कुशीनगर में गंडक नदी उफान पर, एक दर्जन गांवों में घुसा बाढ़ का पानी; राहत शिविरों में पहुंचे ग्रामीण

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रिपोर्ट: शैलेन्द्र गुप्ता 

कुशीनगर: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में लगातार दो दिन हुई मूसलाधार बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया है। नेपाल के देवाघाट बैराज से 5 लाख 91 हजार क्यूसेक और वाल्मीकिनगर बैराज से 4 लाख 16 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी का पानी आसपास के दियारा क्षेत्र में फैल गया। इसके चलते जिले के करीब एक दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

सालिगपुर, महादेवा, मरीचहवा, शिवपुर, नारायणपुर और गोपालपुर समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। गांवों के रास्तों और गलियों में पानी भर जाने के कारण लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। ऐसे में कई परिवार जरूरी सामान और मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।

NH-27B पर बनाए गए राहत शिविरों में पहुंचे ग्रामीण

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कई ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-27बी पर बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में शरण ली है। वहीं, कुछ परिवार अपने घरों में मौजूद राशन और पशुओं की देखभाल के लिए वहीं रुके हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, घरों में पानी भरने के कारण रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना चुनौती बन गया है।

सालिगपुर और महादेवा गांव में बाढ़ का असर अधिक दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर गांव की गलियां और संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। इसके चलते लोगों को घरों से बाहर निकलने के लिए ऊंचे रास्तों या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।

पंचायत भवन और स्कूल तक पहुंचा पानी

बाढ़ का पानी गांव के पंचायत भवन और जूनियर हाईस्कूल तक पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। वहीं, खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसल भी पानी में डूब गई है। लगातार जलभराव बने रहने से किसानों को फसल खराब होने की आशंका है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने फसलों की तैयारी में कई महीने मेहनत की थी, लेकिन अचानक बढ़े जलस्तर से खेतों में पानी भर गया। यदि पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है।

बच्चों और परिवारों की सुरक्षा बनी प्राथमिकता

बाढ़ प्रभावित इलाकों में परिवार अपने बच्चों और जरूरी सामान को सुरक्षित रखने में जुटे हैं। कई लोग ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं, जबकि कुछ परिवार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का इस्तेमाल सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए कर रहे हैं।

घरों में पानी भरने के बाद कई परिवारों ने बच्चों को ऊंचे स्थानों पर सुरक्षित रखने की व्यवस्था की है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी के साथ सांप और अन्य जीव-जंतु भी गांव की ओर आ सकते हैं। ऐसे में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है।

पेयजल स्रोत भी प्रभावित

बाढ़ के पानी के गांवों में पहुंचने से पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। कई हैंडपंप और जलकल विभाग की टोटियां पानी में डूब गई हैं। ऐसे में ग्रामीणों के सामने स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।

बाढ़ के दौरान दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए राहत शिविरों में भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से लोगों को साफ पानी के इस्तेमाल और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

ग्रामीणों ने बांधों को मजबूत करने की मांग उठाई

बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हर वर्ष बाढ़ की समस्या सामने आती है। उनका मानना है कि यदि बांधों की नियमित निगरानी, मरम्मत और मजबूती पर ध्यान दिया जाए तो बाढ़ के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की दिशा में काम करने की मांग की है। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ आने से फसलों, घरों और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ता है। इसलिए सिर्फ राहत कार्य के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण के स्थायी उपाय भी जरूरी हैं।

प्रशासन ने राहत शिविरों में किए इंतजाम

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में भोजन और पानी उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य संबंधी इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

इसके अलावा, जरूरत के अनुसार प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम भी जारी है। प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को आवश्यक सुविधाएं समय पर मिल सकें।

विधायक ने नाव से किया प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

क्षेत्रीय विधायक विवेकानंद पाण्डेय भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, विधायक नाव के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

विधायक प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं। इस दौरान ग्रामीणों की समस्याओं और उनकी आवश्यकताओं की जानकारी भी ली जा रही है।

जलस्तर कम होने का इंतजार

गंडक नदी के बढ़े जलस्तर ने कुशीनगर के दियारा क्षेत्र के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घरों में पानी, खेतों में जलभराव और पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने के कारण लोगों को अब नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार है।

फिलहाल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से राहत एवं बचाव कार्य जारी है। वहीं, प्रभावित गांवों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले समय में जलस्तर में कमी आने पर लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यदि नदी का जलस्तर और बढ़ता है तो प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन को अतिरिक्त राहत एवं बचाव व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

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