आए विवाद में गांव के पुराने महादेव मंदिर का मुद्दा भी शामिल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है और सड़क निर्माण के दौरान इसकी संरचना प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की योजना और मौके की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करते समय मंदिर को सुरक्षित रखने का विकल्प तलाशा जाए। ग्रामीणों के अनुसार, विकास कार्य जरूरी है, लेकिन धार्मिक स्थल और स्थानीय आबादी से जुड़े संवेदनशील विषयों पर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

हालांकि, मंदिर की वास्तविक आयु और सड़क परियोजना के तकनीकी नक्शे में उसकी स्थिति से संबंधित अंतिम स्थिति संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक अभिलेखों से ही स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल ग्रामीणों की ओर से व्यक्त की गई आशंका को शिकायत के रूप में देखा जा रहा है।

15 करोड़ से अधिक की सड़क परियोजना

डिघरुवा-गौरा बाजार-हरिजनपुर मार्ग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है। मार्च 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, करीब आठ किलोमीटर लंबे इस मार्ग के चौड़ीकरण के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से लगभग 15.09 करोड़ रुपये की योजना बताई गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि इस मार्ग के बेहतर होने से आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा उपलब्ध टेंडर संबंधी जानकारी में डिघरुवा-गौरा बाजार-हरिजनपुर मार्ग के आठ किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का उल्लेख मिलता है। टेंडर विवरण में पांच वर्ष के रखरखाव का भी प्रावधान बताया गया है।

इसलिए परियोजना से जुड़े विवाद के बीच ग्रामीणों की मुख्य मांग यह है कि सड़क निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों और स्वीकृत सीमा के अनुरूप किया जाए।

निर्माण की गुणवत्ता पर भी उठाए सवाल

ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और सड़क की मोटाई समेत कुछ मानकों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जा रहा है।

हालांकि, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता या निर्धारित मानकों के उल्लंघन की पुष्टि अभी किसी स्वतंत्र तकनीकी जांच से सामने नहीं आई है। ऐसे में इन आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की जांच, गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की भी जांच कराई जाए। यदि तकनीकी मानकों में कोई कमी मिलती है तो नियमानुसार सुधार कराया जाए।

डीएम को दिया शिकायती पत्र

मामले को लेकर कुलदीप पटेल पुत्र रामदास, कुलदीप कुमार, राजनारायण, अमन पटेल, विनोद, सरवन और रामनरेश समेत अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में प्रमुख रूप से सड़क की सीमा की दोबारा पैमाइश, सभी प्रभावित निर्माणों पर समान नियम लागू करने, सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच और पुराने मंदिर को सुरक्षित रखने की मांग शामिल है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करता है तो विवाद से जुड़े कई बिंदुओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इसके साथ ही सड़क चौड़ीकरण का काम भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है।

कार्रवाई में समानता की मांग

ग्रामीणों की शिकायत का प्रमुख बिंदु कार्रवाई में समानता से जुड़ा है। उनका कहना है कि सड़क सीमा में आने वाले सभी निर्माणों के लिए एक समान मानदंड लागू होना चाहिए। यदि किसी मकान, दुकान या अन्य निर्माण का हिस्सा स्वीकृत सड़क सीमा में आता है तो उसके संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाए और किसी भी व्यक्ति को विशेष लाभ न मिले।

दूसरी ओर, सड़क चौड़ीकरण परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में आवागमन को बेहतर बनाना है। इसलिए प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि विकास कार्य को निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार आगे बढ़ाने के साथ प्रभावित लोगों की शिकायतों का भी नियमानुसार समाधान किया जाए।

प्रशासन की जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के बाद इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच और मौके की स्थिति का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पैमाइश, राजस्व अभिलेख, सड़क का स्वीकृत नक्शा और निर्माण की वास्तविक स्थिति की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क सीमा में कितने निर्माण आ रहे हैं और किस हिस्से पर किस प्रकार की कार्रवाई नियमानुसार होनी है।

इसी तरह मंदिर की स्थिति को लेकर भी संबंधित अभिलेख और मौके की स्थिति देखना आवश्यक होगा। यदि तकनीकी रूप से सड़क की दिशा में बदलाव या अन्य विकल्प संभव है, तो संबंधित विभाग उस पर विचार कर सकता है।

कुल मिलाकर, फतेहपुर के गौरा गांव में सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर ग्रामीणों की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों ने कार्रवाई में समानता, सड़क की निष्पक्ष पैमाइश, निर्माण गुणवत्ता की जांच और पुराने महादेव मंदिर को सुरक्षित रखने की मांग की है। अब प्रशासनिक जांच और संबंधित विभाग की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सड़क परियोजना में निर्धारित सीमा और निर्माण मानकों का पालन किस स्तर तक हुआ है। वहीं, ग्रामीणों ने मामले का निष्पक्ष समाधान होने की उम्मीद जताई है।

You may have missed