कानपुर में ओरल कैंसर पर विशेषज्ञों ने चेताया, शुरुआती लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच

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Digital UP News 

कानपुर: मुंह के कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर विशेषज्ञों ने जोर दिया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के नाक, कान एवं गला रोग विभाग की ओर से आयोजित 43वीं यूपीएओईकॉन का रविवार को समापन हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने ओरल कैंसर के बढ़ते मामलों, इसके जोखिम कारकों, शुरुआती लक्षणों और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

विशेषज्ञों ने बताया कि मुंह के कैंसर की पहचान यदि शुरुआती चरण में हो जाए तो उपचार के बेहतर विकल्प उपलब्ध रहते हैं। इसलिए मुंह में लंबे समय तक रहने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। WHO के अनुसार दो सप्ताह से अधिक समय तक न भरने वाला घाव, मुंह में सफेद या लाल चकत्ता, गांठ अथवा निगलने में परेशानी जैसे लक्षण चिकित्सकीय जांच की जरूरत का संकेत हो सकते हैं।

30 से 50 वर्ष की उम्र में भी दिख रहा खतरा

सम्मेलन में डॉ. अक्षत मलिक ने बताया कि उनके अनुसार 30 से 50 वर्ष की उम्र के लोगों में भी ओरल कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि मुंह से जुड़े किसी भी ऐसे लक्षण को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें, जो सामान्य उपचार के बाद भी ठीक नहीं हो रहा हो।

उन्होंने बताया कि कई मरीज बीमारी के बढ़ जाने के बाद चिकित्सक तक पहुंचते हैं। ऐसे में उपचार चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए शुरुआती संकेतों को पहचानना और समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

भारत में ओरल कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों का सेवन महत्वपूर्ण माना जाता है। ICMR के उपलब्ध शोध में तंबाकू चबाने को ओरल कैंसर के महत्वपूर्ण जोखिम कारक के रूप में दर्ज किया गया है।

पान मसाला और तंबाकू से जुड़े जोखिम पर जोर

विशेषज्ञों ने पान मसाला और तंबाकू उत्पादों के सेवन को लेकर भी लोगों को सावधान किया। डब्ल्यूएचओ के अनुसार तंबाकू और बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पाद ओरल कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार तंबाकू सेवन से मुंह के ऊतकों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक रहने वाली स्थानीय जलन, जैसे तेज या टूटे हुए दांत से बार-बार चोट लगना, भी मुंह की समस्याओं से जुड़ी हो सकती है।

इसलिए विशेषज्ञों ने लोगों से तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों से दूरी बनाने तथा मुंह में किसी भी असामान्य बदलाव की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।

HPV संक्रमण को लेकर भी दी जानकारी

सम्मेलन में हैदराबाद से आए डॉ. अभिमन्यु राय ने ओरल और हेड-नेक कैंसर में ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी HPV की भूमिका पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुछ प्रकार के सिर और गर्दन के कैंसर HPV संक्रमण से जुड़े हो सकते हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि ओरल कैंसर का कारण केवल एक कारक नहीं होता। ICMR के उपलब्ध शोध में सिर और गर्दन के कैंसर के विभिन्न हिस्सों में HPV की मौजूदगी तथा तंबाकू जैसे अन्य जोखिम कारकों के संबंध का उल्लेख किया गया है।

इसलिए किसी व्यक्ति में कैंसर का कारण निर्धारित करने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है। केवल किसी एक संभावित कारण के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

बायोप्सी को लेकर भ्रांति दूर करने की अपील

डॉ. अक्षत मलिक ने बायोप्सी को लेकर लोगों में मौजूद भ्रांतियों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि कुछ लोग मानते हैं कि बायोप्सी कराने से कैंसर फैल जाता है, जबकि यह एक आम मिथक है।

किसी संदिग्ध घाव या गांठ की प्रकृति जानने के लिए चिकित्सक आवश्यकता के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं। ICMR की ओर से ओरल और लिप कैंसर के लिए मानक उपचार संबंधी दिशानिर्देश भी उपलब्ध हैं।

इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के जांच से बचना या केवल किसी सुनी-सुनाई बात के आधार पर निर्णय लेना उचित नहीं है।

ये लक्षण दिखें तो जांच जरूरी

विशेषज्ञों ने ओरल कैंसर के संभावित शुरुआती संकेतों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मुंह में सफेद या लाल चकत्ता, असामान्य उभार, लंबे समय तक ठीक न होने वाला घाव या छाला और गर्दन में गांठ जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

WHO भी मुंह में लंबे समय तक न भरने वाले घाव, सफेद या लाल पैच, मुंह या गर्दन में गांठ तथा चबाने या निगलने में कठिनाई जैसे संकेतों पर चिकित्सकीय जांच की सलाह देता है।

हालांकि, ऐसे लक्षण दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर ही है। इनका कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच आवश्यक है।

आधुनिक इलाज में रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल

डॉ. अभिमन्यु राय ने सम्मेलन में बताया कि मुंह और सिर-गर्दन से जुड़े कुछ कैंसर के उपचार में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उन्होंने रोबोटिक सर्जरी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी इस तकनीक की शुरुआत की जा चुकी है।

इसके अलावा विशेषज्ञों ने रेडिएशन उपचार में हुए सुधारों पर भी चर्चा की। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का उद्देश्य उपचार को अधिक सटीक बनाने और मरीजों के लिए उपचार प्रक्रिया को बेहतर करना है। हालांकि, उपचार की विधि मरीज की बीमारी, उसके स्थान और अवस्था के आधार पर चिकित्सक तय करते हैं।

सम्मेलन में हुआ मैत्री क्रिकेट मैच

43वीं यूपीएओईकॉन के दौरान अकादमिक कार्यक्रमों के साथ प्रतिभागियों के बीच आपसी सौहार्द और टीम भावना को बढ़ावा देने के लिए टीएसएच ग्राउंड, कानपुर में मैत्री क्रिकेट मैच भी आयोजित किया गया।

यह मुकाबला साइनस टाइटन्स और ओरल टाइटन्स के बीच खेला गया। शानदार प्रदर्शन के लिए ईएनटी विभाग के प्रोफेसर डॉ. निशांत सक्सेना को मैन ऑफ द मैच चुना गया। आयोजन ने सम्मेलन में चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच संवाद और आपसी जुड़ाव का एक अलग अवसर भी दिया।

सम्मेलन के समापन पर आयोजन अध्यक्ष एवं ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. हरेंद्र कुमार गौतम, आयोजन सचिव डॉ. अमृता श्रीवास्तव तथा आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी गई।

कुल मिलाकर, 43वीं यूपीएओईकॉन में ओरल कैंसर की समय पर पहचान, जोखिम कारकों से बचाव और आधुनिक उपचार विकल्पों को लेकर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि मुंह में लंबे समय तक बने रहने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।