बांदा में बारिश से कच्चा मकान ढहा, मलबे में दबकर 70 वर्षीय वृद्ध की मौत
रिपोर्ट- पंकज त्रिपाठी
बांदा/पैलानी। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। पैलानी तहसील क्षेत्र के चिल्ला थाना अंतर्गत पपरेंदा गांव में शनिवार देर रात एक जर्जर कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय मकान के अंदर सो रहे 70 वर्षीय चुन्नी वर्मा मलबे में दब गए। परिजनों ने तत्काल मलबा हटाकर उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, पपरेंदा गांव निवासी चुन्नी वर्मा पुत्र स्वर्गीय सुखारी वर्मा शनिवार रात अपने कच्चे मकान में सो रहे थे। पिछले दो दिनों से क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी। बारिश के कारण मकान की दीवारें और अन्य हिस्से कमजोर हो गए थे। इसी बीच रात करीब 1:30 बजे अचानक मकान का एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। हादसे के दौरान चुन्नी वर्मा उसके मलबे की चपेट में आ गए।
बारिश के बीच अचानक ढह गया कच्चा मकान
मकान गिरने की आवाज सुनकर परिवार के लोग और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। इसके बाद सभी ने मिलकर मलबा हटाने का प्रयास शुरू किया। काफी प्रयास के बाद वृद्ध को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन उनकी हालत गंभीर थी। परिजनों के अनुसार, बाहर निकालने तक उनकी मौत हो चुकी थी।
घटना की जानकारी मिलने के बाद गांव में भी लोगों की भीड़ जुट गई। हादसे के बाद परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, लगातार बारिश के बीच कच्चे मकानों में रहने वाले ग्रामीणों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते थे चुन्नी वर्मा
परिजनों के मुताबिक, चुन्नी वर्मा मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। उनके परिवार में छह बेटे हैं, जो गांव में रहकर मजदूरी करते हैं। बताया गया कि मृतक के नाम करीब एक बीघा जमीन थी और परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी।
परिजनों ने बताया कि परिवार के लिए चुन्नी वर्मा का निधन बड़ा सदमा है। उनकी मौत के बाद घर में शोक का माहौल है। आसपास के ग्रामीण भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
लगातार बारिश से बढ़ी कच्चे मकानों की चिंता
बांदा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान कच्चे और जर्जर मकानों को लेकर खतरा बढ़ जाता है। लगातार पानी पड़ने से मिट्टी की दीवारों और पुराने निर्माण की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों से जर्जर मकानों की स्थिति को लेकर सतर्क रहने की अपील की जाती है।
पपरेंदा गांव की घटना ने एक बार फिर बारिश के मौसम में कमजोर मकानों की सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए जर्जर मकान बारिश के दौरान गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसलिए ऐसे मकानों की समय रहते जांच और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थान पर जाने की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
घटना के संबंध में अभी तहरीर नहीं दी गई
परिजनों के अनुसार, हादसे के संबंध में अभी तक थाने में कोई तहरीर नहीं दी गई है। घटना के बाद परिवार शोक में डूबा हुआ है। स्थानीय स्तर पर हादसे की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने की बात भी सामने आई है।

