जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में एंटीबायोटिक जागरूकता दिवस, बिना सलाह दवा लेने से बचने की अपील
रिपोर्ट- हरिशंकर शर्मा
कानपुर। गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल (जीएसवीएम) मेडिकल कॉलेज, कानपुर के बाल रोग विभाग में ‘तर्कसंगत एंटीबायोटिक जागरूकता दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एंटीबायोटिक दवाओं के सही और सीमित उपयोग को लेकर चिकित्सकों तथा आम लोगों को जागरूक किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल को रोकना और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के बढ़ते खतरे के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा। विशेषज्ञों ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल केवल चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना चाहिए। साथ ही, डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक और अवधि का पालन करना भी बेहद जरूरी है।
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस बन रही बड़ी चुनौती
कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र गौतम ने की। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक और अनुचित इस्तेमाल के कारण बैक्टीरिया में इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही है। इसे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस कहा जाता है।
डॉ. गौतम ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में AMR एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आ रही है। इसके कारण निमोनिया, सेप्सिस और यूटीआई जैसे गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में प्रभावी दवाओं का चयन कठिन हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल जरूरत के बिना और गलत तरीके से जारी रहा, तो भविष्य में कुछ संक्रमणों के इलाज के लिए उपलब्ध दवाओं की प्रभावशीलता कम हो सकती है। इसलिए एंटीबायोटिक का विवेकपूर्ण उपयोग समय की आवश्यकता है।
सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार में एंटीबायोटिक से बचें
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई. के. राव ने विशेष रूप से बच्चों के अभिभावकों को एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सामान्य सर्दी-जुकाम, खांसी और अधिकांश वायरल बुखार में एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि एंटीबायोटिक वायरस पर प्रभाव नहीं डालती हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को बीमारी के दौरान अपनी ओर से एंटीबायोटिक देने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। बिना आवश्यकता एंटीबायोटिक देने से शरीर में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया के संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा भविष्य में एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समस्या का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. राव ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चे की पुरानी बीमारी या पहले इस्तेमाल की गई दवा के आधार पर खुद से एंटीबायोटिक शुरू न करें। प्रत्येक बीमारी में दवा की आवश्यकता और उसकी खुराक अलग हो सकती है।
संक्रमण प्रतिरोधी होने पर बढ़ सकता है इलाज का खर्च
कार्यक्रम में डॉ. अमितेश यादव ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के आर्थिक और चिकित्सकीय प्रभावों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब किसी संक्रमण पर सामान्य एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं रहती, तो मरीज को उपचार के लिए अधिक समय तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है।
इसके परिणामस्वरूप उपचार की अवधि बढ़ने के साथ जटिलताओं और आर्थिक बोझ में भी वृद्धि हो सकती है। इसलिए संक्रमण की शुरुआत में ही सही चिकित्सकीय सलाह और उचित उपचार बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि घर में बची हुई पुरानी एंटीबायोटिक दवा को बिना चिकित्सकीय सलाह दोबारा इस्तेमाल न करें। इसी तरह किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी दवा देना भी उचित नहीं है, क्योंकि हर मरीज की बीमारी, उम्र, वजन, संक्रमण की स्थिति और चिकित्सकीय जरूरत अलग हो सकती है।
डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक खरीदने से बचें
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने चिकित्सकों और आमजन के लिए एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। चिकित्सकों से अपील की गई कि वे मरीज की चिकित्सकीय स्थिति, आवश्यक जांच और उचित संकेतों के आधार पर ही एंटीबायोटिक निर्धारित करें।
वहीं, आम लोगों से कहा गया कि वे बिना डॉक्टर के पर्चे के एंटीबायोटिक खरीदकर उसका मनमाना सेवन न करें। इसके अलावा डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक (Dose) और समयावधि (Duration) का पूरा पालन किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों ने यह भी समझाया कि डॉक्टर की सलाह के बिना दवा शुरू करना जितना अनुचित है, उतना ही अपनी इच्छा से उपचार के बीच में दवा बंद करना भी उचित नहीं है। किसी भी दवा में बदलाव करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना जरूरी है।
करीब 35 चिकित्सकों और रेजिडेंट्स ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में डॉ. नेहा अग्रवाल, डॉ. राहुल और डॉ. रश्मि सहित लगभग 35 वरिष्ठ चिकित्सकों और रेजिडेंट्स ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल, AMR की रोकथाम और मरीजों को सही जानकारी उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई।
अंत में कार्यक्रम में मौजूद सभी चिकित्सकों ने एंटीबायोटिक दवाओं के जिम्मेदार और तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने तथा समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

